
पिछले कुछ घंंटों में ये पोस्ट कई लोगों ने शेयर किया है. दावा किया जा रहा है कि वीआपी कल्चर की वजह से घायल बच्ची की मौत हो गई.
दावा
फेसबुक और ट्विटर पर कई पोस्ट्स वायरल हैं. एक वीडियो के साथ कैप्शन लिखा मिलता है.
'भाजपा सांसद मनोज तिवारी के लिए दिल्ली पुलिस ने एम्बुलेंस रोकी,..एम्बुलेंस में जिन्दगी और मौत से लड़ रही बच्ची थी .और अंत में बच्ची ने दम तोड़ दिया !'Whatsapp पर शेयर करते वक्त एक और लाइन इसमें जोड़ी जा रही है. लाइन है-
'आज आपने शेयर नही किया तो आपके साथ भी ये हो सकता है आज से whatsapp चलाना छोड़ दो या फिर ये वीडियो पूरी दुनिया मे भेज दो और आगे आपकी मर्जी है👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻'इसके साथ ये वायरल वीडियो भेजा जा रहा है.
vips are more important then child in ambulance
Posted by Preet Narula
on Friday, 31 March 2017
2. हमने गूगल पर 'Delhi police stop ambulence 2017' सर्च किया. सर्च करने पर TOI की एक रिपोर्ट मिली.
3. रिपोर्ट के मुताबिक ये वीडियो प्रीत नरूला नाम के शख्स ने फेसबुक पर लाइव किया था. तारीख थी 1 अप्रैल, 2017. इस लाइव को अबतक 13 लाख बार देखा जा चुका है.

TOI के मुताबिक प्रीत नरूला बैंकर हैं और उनके समेत यहां खड़े सभी लोगों ने पुलिस से एंबुलेंस जाने देने के लिए बार-बार कहा.
4. TOI ने नरूला के हवाले से लिखा था.
'बैरिकेडिंग के पास 40-50 गाड़ियां थीं जब हमारे पीछे रुकी एंबुलेंस का सायरन हमें सुनाई दिया. सबने गाड़ियां किनारे कीं और एंबुलेंस बैरिकेड तक पहुंच गई. लेकिन पुलिस ने आगे जाने नहीं दिया.'रिपोर्ट में इस घटना का कारण भी दिया है. दरअसल, ये बैरिकेडिंग तत्कालीन मलेशियाई प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक भारत के दौरे पर थे. उनके काफिले के लिए ये ट्रैफिक रोका गया था. रिपोर्ट में पुलिस का पक्ष भी लिखा गया है. पुलिस ने एंबुलेंस को जाने देने में देरी करने से इनकार किया. पुलिस ने कहा कि मलेशियाई प्रधानमंत्री का काफिला तकरीबन पहुच ही गया था. और जैसे ही काफिला गुज़रा, एंबुलेंस को भी साथ-साथ जाने दिया गया था. लल्लनटॉप के अलावा, TOI और एबीपी न्यूज़ ने भी इस घटना की सच्चाई के बारे में जानकारी दी है.

खबर के मुताबिक काफिला मनोज तिवारी की बजाए, मलेशियाई प्रधानमंत्री के लिए रोका गया था.
नतीजा लल्लनटॉप की पड़ताल में ये दावा झूठ निकला. दो नतीजे सामने आए हैं.
# पहला- मनोज तिवारी का इस घटना से कोई वास्ता नहीं है. ट्रैफिक मलेशियाई प्रधानमंत्री के लिए रोका गया था. और ये घटना अभी की नहीं है, 2017 की है.
# दूसरा- बच्ची के साथ क्या हुआ, जिंदा रही या कुछ बुरा हुआ, इसकी कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है. कम-से-कम वीडियो में ऐसा कुछ नहीं है.
शकील सैय्यद की तरह आपको भी किसी खबर पर शक है तो हमें लिखिए- हमारी मेल आईडी है- Padtaalmail@gmail.com










