प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना खरीद टालने की अपील की है. अगर लोग पीएम की बात मानते हुए नया सोना खरीदने से बचते हैं तो यह पैसा किसी न किसी दूसरे निवेश विकल्प की तरफ शिफ्ट होगा. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसका बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट, शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड्स में जा सकता है. खासतौर पर रियल एस्टेट सेक्टर को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है.
सोने से दूरी तो रियल एस्टेट में बढ़ेगा निवेश, घर खरीदारों के लिए क्या बदलेगा?
प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना खरीद टालने की अपील की है. अगर लोग पीएम की बात मानते हुए नया सोना खरीदने से बचते हैं तो यह पैसा किसी न किसी दूसरे निवेश विकल्प की तरफ शिफ्ट होगा. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसका बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट, शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड्स में जा सकता है.


जानकारों का कहना है कि भारतीय परिवार वर्षों से सोने और प्रॉपर्टी को सुरक्षित निवेश विकल्प मानते हैं. निवेश सलाहकार सीए विनोद रावल लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं कि भारत में सोना सिर्फ धातु नहीं बल्कि कई पीढ़ियों से सुरक्षित निवेश, सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक रहा है. लेकिन अगर पीएम की सलाह मानते हुए लोग सोना खरीदना टालते हैं, तो उनकी सेंविग्स किसी न किसी दूसरे एसेट क्लास में शिफ्ट होगी. उनका कहना है कि इसका सबसे बड़ा लाभ रियल एस्टेट, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स जैसे निवेश साधनों को मिल सकता है.
विनोद रावल आगे बताते हैं कि खासतौर से प्रॉपर्टी में निवेश बढ़ने की संभावना है. इसके पीछे ठोस वजहें भी हैं. प्रॉपर्टी सिर्फ पैसा बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि आप इसमें रह भी सकते हैं. इसे किराए पर भी दे सकते हैं. रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय तक सुरक्षित निवेश का विकल्प भी माना जाता है. यही वजह है कि अगर सोने की खरीद में कमी आती है, तो लोग अपनी बचत को जमीन, प्लॉट या फ्लैट खरीदने जैसे दूसरे प्रॉपर्टी निवेश विकल्पों में लगा सकते हैं.
लो एक्यूआई और नेट जीरो घर बनाने वाली भारत की पहली रियल एस्टेट कंपनी बूट्स रियलिटी (BOOTES Reality) के एमडी दीपक राय ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा निवेश की लिहाज से प्रॉपर्टी की मांग बढ़ सकती है. नेट जीरो घरों का मतलब है कि ऐसे घर जो जितनी बिजली और पानी की खपत करते हैं उतनी बिजली और पानी पैदा करते हैं . जबकि कम एक्यूआई घरों में प्रदूषण नहीं होता है. इन घरों के भीतर हवा साफ (आमतौर पर 50 एक्यूआई से कम) रहती है.
दीपक राय का कहना है कि जो पैसा पहले सोना खरीदने में जाता था. वह पैसा लोग अब घर या फ्लैट खरीदने के लिए इस्तेमाल (कुछ हिस्सा डाउन पेमेंट वगैरा) में लगा सकते हैं. उनका कहना है कि बड़े शहरों के अलावा टियर 2 और टियर -3 शहरों में भी लोग प्लॉट और जमीन वगैरा में निवेश को तरजीह दे सकते हैं. इससे रियल एस्टेट सेक्टर के अलावा सीमेंट, सरिया, फर्नीचर और इससे जुड़े उद्योगों को भी इसका लाभ मिल सकता है.
ये भी पढ़ें: आपने सोना खरीदना छोड़ा तो क्या होगा? PM मोदी की अपील का नफा-नुकसान समझिए
बूट्स रियलिटी के एमडी दीपक राय ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि पीएम मोदी ने पेट्रोल और डीजल वगैरा बचाने के लिए वर्क-फ्रॉम-होम का रास्ता अपनाने का सुझाव दिया है. पीएम की इस अपील का सबसे बड़ा फायदा नई आवासीय योजनाओं को मिल सकता है. उनका कहना है कि एनसीआर समेत (जैसे कि नोएडा, गुरुग्राम वगैरा ) सभी बड़े शहरों में घरों की मांग बढ़ सकती है.
दीपक राय आगे कहते हैं कि अगर कंपनियां वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मोड में कामकाज को तरजीह देती हैं तो आने वाले समय में प्रॉपर्टी की मांग बढ़ेगी. एक्सपर्ट का कहना है कि कोविड के बाद से ही ग्राहक अपने घर में काम करने के लिए अलग वर्कस्पेस को अहम मानने लगे हैं और प्रधानमंत्री का यह संदेश इस ट्रेंड को और मजबूत कर सकता है.
वित्तीय सलाहकार और बंसत कुमार एंड एसोसिएट्स के डायरेक्टर बंसत कुमार चतुर्वेदी लल्लनटॉप से बताते हैं कि रियल एस्टेट को अब महंगाई और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव से बचाव वाले निवेश विकल्प के रूप में ज्यादा देखा जा रहा है. ऐसे में घरेलू बचत का कुछ हिस्सा धीरे-धीरे रियल एस्टेट में जा सकता है.
रियल एस्टेट का भविष्य क्या है?इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर में प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म अनारॉक ग्रुप के हवाले से बताया गया है कि भारत के शीर्ष 7 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में साल 2025 में सालाना पर 8% की वृद्धि हुई. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान एनसीआर में प्रॉपर्टी के दाम 23% का इजाफा हुआ है. एएसके प्राइवेट वेल्थ के सीनियर मैनेजिंग पार्टनर निशांत अग्रवाल का मानना है कि साल 2026 में रियल एस्टेट मार्केट लगभग 10-11% की ग्रोथ दिखा सकता है.
बेंगलुरु की रियल एस्टेट कंपनी मल्टीजेन इंडिया के सीईओ विवेक सिंघल मनीकंट्रोल से बताते हैं कि अगर लोग गोल्ड पर खर्च कम करते हैं तो उनमें से कई निवेशक प्रॉपर्टी में निवेश बढ़ा सकते हैं. खासकर वहां जहां लंबे समय में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने और बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना हो.
ये भी पढ़ें: प्रॉपर्टी से मोटा पैसा बनाना चाहते हैं तो दिल्ली-मुंबई का मोह छोड़िए, मालामाल करने वाले शहर ये हैं
घर खरीदारों को क्या फायदा होगा?डेवलपर्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई तरफ से ऑफर्स जैसे कि आसान पेमेंट प्लान, कम डाउन पेमेंट और कई दूसरी सुविधाओं की पेशकश कर सकते हैं. इसके अलावा मौजूदा समय में घर खरीदारों को एक फायदा ब्याज दरों में नरमी का भी मिल सकता है. फिलहाल होम लोन की ब्याज दरें पिछले कुछ समय की तुलना में काफी कम हैं.
पिछले कुछ महीनों में आरबीआई ने रेपो रेट में एक परसेंट से ज्यादा की कटौती की थी . इसके बाद कई बड़े बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में होम लोन की दरें (करीब 7.1% से 8% के शुरुआती दायरे में ) काफी कम हैं.
ये भी पढ़ें: न युद्ध रुक रहा और न रुपये की गिरावट, दोनों कितना रुलाएंगे?
शेयर बाजार और म्युचअल फंड में भी निवेश बढ़ सकता हैदिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज में कॉमर्स डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर अक्षय मिश्रा ने लल्लनटॉप से कहा, "अगर बड़ी संख्या में लोग सोना खरीदने से बचते हैं, तो उनकी बचत का एक हिस्सा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स जैसे वित्तीय निवेश विकल्पों की ओर जा सकता है." इससे SIP, इक्विटी और हाइब्रिड फंड्स में निवेश बढ़ने की संभावना है, जो घरेलू पूंजी बाजार को मजबूती दे सकता है.
उनका कहना है कि नियमित निवेश बढ़ने से कंपनियों को ज्यादा पैसा मिल सकता है. बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है, खासतौर पर म्यूचुअल फंड्स उन लोगों के लिए आसान विकल्प बन सकते हैं जो सोने से अपनी बचत निकालकर दूसरे निवेश साधनों में लगाना चाहते हैं.
वीडियो: प्रतीक यादव की मौत से 24 घंटे पहले क्या हुआ था? पत्नी अपर्णा यादव ने क्या पूछा था?




















