कुछ दिन पहले तमिल एक्टर विशाल ने CBFC यानी सेंसर बोर्ड पर एक गंभीर आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें अपनी फिल्म 'मार्क एंटनी' के हिंदी वर्जन को पास करवाने के लिए 6.5 लाख की घूस देनी पड़ी थी. इसके बाद ही उनकी फिल्म के हिंदी वर्जन को स्क्रीनिंग की इजाज़त दी गई. इन आरोपों से पर्याप्त खलबली मची थी. इतनी कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय को जवाब देना पड़ गया था. अब इस मामले में सीबीआई की एंट्री हो गई है.
बड़ा फैसला! सेंसर बोर्ड वालों ने रिश्वत ली थी या नहीं, अब सीबीआई पता लगाएगी
तमिल एक्टर विशाल ने CBFC यानी सेंसर बोर्ड पर एक गंभीर आरोप लगाया था. कि उन्हें अपनी फिल्म 'मार्क एंटनी' के हिंदी वर्जन को पास करवाने के लिए 6.5 लाख की घूस देनी पड़ी थी. अब इस मामले में सीबीआई की एंट्री हो गई है.


इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक़ ये केस अब सीबीआई देखेगी. सीबीआई ने इस केस में FIR भी रजिस्टर कर ली है. ये FIR तीन लोगों और CBFC के अज्ञात कमर्चारियों के खिलाफ है. इन तीन लोगों के नाम मर्लिन मेनागा, जीजा रामदास और राजन एम हैं. FIR के बाद सीबीआई ने मुंबई के चार ठिकानों पर छापेमारी भी की. इनमें FIR में नामजद लोगों के घर भी शामिल हैं.
सीबीआई के ऑफिशियल प्रवक्ता ने बताया,
"आरोप है कि सितंबर 2023 में एक व्यक्ति ने कुछ और लोगों के साथ मिलकर साज़िश रची थी. कि एक डब्ड हिंदी फिल्म को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट दिलवाने के लिए 7 लाख की रिश्वत वसूली जाए".
प्रवक्ता ने आगे बताया कि पहले इस आदमी ने CBFC मुंबई के अधिकारीयों के प्रतिनिधि के तौर पर रिश्वत मांगी. 7 लाख की रकम को घटाकर बाद में 6.54 लाख कर दिया गया.
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तमिल एक्टर विशाल ने इसी से मिलती जुलती बात कही थी. उनके आरोप पर आईबी मिनिस्ट्री ने 29 सितम्बर को सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया भी दी थी. जिसमें कहा गया कि करप्शन को लेकर ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी फॉलो की जाएगी. मंत्रालय के X (पहले ट्विटर) अकाउंट से लिखा गया,
“एक्टर विशाल ने CBFC में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस रखती है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को आज ही जांच करने के लिए मुंबई भेजा गया है.”
मिनिस्ट्री ने बाक़ी पीड़ित लोगों से भी CBFC के खिलाफ शिकायत करने की गुज़ारिश की. X अकाउंट से लिखा गया,
“हम सभी से गुज़ारिश करते हैं, वो सीबीएफसी के उत्पीड़न के दूसरे उदाहरणों की जानकारी jsfilms.inb@nic.in पर देकर मंत्रालय का साथ दे सकते हैं.”
इस स्टेटमेंट से लगा कि मिनिस्ट्री इस मामले को लेकर गंभीर है. और अब जांच ही सीबीआई को सौंप दी गई है. देखते हैं जांच में क्या सच सामने आता है.
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