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जावेद अख्तर ने कहा, धर्मेंद्र के लिए लिखी गई थी 'ज़ंजीर', धर्मेंद्र ने जवाब दे दिया

धर्मेंद्र ने लिखा- 'दिलों को गुदगुदाना खूब आता है. काश सर चढ़कर बोलने का जादू भी सीख लिया होता.'

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फिल्म 'ज़ंजीर' के एक सीन में अमिताभ बच्चन. बीच में जावेद अख्तर की तस्वरी. आखिरी तस्वीर धर्मेंद्र की. फिल्म 'ज़लजला' से.

अमिताभ बच्चन ने 11 अक्टूबर को अपना 80वां जन्मदिन मनाया. उनके सम्मान में 'अमिताभ बच्चन फिल्म फेस्टिवल' का आयोजन किया गया. जहां पिछले हफ्ते 80 के दशक में आई उनकी फिल्मों को बड़े परदे पर दिखाया गया. इस सिलसिले में पिछले कुछ समय से माहौल बच्चनमय हो रखा है. इसी बीच एक पुराना विवाद भी ज़िंदा होता दिख रहा है. जावेद अख्तर ने कह दिया कि 'ज़ंजीर' धर्मेंद्र के लिए लिखी गई थी. धर्मेंद्र समेत इंडस्ट्री के तमाम स्टार्स के मना करने के बाद वो फिल्म अमिताभ तक पहुंची. अब धर्मेंद्र ने जावेद अख्तर को ट्विटर पर जवाब दिया है.

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‘ज़ंजीर’ की स्क्रिप्ट सलीम-जावेद की जोड़ी ने मिलकर लिखी थी. जावेद अख्तर ने हाल ही में इस बारे में इंडिया टुडे को एक इंटरव्यू दिया. इस इंटरव्यू में जावेद से पूछा गया कि 'ज़ंजीर' में अमिताभ बच्चन की कास्टिंग कैसे हुई. इसके पीछे की कहानी बताते हुए, जावेद ने कहा-

''अमिताभ बच्चन 'ज़ंजीर' के लिए आखिरी पसंद थे. ये स्क्रिप्ट धर्मेंद्र जी को ध्यान में रखकर लिखी गई थी. मगर किसी वजह से उन्होंने इसमें काम करने से इन्कार कर दिया. अब प्रकाश मेहरा के पास स्क्रिप्ट थी. मगर उसके लिए हीरो नहीं. वो पहली बार फिल्म प्रोड्यूस कर रहे थे. उसके पहले उन्होंने सिर्फ फिल्में डायरेक्ट की थीं. वो ये रोल लेकर एक एक्टर से दूसरे एक्टर तक फिरते रहे. उनमें से कुछ लोग इस दुनिया में नहीं हैं. कुछ लोग हैं. मगर उन सबने उस फिल्म में काम करने से मना कर दिया.

 

मैं समझ सकता हूं कि उन्होंने उस फिल्म में काम क्यों नहीं किया. क्योंकि ये वो दौर था जब राजेश खन्ना को भगवान माना जाता था. फिल्मों में म्यूज़िक का होना ज़रूरी शर्त थी. और 'ज़ंजीर' में कोई रोमैंस वाला एंगल भी नहीं था. न ही कॉमेडी थी. यहां हीरो गाना भी नहीं गा रहा था. पहले फ्रेम से लेकर आखिरी फ्रेम तक उसे एक गंभीर और कड़वा इंसान बने रहना था. इस तरह की चीज़ें तब तक स्क्रीन पर नहीं देखी गई थीं. ये इतना अलग रोल था, कि सब लोगों ने इसे करने से मना कर दिया.'' 

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फिल्म ‘ज़ंजीर’ के एक सीन में प्राण, जय बच्चन और अमिताभ बच्चन.

जब ये खबर धर्मेंद्र तक पहुंची, तो उन्होंने एक ट्वीट कर जावेद अख्तर को जवाब दिया. धर्मेंद्र ने एक खबर के ट्वीट पर कमेंट करते हुए लिखा-

''जावेद कैसे हो... दिखावे की इस दुनिया में हक़ीकतें दबी रह जाती हैं. जीते रहो. दिलों को गुदगुदाना खूब आता है. काश सर चढ़कर बोलने का जादू भी सीख लिया होता.''

बेसिकली धर्मेंद्र कह रहे हैं कि उन्हें कभी अपना पक्ष रखना या अपने मन की बात कहना नहीं आया. इसके बाद धर्मेंद्र के समर्थन में लोगों ने जावेद अख्तर और अमिताभ बच्चन को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया. इसके कुछ घंटों बाद धर्मेंद्र ने एक और ट्वीट किया. इसमें उन्होंने 'ज़ंजीर' में काम नहीं करने पर बात की. उन्होंने लिखा -

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''ज़ंजीर के लिए मना कर इमोशनल मजबूरी थी. इस बारे में मैंने आप की अदालत में बात की थी. इसलिए प्लीज़ मुझे गलत न समझें. मैं जावेद और अमित से हमेशा प्यार करूंगा.'' 

1973 में आई प्रकाश मेहरा डायरेक्टेड 'ज़ंजीर' ने अमिताभ बच्चन के करियर की दशा-दिशा बदलकर रख दी. उन्हें भारतीय सिनेमा का 'एंग्री यंग मैन' बनाया. उसके बाद क्या हुआ, वो इतिहास सबको पता है. इस फिल्म में उन्होंने विजय खन्ना नाम के एक पुलिसवाले का रोल किया था. जो पुलिस फोर्स से सस्पेंड होने के बाद अपने माता-पिता की मौत का बदला लेने निकल पड़ता है. इस फिल्म में उनके साथ जया बच्चन और प्राण जैसे एक्टर्स ने भी काम किया था. 

वीडियो देखें: अमिताभ के हाथ पर बना टैटू कैसे फिल्म 'दीवार' का सबसे अहम हिस्सा बन गया?

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