डॉक्टर्स को पीटने वालों की अब खैर नहीं, सरकार कहर बनकर टूटने वाली है
सरकार ने अध्यादेश लाकर Epidemic Diseases Act, 1897 में बदलाव किये हैं.
Advertisement

डॉक्टरों पर हमले को देखते हुए सरकार अध्यादेश लेकर आई है.
कोरोना के इलाज में लगे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर हमले के कई मामले सामने आए हैं. अब उनकी सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने 123 साल पुराने Epidemic Diseases Act, 1897 में बदलाव किया है. 22 अप्रैल को नरेंद्र मोदी कैबिनेट की बैठक हुई. बैठक में अध्यादेश लाया गया, जिसके तहत डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने वालों को तीन महीने से सात साल तक की सजा हो सकती है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कई जगहों से डॉक्टरों पर हमले की जानकारी आ रही है. सरकार ये बर्दाश्त नहीं करेगी. इसके लिए एक अध्यादेश लाया गया है. इसके तहत कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. मेडिकल वर्कर्स पर हमला करने वालों को जमानत भी नहीं मिलेगी. 30 दिन के अंदर मामले की जांच पूरी होगी. एक साल के अंदर फैसला आएगा.
उन्होंने कहा कि हेल्थ वर्कर्स पर हमला करने वालों पर 50 हजार से दो लाख के जुर्माने का प्रावधान है. इसके अलावा तीन महीने से 5 साल की सजा भी हो सकती है, वहीं गंभीर चोट के मामले में अधिकतम 7 साल की सजा हो सकती है. स्वास्थयकर्मियों पर हमला गैरजमानती अपराध के दायरे में आएगा.गाड़ी या क्लिनिक का नुकसान करने पर बाजार रेट से दोगुना नुकसान हमला करने वालों से वसूल किया जाएगा.
मंत्री ने बताया कि गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने डॉक्टर्स से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की. डॉक्टरों ने मांग की थी उनकी सुरक्षा के लिए सरकार कानून लाए. गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया था कि डॉक्टरों और नर्सों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा. मंत्री ने बताया कि NSA, IPC, CRPC होने के बावजूद यह अध्यादेश लाने का फैसला किया गया.
‘वायरस हंटर’ ने बताया कि कोरोना वायरस असल में कहां से आया है?
Advertisement











