दावा
कुछ दिन पहले खबर आई थी कि सांसदों के वेतन में से 30% की कटौती होगी. अब सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि सांसदों का वेतन 30% घटाकर, बाकी भत्तों में बढ़ोतरी कर दी गई है. दावा है-सांसदों का वेतन 30% घटाकर अन्य भत्तों में भारी बढोत्तरी! नेता जी लोगन खातिर कोरोना महामारी नहीं है!इस बात के सबूत के तौर पर भारत का राजपत्र यानी 'द गजट ऑफ इंडिया' का स्क्रीनशॉट वायरल किया जा रहा है.
वायरल दावा.

दावे के साथ सबूत के तौर पर पेश की जा रही नोटिफिकेशन की तस्वीर, जिसमें निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 49 हज़ार देने की बात लिखी हुई है.
गजट नोटिफिकेशन और ये दावा वॉट्सऐप पर लगातार वायरल हो रहा है.
पड़ताल
हमने दावे की पड़ताल की. हमारी पड़ताल में यह दावा झूठा पाया गया. यह नोटिफिकेशन दावे के उलट, सांसदों के भत्ते में हुई कटौती का है. न कि बढ़ोतरी का.7 अप्रैल, 2020 को जारी हुए इस असाधारण गजट नोटिफिकेशन में सांसदों का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और कार्यालय भत्ता घटाया गया है. ये नोटिफिकेशन लोकसभा सचिवालय ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति की ओर से जारी किया है.
इस नोटिफिकेशन में लिखा है,
"संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 (1954 का संखयांक 30) की धारा 8 के अंतर्गत प्रत्येक संसद सदस्य 1 अप्रैल, 2020 से 31 मार्च, 2021 तक उनचास हज़ार रुपये प्रति माह की दर से निर्वाचन क्षेत्र भत्ता प्राप्त करने का पात्र होगा"यानी वित्त वर्ष 2020-21 में सांसदों को निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 49 हज़ार रुपये मासिक मिलेगा.
निर्वाचन क्षेत्र भत्ते के बारे में
7 अप्रैल 2020 को जारी नोटिफिकेशन.
वहीं कार्यालय खर्च के लिए मिलने वाला भत्ता 54 हज़ार रुपये होगा.
इसमें से 14 हज़ार रुपये लेखन सामग्री और डाक खर्च के लिए होंगे और 40 हज़ार रुपये सांसद अपने सचिव (या सहायकों) को मानदेय दे सकता है.आपके रेफरेंस के लिए हम पूरा नोटिफिकेशन यहां अटैच कर रहे हैं.
दफ्तर खर्च के लिए मिलने वाले भत्ते से जुड़ा नोटिफिकेशन, जो 7 अप्रैल 2020 को जारी किया गया.
दरअसल, नोटिफिकेशन दिखाकर वायरल किए जा रहे दावे से उलझन इसलिए हुई, क्योंकि इस नोटिफिकेशन में पुराने भत्ते का ज़िक्र नहीं था. ये भत्ता पहले से सांसदों को मिलता रहा है. ऐसा नहीं है कि कोरोना के दौरान नया भत्ता जारी किया गया हो.
इस नोटिफिकेशन के आखिर में एक टिप्पणी की गई थी. जिसमें लिखा था कि
"संसद सदस्य वेतन भत्ता एवं पेंशन अधिनियम 1954 में आखिरी बार 28 मार्च, 2018 को संशोधन किए गए थे."इसी क्लू के आधार पर हमने पुराने नोटिफिकेशन ढूंढी. संसदीय कार्य मंत्रालय की वेबसाइट पर हमें 1 अप्रैल, 2018 तक संशोधित हुए नियम
मिल गए. वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक,
संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 के तहत सांसदों को पहले निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 70 हज़ार रुपये मिलता था. वहीं, ऑफिस खर्च के लिए 60 हज़ार रुपये मिलते थे.आपके रेफरेंस के लिए पूरा नियम यहां एम्बेड कर रहे हैं.
7 अप्रैल 2020 के बाद क्या संशोधन हुए?7 अप्रैल, 2020 को जारी गजट नोटिफिकेशन के संशोधित नियम 1 अप्रैल, 2020 से 31 मार्च, 2021 तक लागू होंगे. संशोधन हैं-
1. निर्वाचन क्षेत्र भत्ता
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 70 हज़ार मिलता था, अब 30% की कटौती के बाद 49 हज़ार मिलेगा.
2. ऑफिस ख़र्च भत्ता
7 अप्रैल के नोटिफिकेशन से पहले 60 हज़ार रुपये भत्ता मिलता था. जिसमें 20 हज़ार स्टेशनरी वगैरह के लिए और 40 हज़ार स्टाफ रखने के लिए मिलता था. लेकिन अब, कुल 54 हज़ार रुपये मिलेंगे. स्टेशनरी के लिए 14 हज़ार और 40 हज़ार स्टाफ रखने के लिए. स्टाफ को दिए जाने वाले फंड में कटौती नहीं की गई है.
यही नियम राज्य सभा की वेबसाइट पर भी उपलब्ध
है.
इस खबर की पुष्टि के लिए हमने लोकसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की . नाम न छापने के आग्रह पर उन्होंने पुष्टि की,
सांसदों के कुल तनख्वाह में कटौती हुई है. किसी भी तरीके का इज़ाफ़ा नहीं हुआ है.7 अप्रैल को पब्लिश हुई एक रिपोर्ट
आजतक की वेबसाइट पर उपलब्ध है, उसमें भी विस्तार से यही जानकारी दी गई है.
नतीजा
हमारी पड़ताल में किया जा रहा दावा कि सांसदों ने अपनी तनख्वाह 30% कम तो की, लेकिन भत्तों में बड़ा इजाफा करवा लिया है, झूठ निकला. जिस नोटिफिकेशन की तस्वीर के साथ यह दावा किया जा रहा है, वह तनख्वाह में कटौती का नोटिफिकेशन है.अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है
तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com
पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.

















