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Cannes 2024 में भारत के 10 अचीवमेंट: सिर्फ एक पायल की फ़िल्म ही नहीं छाई थी

World Cinema के सबसे बड़े महोत्सव Cannes 2024 में Payal Kapadia की All We Imagine as Light ने इतिहास बना दिया. लेकिन असल में ये साल इंडिया के लिए और भी कई वजहों से अब तक का बेस्ट रहा है. एक नहीं 10 ऐसी फ़िल्में या लोग रहे, जिनका यहां चर्चे रहे.

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तीन कमाल की फ़िल्में जो Cannes में प्रदर्शित की गईं.

बीते साल राजामौली की तेलुगु फ़िल्म RRR ने Oscar (Best Original Song) जीता था. जैसी धूम और चर्चा तब गली गली में मची थी, कुछ वैसी ही इंडिया के विश्व सिनेमा के सबसे बड़े फेस्टिवल कान में दूसरा सबसे बड़ा प्राइज़ जीतने पर फिर मची है. जैसी पहले कभी न देखी गई. ख़ुद प्रधानमंत्री ने विनर डायरेक्टर को बधाई दी है. FTII से पढ़ी पायल कपाड़िया की फ़िल्म ने यहां ग्रां प्री जीता है. जो पहले कभी नहीं हुआ. बल्कि 30 साल बाद किसी इंडियन फिल्म ने इस टॉप अवॉर्ड में कंपीट किया है. 

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जहां सारी चर्चा पायल की फ़िल्म की जीत के इर्द गिर्द सिमटी, वहीं ये बात कुछ ढक सी गई कि इस साल भारत की और भी फ़िल्मों, फिल्मकारों ने कान में जीत हासिल की है. भारत को चार सम्मान मिले और नौ ऐसी फ़िल्में यहां प्रीमियर हुईं जो भारत से थीं, या भारत से किसी न किसी तरह ताल्लुक रखती थीं. एक नज़र इन्हीं सब पर. 



1. All We Imagine As Light

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ये डायरेक्टर पायल कपाड़िया की फ़िल्म है जिसे कान का दूसरा सबसे बड़ा प्राइज़ "ग्रां प्री" (Grand Prix) दिया गया. ये भारतीय सिनेमा के इतिहास का बेहद गर्व भरा पल है. ऐतिहासिक भी. बल्कि, ये इतनी बड़ी बात है कि इस मेन कंपीटिशन सेगमेंट में 30 साल से कोई भारतीय फ़िल्म शॉर्टलिस्ट तक नहीं हो पाई थी. पिछली बार 1994 में शाजी करुण की फिल्म "स्वाहम" (Swaham) ने कंपीट किया था और टैरेंटीनो की "पल्प फिक्शन" से हारी थी. All We Imagine as Light मलयालम और हिंदी भाषा में है. इसमें कनी कुस्रुति, दिव्या प्रभा और छाया कदम मुख्य भूमिकाओं में हैं.  

2. The Shameless

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बुल्गेरियन डायरेक्टर कॉन्सटेन्टिन बोज़ानोव (Konstantin Bojanov) की फ़िल्म "द शेमलेस" (The Shameless) का प्रीमियर अं सर्तेन रगाद (Un Certain Regard) में किया गया. यहीं अनुसूया सेनगुप्ता को बेस्ट एक्ट्रेस का प्राइज़ दिया गया. ये फिल्म दो सेक्स वर्कर्स और क्वीयर कम्युनिटी की कहानी है. पहली बार किसी भारतीय एक्ट्रेस ने कान में एक्टिंग के लिए ऐसा सम्मान जीता है.

3. Sunflowers Were The First Ones To Know

FTII के स्टूडेंट चिदानंद एस. नाइक की 15-16 मिनट लंबी शॉर्ट फ़िल्म "सनफ्लावर्स वर द फर्स्ट वन्स टु नो" (Sunflowers Were The First Ones To Know) ने भारत को कान में तीसरा सम्मान दिलाया. उनकी फ़िल्म ने "ला सिनेफ सलेक्शन" (La Cinef Selection) में पहला प्राइज़ जीता. कन्नड़ा लोककथा पर आधारित ये फ़िल्म एक बुज़ुर्ग महिला के बारे में है जो एक मुर्गा चुरा लेती है जिसके बाद उस गांव में सूरज उगना बंद हो जाता है.

4. संतोष सिवन

नेशनल अवॉर्ड विजेता सिनेमैटोग्राफर संतोष सिवन ने भी कान में कीर्तिमान बनाया. वे पहले एशियन बन गए जिन्हें इस फिल्म फेस्ट में "पियेर ऑंजेन्यु एक्सेल-लेंस" (Pierre Angénieux ExcelLens) अवॉर्ड से नवाज़ा गया है. ये अवॉर्ड ज़ूम लेंस का अविष्कार करने वाले पियेर ऑंजेन्यु के नाम पर रखा गया है. संतोष सिवन को अपने समृद्ध करियर और शानदार कला कार्यों के लिए ये सम्मान दिया गया.

केरल मूल के संतोष भी FTII से पढ़े हैं. उन्होंने "रोजा", "अशोका", "इरुवर" और "वानप्रस्थम" जैसी कमाल फ़िल्मों की सिनेमैटोग्राफी की है. संतोष को कान में अवॉर्ड प्रदान करने वालीं कोई और नहीं बल्कि प्रीति ज़िंटा थीं. जिनकी डेब्यू फिल्म "दिल से" की सिनेमैटोग्राफी भी संतोष ने ही की थी. प्रीति ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए एक इंस्टा पोस्ट भी किया. अवॉर्ड लेते समय संतोष ने स्पीच में अपने टैलेंट का श्रेय अपनी मां और मलयालम इंडस्ट्री को दिया. उन्होंने कहा, "मेरी मां ने मुझे पेंटिंग करना सिखाया था. मेरा कला के प्रति रुझान वहीं से आया है. मैंने जो भी सीखा वो मलयाली सिनेमा से सीखा है." संतोष को भारत में नेशनल फिल्म अवॉर्ड और पद्मश्री भी मिला है.

5. Bunnyhood  

"ला सिनेफ सलेक्शन" (La Cinef Selection) में तीसरा प्राइज़ जीती एक एनिमेटेड फ़िल्म - “बनीहुड.” इसे भारतीय मूल की डायरेक्टर मानसी माहेश्वरी (Mansi Maheshwari) ने बनाया था. ये यूके के  नेशनल फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट  (NFTS)  से उनकी ग्रेजुएशन फ़िल्म थी. मेरठ  की रहने वाली मानसी पढ़ाई के लिए यूके शिफ्ट हो गई थीं. मानसी ने अपने बचपन से प्रेरणा लेते हुए ये फ़िल्म बनाई.

6. Manthan  

श्याम बेनेगल की क्लासिक "मंथन" (1976) को 4K में रिस्टोर किया गया है और इस वर्जन को Cannes के क्लासिक्स सेक्शन में दिखाया गया. गुजरात में दुग्ध क्रांति पर बेस्ड ये भारत की उन रेयर फ़िल्मों में से है जिसे आम लोगों से क्राउडफंडिंग करके बनाया गया था. किसी बड़े प्रोडक्शन हाउस ने नहीं बल्कि गुजरात के किसानों ने इसमें पैसा लगाया था. इसे शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर के फिल्म हैरिटेज फाउंडेशन ने रिस्टोर करवाया है. स्क्रीनिंग के इस मौके पर फ़िल्म के एक्टर नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, स्मिता पाटिल के बेटे प्रतीक बब्बर, दुग्ध क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज़ कुरियन की बेटी निर्मला कुरियन और कई अन्य लोग रेड कारपेट पर नज़र आए. फिल्म को पांच मिनट लंबा स्टैंडिंग ओवेशन मिला.

7. Sister Midnight  

डायरेक्टर करण कंधारी की डेब्यू फिल्म “सिस्टर मिडनाइट” भी Cannes पहुंची. इसे फेस्ट के "डायरेक्टर्स फोर्टनाइट" (Director's Fortnight) सेक्शन में प्रीमियर किया गया. करण को ये डार्क कॉमेडी बनाने में 10 साल लगे. इसमें राधिका आप्टे, अशोक पाठक और छाया कदम जैसे एक्टर्स भी हैं. फिल्म में राधिका और अशोक पति पत्नी के किरदार में हैं. जिनकी अरेंज्ड मैरिज हुई थी. अशोक का किरदार मानता है कि उसकी पत्नी एक अच्छी पत्नी नहीं बन सकी. ये फिल्म पितृसत्ता पर तंज कसती है.   

8. In Retreat  

Cannes Fest के समानांतर एक फिल्म कार्यक्रम चलता है - ACID Cannes sidebar programme. इसमें प्रदर्शित होने वाली पहली फ़िल्म बनी डायरेक्टर मैसम अली (Maisam Ali) की "इन रिट्रीट" (In Retreat). मैसम ने बताया कि उनकी फिल्म एक कविता की तरह है. ये एक ऐसे इंसान की कहानी है, जो अपना घर तलाश रहा है. फ़िल्म में एक्टर हरीश खन्ना (कमीने, गैंग्स ऑफ वासेपुर, मिडनाइट्स चिल्ड्रेन) लीड रोल में दिखते हैं. मैसम ईरान में पैदा हुए. बचपन लद्दाख में गुज़ारा. इंजीनियरिंग करने के बाद FTII, पुणे में दाखिला लिया.   

9. Kooki  

डायरेक्टर प्रणब जे. डेका की असमी फ़िल्म "कूकी" (Kooki) Cannes के Marché du Film में दिखाई गई. ये एक रेप पीड़ित की कहानी है. इस फिल्म में विचलित करने वाले सीन हैं. इसमें रितिशा खौंड, राजेश तैलंग, बोधिसत्व शर्मा की भूमिकाएं हैं. 

10. Santosh

डायरेक्टर संध्या सूरी की डेब्यू फ़िल्म “संतोष” (Santosh) को Cannes के अं सर्तेन रगाद (Un Certain Regard) में प्रीमियर किया गया. यूके, जर्मनी और फ्रांस के प्रोडक्शन में बनी ये फ़िल्म एक ऐसी महिला के बारे में है जिसे अपने मृत पति की जगह कॉन्सटेबल की सरकारी जॉब मिलती है. फिर एक दलित लड़की के रेप और मर्डर का केस सामने आता है, जिसमें उसे एक बोल्ड, फेमिनिस्ट ऑफिसर शर्मा के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलता है. शहाना गोस्वामी और सुनीता राजवर ने ये दो रोल किए हैं. 
 

(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे मणिकांत आदित्य मिश्रा ने की है.)

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