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क्या राज्य वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से इनकार कर सकते हैं?

राज्य कर्मचारी भी उम्मीद पालकर बैठे हैं कि क्या उनको भी 8वें वेतन आयोग का फायदा होगा? आइए समझते हैं कि क्या केंद्र की तरफ से बनाए गए पे कमीशन की सिफारिशें सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए होती हैं या राज्यों को भी लागू करना अनिवार्य होता है.

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8वें वेतन आयोग का फायदा करीब 50 लाख सरकारी कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को मिलने की उम्मीद है (फोटो क्रेडिट: Business Today))

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  • 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने आयोग को 3 नवंबर 2025 को गठित किया है और इसकी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक पेश करने का लक्ष्य है।
  • वेतन आयोग का गठन और सिफारिशें मूलतः केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी बढ़ाने के लिए किया जाता है, जबकि राज्यों पर उनकी लागू होना बाध्यकारी नहीं है।
  • केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें राज्यों के लिए अनिवार्य नहीं होने के कारण, उनके लागू होने या न होने का निर्णय राज्यों की आर्थिक स्थिति और राजनीतिक मंशा पर निर्भर करता है।

इन दिनों आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर खूब चर्चा चल रही है. हालांकि, इसकी सिफारिशें अभी लागू नहीं हुई हैं. फिलहाल नौकरीपेशा कर्मचारियों, पेंशनर्स और कर्मचारी संगठनों समेत सभी पक्षों से सुझाव और मांगों को लेकर सलाह-मशविरा चल रहा है. सुझाव भेजने की आखिरी तारीख 15 जून रखी गई है.

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सरकार ने आयोग को गठन की तारीख (3 नवंबर 2025) से 18 महीने तक का समय दिया. माना जा रहा है कि 8वां वेतन आयोग मई-जून 2027 तक अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा. केंद्र सरकार के कर्मचारी 8वें पे कमीशन की सिफारिशें लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इसके लागू होने के बाद उनकी सैलरी और पेंशन के अलावा मोटा एरियर भी मिलने की संभावना जताई जा रही है.

वहीं, राज्यों कर्मचारी भी उम्मीद पालकर बैठे हैं कि उनको भी 8वें वेतन आयोग का फायदा होगा. आइए समझते हैं कि क्या केंद्र की तरफ से बनाए गए पे कमीशन की सिफारिशें सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए होती हैं या राज्यों को भी लागू करना अनिवार्य होता है.

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क्या वेतन आयोग की सिफारिशें केवल केंद्रीय कर्मचारियों के लिए होती हैं?

हां, वेतन आयोग की सिफारिशें केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर लागू होती हैं. इसका मतलब हुआ कि वेतन आयोग का गठन केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए ही होता है. मिंट में छपी एक खबर में बताया गया है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का फायदा करीब 50 लाख सरकारी कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स को मिलने की उम्मीद है.

केंद्र सरकार हर दस साल में अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी में बढ़ोतरी के लिए वेतन आयोग का गठन करती है. 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 में लागू हुई थीं और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है.

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क्या राज्य केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से इनकार कर सकते हैं?

हां, इनकार कर सकती हैं. कानूनी तौर पर केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना राज्य सरकारों के लिए बाध्यकारी नहीं है. हर राज्य केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को मानने या न मानने के लिए आजाद है. उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में अब तक सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है.

ऐसे में केंद्र के वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना राज्यों की आर्थिक स्थिति और उस राज्य सरकार की मंशा पर पूरी तरह से निर्भर करता है.

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वेतन आयोग से राज्य कर्मचारियों की सैलरी बढ़ना अनिवार्य है या राजनीतिक दबाव?

इस सवाल पर फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं कि कुछ अपवादों छोड़ दें तो आमतौर राज्य सरकारें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें अपने राज्यों में लागू कर देती हैं. कई बार हू-ब-हू, तो कई बार थोड़ा बदलाव कर इन्हें लागू कर दिया जाता है. हालांकि, राज्य सरकारों के खजाने पर निर्भर है कि वे इस बढ़ोतरी को झेल पाएंगी कि नहीं. 

उनका कहना है कि कई बार कर्मचारियों के विरोध की आशंका को देखते हुए राज्य सरकारों को पे कमीशन की सिफारिशों को लागू करना पड़ता है. कई बार राजनीतिक फायदों को ध्यान में रखकर भी राज्य सरकारें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को अपने यहां लागू करती हैं.

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