"Taste of Cherry", "The Color of Paradise", "The Apple" और "Baran" जैसी न जाने कितनी ही जादुई फ़िल्में World cinema को देने वाला ईरान. दर्शक रश्क करते हैं कि वाह Iranian cinema कितना महान है, जिसकी व्याख्या यूं भी होती है कि ईरान अपने फिल्ममेकर्स के लिए भी कितना उर्वर और सपोर्टिव है. लेकिन क्या यही पूरा सच है? नहीं. ईरान अपने फिल्मकारों के लिए कैसी कब्रगाह बनने पर आमादा है इसका ताज़ा उदाहरण हैं मोहम्मद रसूलोफ (Mohammad Rasoulof).
ईरान में कोड़ों-जेल से बचकर Cannes पहुंचा डायरेक्टर, फ़िल्म को मिला 12 मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन
ईरानी फ़िल्ममेकर Mohammad Rasoulof की नई फ़िल्म The Seed of the Sacred Fig फ्रांस के Cannes Film Festival 2024 में तहलका मचा गई. ईरान में आठ साल जेल और कोड़ों की सजा से छुपकर वे यहां पहुंचे थे.

उनकी नई फ़िल्म "द सीड ऑफ द सेक्रेड फिग" (The Seed of the Sacred Fig) Cannes Film Festival में 24 मई, 2024 को दिखाई गई है. फिल्म को 12 मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन मिला.
ये सब हंगामाख़ेज रहा, क्योंकि रसूलोफ का Cannes में आना लगभग नामुमकिन माना जा रहा था. क्योंकि ईरानी स्टेट ने उन्हें जेल और कोड़ों की सजा सुनाई थी. वे किस तरह बचते बचाते फ्रांस में पहुंचे हैं ये मिस्ट्री है.
दरअसल ईरानी स्टेट नहीं चाहता था कि उनकी फ़िल्म ईरान में या विदेश में दिखाई जाए. क्योंकि उन्हें आशंका है कि ये ईरानी सरकार की आलोचना करती है. रसूलोफ पर दबाव डालने के लिए उन्हें सजा सुनाई गई थी. ईरान की एक अदालत ने रसूलोफ को आठ साल जेल (व्यावहारिक रूप से पांच साल) की सजा दी. जुर्माना भी लगाया गया. उन्हें कोड़े मारने और उनकी संपत्ति ज़ब्त करने के भी आदेश दिए गए. इसकी जानकारी रसूलोफ के वकील ने एसोसिएटेड प्रेस को दी थी. लेकिन रसूलोफ अपने देश से भागने में कामयाब हो गए. उन्हें जब ये सज़ा सुनाई गई तभी उन्होंने अपने देश से बाहर निकलने का प्लान बनाया.
Cannes पहुंचकर रसूलोफ ने बताया,
ईरान छोड़ने का फैसला मैंने दो घंटे में कर लिया था. मैं अपने घर के आस-पास घूमा. अपने पौधों को गुडबाय बोला, क्योंकि मैं उन्हें बहुत प्यार करता हूं. मेरे घर में बहुत सारे पौधे हैं. ये फैसला आसान न था. इस पर बात करना आज भी मेरे लिए आसान नहीं है.
ईरानी सरकार ने कान फिल्म फेस्टिवल से "द सीड ऑफ द सेक्रेड फिग" को वापस लेने के लिए रसूलोफ और उनकी टीम पर ख़ूब दबाव डाला था. द गार्जियन समेत कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा कहा गया है. ईरानी स्टेट की पुलिस ने भी मेकर्स को ख़ूब परेशान किया है. कुछ वक्त पहले इस फ़िल्म के एक्टर्स और क्रिएटिव लोगों से घंटों पूछताछ की गई. वे कान फ़िल्म फेस्ट में हिस्सा न ले सकें इसलिए उनके पासपोर्ट वगैरह ज़ब्त कर लिए गए, और देश छोड़ने से प्रतिबंधित कर दिया.
आख़िर ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड और स्टेट के अन्य अंग "द सीड ऑफ द सेक्रेड फिग" से क्यों डरे हुए हैं? वजह है फ़िल्म का प्लॉट. ये फ़िल्म रेवोल्यूशनरी गार्ड के एक जज के बारे में बताई जा रही है जो तेहरान में रहता है. देश में हाल के वर्षों में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए हैं. उससे जो परेशानी पैदा हुई है, वो उससे डील कर रहा है. फिर ऐसा होता है कि उसकी गन गुम जाती है और वो पागल सा होने लगता है.
इससे पहले भी रसूलोफ ने स्टेट की आलोचना करने वाली फ़िल्में बनाई हैं और उन्हें बार-बार सजा दी गई है. उनके विदेशी फिल्म फेस्टिवल्स में जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. 2017 में "अ मैन ऑफ इंटेग्रिटी" (A Man of Integrity) कान फेस्ट में अं सर्तेन रगाद (Un Certain Regard) जीती. लेकिन उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया गया. जाने नहीं दिया गया. 2020 में उनकी फ़िल्म "देयर इज़ नो ईविल" (There Is No Evil) बर्लिन में बहुत प्रतिष्ठित गोल्डन बियर (Golden Bear) अवॉर्ड जीती. तब भी उन्हें ईरानी अधिकारियों ने बर्लिन जाने नहीं दिया था. उनकी तरफ से उनकी बेटी बरान रसूलोफ ने ये पुरस्कार लिया था. बीते साल रसूलोफ को कान फेस्ट की अं सर्तेन रगाद श्रेणी का ज्यूरी मेंबर चुना गया. लेकिन उन्हें नहीं जाने दिया गया.
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