Golmaal में बूढ़ी मकान मालकिन बनीं वेटरन एक्ट्रेस Sushmita Mukherjee पिछले 40 सालों से फिल्मों में काम कर रही हैं. मगर एक समय ऐसा भी आया था, जब उन्हें C-ग्रेड मूवीज़ में काम करना पड़ा था. उन मूवीज़ में, जिन्हें वो खुद सेक्सिस्ट और महिलाओं के लिए अपमानजनक मानती थीं. मगर ऐसा हुआ कैसे, बताते हैं.
'गोलमाल' की एक्ट्रेस आखिर C-ग्रेड फिल्मों में काम करने को मजबूर क्यों हो गईं?
वसूली वाले रोज घर आकर सुष्मिता और उनके पति को बच्चों के सामने धमकाते और गालियां देते थे.

'गोलमाल' के अलावा सुष्मिता ने 'खलनायक, 'रुदाली', 'किंग अंकल' और 'रक्त चरित्र' जैसी फिल्मों में काम किया है. साथ ही वो 'बालिका वधू', 'गंगा' और 'अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो' जैसे पॉपुलर सीरियल्स में भी नज़र आई हैं. लेकिन 1999 से 2004 के बीच उन्हें कोई ढंग का काम नहीं मिल पा रहा था. यही नहीं, 2002 में उनके पति राजा बुंदेला की प्रोडक्शन कंपनी भी बंद हो गई. राजा खुद भी एक्टर, प्रोड्यूसर और राजनेता हैं. लेकिन प्रोडक्शन कंपनी बंद पड़ जाने से पति-पत्नी पर 1 करोड़ रुपए का कर्ज़ आ गया. मजबूरन, उन्हें जहां-तहां जो काम मिला, कर्ज़ चुकाने के लिए उन्होंने वो सब किया. वो भी तब, जब वो उन्हें करते हुए बिल्कुल भी खुश नहीं थीं.
हाल ही में सुष्मिता ने एक इंस्टाग्राम वीडियो शेयर कर ये पूरा किस्सा सुनाया है. दरअसल, किसी फॉलोवर ने उनसे पूछा था कि आखिर उन्होंने C-ग्रेड फिल्मों में काम क्यों किया. इसके जवाब में ही सुष्मिता ने अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया कि 2002 में उनके पति की मीडिया कंपनी प्रयास प्रोडक्शन को दीवालिया घोषित कर दिया गया था. इस कारण उन पर 1 करोड़ का कर्ज़ आ गया. उसे वसूलने के लिए रिकवरी एजेंट रोज़ घर आ जाते थे. वो सुष्मिता और उनके पति को धमकाते और उनके बच्चों के सामने गालियां भी देते थे.
सुष्मिता के मुताबिक, वो C-ग्रेड फिल्मों को हमेशा से सेक्सिस्ट मानती थीं. लेकिन परिवार पालने और लोन चुकाने के लिए उन्होंने मन मारकर उनमें काम किया. खासकर इसलिए क्योंकि तब उनके बच्चे काफी छोटे थे. सुष्मिता कहती हैं कि उन फिल्मों में काम करते हुए उन्होंने अपनी आत्मा बेच दी थी. उन्हें न तब उनमें काम करने की खुशी थी, न अब होती है. मगर उन्हें मजबूरी में सब करना पड़ा और इस फैसले पर उन्हें गर्व नहीं होता.
खैर, सुष्मिता और उनके पति ने लगभग तीन-चार साल तक लगातार काम कर अपना कर्ज़ चुकाया. इसके अलावा उन्होंने ये भी सुनिश्चित किया कि उनकी बेटी की पढ़ाई अच्छे से हो. हालांकि उनके पति इस पक्ष में नहीं थे, फिर भी उन्होंने बेटी को हायर स्टडीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड भेजने का फैसला किया. विदेश में पढ़ाई का खर्च बहुत ज़्यादा था, जिससे परिवार पर फाइनेंशियल बर्डन बढ़ गया. इसी वजह से सुष्मिता को लगातार ऐसे काम करने पड़े, जो अक्सर उनके मुताबिक नहीं होते थे. हालांकि, सुष्मिता कहती हैं कि उन्हें अपने फैसलों पर कभी अफ़सोस नहीं होता. वो इसलिए क्योंकि उनकी वजह से ही उनके परिवार का फ्यूचर सिक्योर हुआ. लेकिन अब वो उस तरह की फिल्मों से पूरी तरह दूरी बना चुकी हैं.
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