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लॉटरी में निकले 5 करोड़ के फ्लैट को ठुकराने वाला शिव सेना कार्यकर्ता बेवकूफ नहीं है

एक बार को तो हम भी शॉक्ड हो गए थे कि अंकल ने सिर्फ़ वास्तु दोष के चलते ऐसा क्यों कर दिया, लेकिन फिर हमने सीधे लॉटरी वालों से बात की.

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शिवसेना के कार्यकर्ता विनोद शिर्के जिन्होंने लॉटरी में 2 फ्लैट जीते थे
हमें आज एक खबर पढ़ने को मिली. लेकिन चूंकि ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स पर खबर से पहले उनकी हैडिंग पढ़ने को मिलती है इसलिए इस खबर से पहले हमें इस खबर की हैडिंग खबर पढ़ने को मिलीं. कुछ प्रतिष्ठित अख़बारों की हैडिंग कुछ यूं थीं -
# म्हाडा लॉटरी विजेता ने वास्तु के चलते सबसे महंगा, 5.8 करोड़ का फ्लैट त्याग दिया. # शिव सेना कार्यकर्ता ने 5.8 करोड़ का फ्लैट लॉटरी में जीता, वास्तु-दोष के चलते त्याग दिया. # मुंबई में इस शख्स ने नहीं लिया लॉटरी में जीता हुआ 5.8 करोड़ का फ्लैट, ये है वजह. # लॉटरी में जीता 5.8 करोड़ का फ्लैट वापस करेगा शख्स, बेहद दिलचस्प है कारण. # इस शख्स ने नहीं लिया लॉटरी में जीता हुआ 5.8 करोड़ का फ्लैट, लौटा दिया वापस चाबी.
(अंग्रेजी की हैडिंग के अनुवाद के अलावा हमने किसी भी हैडिंग में एक शब्द का हेरफेर नहीं किया है.) अब केवल हैडिंग को पढ़कर आप भी उस शिवसेना कार्यकर्ता के बारे में वही सोच रहे होंगे जो हम सोच रहे हैं. कि उसकी जगह मैं होती/होता तो अव्वल तो मुझे वास्तु दोष से कोई दिक्कत ही न थी, और होती भी तो एक दो करोड़ सस्ते में किसी और को चिपका देता. खैर चूंकि खबर देश के प्रतिष्ठित न्यूज़ पोर्टल्स पर दिख रही थी तो ये तो निश्चित था कि खबर फेक तो नहीं ही रही होगी. इसलिए हमने खबर को पूरा पढ़ा. और कई स्रोतों से पढ़ा. हम जानकारी चाह रहे थे. पूरी. हम क्लू भी चाह रहे थे कि 'कैच' कहां है बॉस. खैर आगे बढ़ें उससे पहले इन सभी खबरों का कुल जमा सार आपको पॉइंटर्स में बता देते हैं -
# महाराष्ट्र में शिवसेना के कार्यकर्ता विनोद शिर्के ने लॉटरी में 2 फ्लैट जीते थे. # इनमें से एक फ्लैट 4.99 करोड़ और दूसरा 5.08 करोड़ रुपए का था. # फ्लैट महाराष्ट्र हाउसिंग एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) की लॉटरी में निकले थे. # विनोद शिर्के ने अपने वास्तु सलाहकार से बात करने के बाद फैसला किया वो 5.08 करोड़ रुपए वाला फ्लैट नहीं लेंगे.
अब इन चार पॉइंट्स में क्लू ये मिला कि MHADA तो सरकारी उपक्रम है जो मकान बनाता है. तो कहीं लॉटरी का मतलब यहां पर भी ठीक वैसा ही तो नहीं जैसा मेरे खुद के शहर दिल्ली में होता है?

# क्या होता है मेरे शहर में -

दरअसल दिल्ली में डीडीए फ्लैट्स को लेने के लिए 'एक अनार, सौ बीमार' की स्थिति होती है इसलिए फ्लैट्स सबको नहीं दिए जा सकते. तो होता क्या है कि डीडीए द्वारा इच्छुक लोगों के एप्लिकेशन ले लिए जाते हैं और उसमें से लॉटरी निकाली जाती है कि कितने लोगों को फ्लैट मिलेगा. लेकिन जिनकी लॉटरी निकलती है, या जिनका सिलेक्शन लॉटरी सिस्टम से होता भी है उन्हें भी फ्री में ये मकान नहीं दिया जाता बल्कि पूरे पैसे लिए जाते हैं. लेकिन फिर भी लोग लॉटरी लगने पर खुश होते हैं क्यूंकि
# एक तो महानगरों में वैसे ही अपने घर के लिए 'एक अनार, सौ बीमार' वाली स्थिति होती है. # दूसरा, रियल स्टेट में हुए और हो रहे फ्रॉड के चलते लोग सरकारी काम में निश्चिंतता के साथ इन्वेस्ट कर सकते हैं. # और तीसरा, चाहे आपको इस तरह के फ्लैट्स लेने के लिए पूरे पैसे देने पड़ें फिर भी ये पूरे पैसे, आमतौर पर मार्केट रेट/प्राइवेट बिल्डर्स से कम ही होते हैं.
इसके अलावा और भी कई कारण होते होंगे जिसके चलते इन फ्लैट्स को लेकर क्रेज अपने उच्चतम स्तर पर होता है. लेकिन हम उसकी बात नहीं करेंगे क्यूंकि हमें अपनी खबर पर फोकस करना है.

# और फिर आगे -

तो हम अस्सी प्रतिशत के लगभग श्योर हो चुके थे कि यही इस केस में भी रहा होगा. बस दिल्ली की जगह मुंबई और डीडीए की जगह म्हाडा हो गया होगा. और वैसे भी लॉटरी पर तो ज़्यादातर राज्यों में बैन है. अगर ये बैन वाली बात महाराष्ट्र पर भी लागू होती है तो फिर बाकी का 20% भी कन्फर्म हो जाएगा. तब हमने लॉटरी को लेकर रिसर्च की और पाया कि महाराष्ट्र में लॉटरी तो बैन है लेकिन 'लैंड लॉटरी' नहीं. यानी अगर आप शुरू से लेकर अभी तक हमारी इस स्टोरी के साथ बने हुए हैं तो आप भी मानेंगे कि अब भी 20% का डाउट बना हुआ था.

# अंत में - 

हमने म्हाडा की वेबसाइट चेक की. यहां से उनकी लॉटरी वाली वेबसाइट खोली.  थोड़ा बहुत पता लगा कि यहां भी वही डीडीए वाला हिसाब किताब है. फिर हमने इनकी हेल्प लाइन पर कॉल की. पहले मेरे कुलीग, चला चित्रपट बघूया वाले, मुबारक ने मराठी में और फिर मैंने हिंदी में. नेहा नाम की लड़की से बात हुई. उसने कंफर्म किया कि वो डीडीए वाली एनोलॉजी (तुलना) बिल्कुल सही है. यानी ये वो लॉटरी होती है जिसमें आपका नाम आने पर भी आपको पैसे देने पड़ते हैं.

# हमारा टेक -

तो इस कहानी के नायक यानी विनोद शिर्के को 5. 08 करोड़ का नुकसान नहीं हुआ. ज़्यादा से ज़्यादा एक अच्छी डील 'वास्तु शास्त्र' के चलते होते-होते रह गई. कुछ लोग जो वास्तु शास्त्र को नहीं मानते वो अब भी विनोद को गलत मान रहे होंगे. एक और बात जो हम जाते-जाते जोड़ना चाहेंगे, वो ये कि - होने को हमने इस पूरे पोस्टमॉर्टम में पूरी सावधानी बरती है लेकिन अगर कुछ नई या इससे अलग इंफॉरमनेशन या अपडेट मिलता है तो हम उसे इस स्टोरी में ज़रूर अपडेट करेंगे.
वीडियो देखें:

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