The Lallantop

फिल्म रिव्यू- धमाल 4

कैसी है अजय देवगन की नई फिल्म 'धमाल 4', जानिए ये रिव्यू पढ़कर.

Advertisement
post-main-image
'धमाल 4' के क्लाइमैक्स में बताया जाता है कि 'धमाल 5' भी आएगी.

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • धमाल फ्रैंचाइज़ की चौथी फिल्म 'धमाल 4' इंद्र कुमार द्वारा निर्देशित है, जिसमें अजय देवगन, रितेश देशमुख और अरशद वारसी जैसे कलाकार शामिल हैं।
  • पहली 'धमाल' फिल्म के 19 साल बाद आई 'धमाल 4' की कहानी में वही खजाना खोजने की थीम दोहराई गई है, जबकि दर्शकों का कॉमेडी के प्रति स्वाद बदल चुका है।
  • 'धमाल 4' को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की मिश्रित प्रतिक्रियाएँ हैं, जिससे फ्रैंचाइज़ की अगली कड़ी 'धमाल 5' की सफलता पर प्रश्न चिह्न लगा है।

फिल्म- धमाल 4
डायरेक्टर- इंद्र कुमार
एक्टर्स- अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी, संजीदा शेख, अंजलि आनंद, संजय मिश्रा, जावेद जाफरी, रवि किशन, 
रेटिंग- 1.5 स्टार

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

***

Indra Kumar की Dhamaal 4 अपनी फ्रैंचाइज़ की पहली फिल्म की रीमेक लगती है. एक बुरी कॉमेडी फिल्म, जिसकी कल्पनाशीलता खत्म हो चुकी है. या जिस दर्शक वर्ग के लिए ये फिल्म बनी है, वो उस फेज को आउटग्रो कर चुके हैं. 'धमाल' फ्रैंचाइज़ में जितनी फिल्में बन चुकी हैं, इस फिल्म को देखते हुए आपको उतनी बार भी हंसी नहीं आती. पहली वाली 'धमाल' में कुछ लालची लोगों का ग्रुप छुपा हुआ खज़ाना ढूंढने निकलता है. जो कि W के लिए नीचे दबा हुआ है. 'धमाल 4' की भी बेसिक स्टोरीलाइन वही है. बस, इस बार खज़ाना W के बजाय M के लिए नीचे छुपा हुआ है.  

Advertisement

'धमाल 4' बिल्कुल बेदिमाग कॉमेडी फिल्म के तौर पर शुरू होती है. और उससे कोई दिक्कत भी नहीं है. क्योंकि यही इस फ्रैंचाइज़ का सेलिंग फैक्टर रहा है. मगर जब ये बेदिमाग से बददिमाग फिल्म में तब्दील हो जाती है, तो आप निराश और बोर दोनों हो जाते हैं. ये फिल्म अनफनी होने के साथ-साथ प्रॉब्लमैटिक भी है. बॉडी शेमिंग इसका श्रृंगार है और मिसोजिनी इसका आभूषण. 2007 में इस फ्रैचाइज़ की पहली फिल्म आई थी. इसके 19 साल बाद इसकी चौथी किश्त आई है. इन वक्फे में फिल्म की ऑडियंस मच्योर हो गई. उनका कॉमेडी को देखने, समझने और बरतने का सलीका बदल गया. मगर इस फिल्म के मेकर्स अब भी W के लिए नीचे फंसे हुए हैं, जिसे आज के दर्शक सबसे बड़ा L मानते हैं.

'धमाल 4' मस्टी-स्टारर फिल्म है. इसकी कास्ट में अजय देवगन से लेकर संजय मिश्रा, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रितेश देशमुख, अंजलि आनंद, रवि किशन, संजीदा शेख, विजय पाटकर और उपेंद्र लिमये जैसे एक्टर्स ने काम किया है. और आप हैरान होते हैं कि इस फिल्म को लेकर वो सभी लोग कितने कमिटेड हैं. जिसको जितना मिला, सबने उसमें जान डालने की कोशिश की है. मगर फिल्म की कहानी इतनी ब्रेनडेड है कि उसे जिला पाना तकरीबन असंभव है. रचनात्मक दिवालिएपन की इंतिहा ये है कि मेकर्स को इस फ्रैंचाइज़ की ही पिछली फिल्मों के जोक्स रिहैश करने पड़े. इतने पर भी बात नहीं बिगड़ी, तो उन्होंने फिल्म में मेटा रेफरेंसेज़ भी डाल दिए. फिल्म के एक सीन में तो इंद्रधनुष देखकर रितेश देशमुख का किरदार डायरेक्टर इंद्र कुमार की बात करने लगता है. इंद्र कुमार की ही फिल्म 'इश्क' का 'राम राम राम, मरा मरा मरा' वाला सीन इस फिल्म में रीक्रिएट किया जाता है. जिसका इम्पैक्ट न के बराबर होता है.

अंजलि आनंद ने फिल्म में रितेश की पत्नी का रोल किया है. उन्हें फिल्म में कास्ट ही इसलिए किया गया है, ताकि उनके वजन का मज़ाक उड़ाया जा सके. उनके बैठने पर मोटरसाइकिल आगे से उठ जाती है. उनके पांव पटकने से जमीन में दरार पड़ जाती है. इन सिचुएशंस को बैलेंस करने के लिए उन्हें कुछ हेरोइक सीन्स भी दिए गए हैं. मगर ये सीन्स भी उनकी बॉडीटाइप के एवज में मिले हैं. संजीदा शेख फिल्म की नायिका कम प्रॉप ज़्यादा लगती हैं. उन्हें इसलिए कास्ट किया गया, ताकि जावेद जाफरी के किरदार को रेलेवेंट रखा जा सके. बताइए आदि-मानव की केमिस्ट्री इस फिल्म फ्रैंचाइज़ की सबसे मज़ेदार और पसंद की जाने वाली चीज़ थी. मगर इस फिल्म में मेक श्योर किया गया है कि लोग उनसे भी उकता जाएं.

Advertisement

सोशल मीडिया पर बहुत सारे लोग फिल्म के खराब VFX की शिकायत कर रहे हैं. वो बिलाशक शॉडी है. मगर इस फिल्म में वो सबसे खराब चीज़ तो नहीं ही है. पिछले दिनों 'वेलकम टू द जंगल' आई थी. वो कोई क्रांतिकारी फिल्म नहीं थी. उस फ्रैंचाइज़ की क्वॉलिटी का भी ह्रास हुआ है. मगर 'धमाल 4' की तुलना में वो कहीं बेहतर और फनी फिल्म थी. सीक्वल्स अजय देवगन का कंफर्म जोन बन गई हैं. वो उससे बाहर ही निकल पा रहे. या शायद निकलना ही नहीं चाहते. अजय फिलहाल 'सिंघम', 'दृश्यम', 'शैतान', 'रेड', 'गोलमाल' और 'दे दे प्यार दे' जैसी फिल्म फ्रैंचाइज़ का हिस्सा हैं. उन्होंने आखिरी बार कौन सी फ्रेश या नॉन-सीक्वल फिल्म की थी, ये याद करने के लिए आपको दिमाग पर जोर डालना पड़ता है. और ऐसा भी नहीं है कि इन फिल्मों ने कोई रिकॉर्डतोड़ कमाई की हो या तगड़ा क्रिटिकल अक्लेम हासिल किया हो. इसलिए दर्शकों में उनकी फिल्मों को लेकर उत्साह भी कम हो गया है. और ये बात उनकी फिल्मों की कमाई में साफ झलकती है. शायद इसीलिए उन्हें 'चौहान' जैसी फिल्में चुननी पड़ रही हैं. 

संजय मिश्रा और रितेश देशमुख, ये दो लोग हैं जिन्होंने दिए गए मटीरियल से कुछ बेहतर निकालने की कोशिश की है. जिस तरह की फिल्में इस समय में हिंदी सिनेमा में बन रही हैं, उससे तो ये साफ ज़ाहिर है कि ये इंडस्ट्री ट्रांजिशन के फेज से गुज़र रही है. मगर कॉमेडी फिल्मों का स्तर पिछले कुछ समय में बेहद तेज़ी से नीचे आया है. साउथ सिनेमा इसलिए फल-फूल रहा है क्योंकि वो नए लोगों को मौका दे रहे हैं. उनका बड़े से बड़ा स्टार नए और यंग डायरेक्टर के साथ काम करने में हिचकता नहीं है. नए लोग फ्रेश पर्सपेक्टिव के साथ आते हैं. उनकी फिल्मों से आज के दर्शक ज़्यादा कनेक्ट महसूस करते हैं. मगर हिंदी सिनेमा अभी भी ट्राइड एंड टेस्टेड फॉरमूले पर ही चल रहा है. हमारे स्टार्स सिर्फ उन्हीं फिल्ममेकर्स के साथ काम करते हैं, जिनके साथ उन्होंने पहले काम किया है. जिनसे उनके विचार और काम करने का तरीका मेल खाता है. इसलिए हमें वही घिसी-पिटी चीज़ें देखने को मिल रही हैं, जो हम 20 साल पहले देख चुके हैं.

'धमाल 4' को मैं एक ऐसी फिल्म के तौर पर देखता हूं, जिसके होने या न होने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. तिस पर 'धमाल 5' का अनाउंसमेंट एक्साइटिंग कम, डरावना ज़्यादा लगता है.  

वीडियो: फिल्म रिव्यू: कैसी ही रितेश देशमुख की 'राजा शिवाजी'

Advertisement