दावा
सोशल मीडिया पर दावाकिया जा रहा है कि महाराष्ट्र के पालघर में मुसलमानों ने हिंदू साधुओं की हत्या कर दी है. पोस्ट में अटैच किए गए वीडियो में एक भीड़ भगवा कपड़ा पहने साधुओं की पीट रही है. हम दावे में बिना भाषाई बदलाव किए ज्यों का त्यों लिख रहे हैं.(आर्काइव लिंक
)
महाराष्ट्र: 👇 (17.4.20)
पालघर के गड़चिंचले गांव में मुसलमानों ने एक हिंदू साधू की हत्या कर दी लोगों 🙄😒😢😢
कलेक्टर कैलास शिंदे का कहना है, "उन्हें अस्पताल में मृत लाया गया । करीब 110 ग्रामीणों को पूछताछ के लिए थानों में लाया गया है। आगे की जांच जारी है । क्या ये माबलिचिंग नही है? अब रविश कुमार लंबी लंबी पोस्ट नही लिखेगा और ना ही ये राष्ट्रीय खबर बन पायेगी। जागो हिंदूओं जागो अभी मौका है।
महाराष्ट्र: 👇 (17.4.20)
पालघर के गड़चिंचले गांव में मुसलमानों ने एक हिंदू साधू की हत्या कर दी लोगों 🙄😒😢😢
कलेक्टर कैलास शिंदे का कहना है, "उन्हें अस्पताल में मृत लाया गया । करीब 110 ग्रामीणों को पूछताछ के लिए थानों में लाया गया है। आगे की जांच जारी है । क्या ये माबलिचिंग नही है? अब रविश कुमार लंबी लंबी पोस्ट नही लिखेगा और ना ही ये राष्ट्रीय खबर बन पायेगी। जागो हिंदूओं जागो अभी मौका है। 😠😡😠😡
Posted by Raaj Borasi
on Sunday, 19 April 2020
में शेयर किया है. (आर्काइव लिंक
). ट्विटर पर भी यही दा
वा किया जा रहा है. (आर्काइव लिंक
)
पड़ताल
हमने इस दावे की पड़ताल की. हमारे दावे में ये वायरल दावा झूठ निकला. पालघर मॉब लिंचिंग में कोई भी मुस्लिम शामिल नहीं है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफ किया कि ये मामला धार्मिक नहीं है. इसे धर्म से न जोड़ा जाए. उद्धव ठाकरे ने 20 अप्रैल, 2020 को प्रदेश के नाम दिए संबोधन में कहा ये बात साफ कही.आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, दो साधू और उनका ड्राइवर केंद्र शासित प्रदेश (UT) दादरा एवं नगर हवेली के सिलवासा में जाना चाहते थे. जब वो UT और महाराष्ट्र के बॉर्डर पर पहुंचे, तो कर्फ्यू पास न होने की वजह से उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं मिली. ऐसे में वो गड़चिंचले गांव के इलाके की ओर बढ़े. वहां से सिलवासा जाने की कोशिश में थे.
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, पालघर के इस इलाके में बच्चा चोरी और अंग व्यापार जैसे अफवाहों की वजह से पहले से ही तनाव था. लोग रात भर जागकर पहरेदारी कर रहे थे. साधुओं की लिंचिंग से एक दिन पहले, पुलिस टीम और एक डॉक्टर पर भी ये लोग हमला कर चुके थे.
ये जनजातीय इलाका है और शिक्षा का स्तर शेष राज्य के मुक़ाबले बेहद कम है. क़रीब 30 फीसदी लोग ही साक्षर हैं.

2011 की जनगणना के आंकड़े.
उस वक्त ये ठाणे जिले का हिस्सा था. 1 अगस्त, 2014 को पालघर नया जिला बना. तब इस इलाके को पालघर में मिला दिया गया.
नतीजा
द लल्लनटॉप की पड़ताल में मुस्लिमों को पालघर लिंचिंग के लिए दोषी बताता दावा बिल्कुल झूठ निकला. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने साफ़ कहा है कि ये लिंचिंग की घटना गलतफ़हमी के कारण हुई है. इसका किसी भी तरह से धर्म के साथ कोई नाता नहीं है. लिंच करने वाले मुस्लिम नहीं हैं.
अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है
तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com
पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.










