प्रॉपर्टी से मोटा पैसा बनाना चाहते हैं तो दिल्ली-मुंबई का मोह छोड़िए, मालामाल करने वाले शहर ये हैं
इन शहरों में नौकरियों के मौके बढ़ने से घरों की मांग में इजाफा हो रहा है. रियल एस्टेट से जुड़ी सेवाएं देने वाली कंपनी कॉलियर्स (Colliers) का कहना है कि छोटे शहर नए ग्रोथ इंजन बन रहे हैं. इस वजह से टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें सालाना आधार पर 10% से 15% तक बढ़ने की उम्मीद है.

अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश की योजना बना रहे हैं तो दिल्ली एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों का मोह छोड़ने का वक्त आ गया है. जानकारों का कहना है कि बड़े शहरों की तुलना में छोटे शहरों में रियल एस्टेट में निवेश मोटा फायदा करा सकता है. कई ताज़ा रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री डेटा तो इसी तरफ इशारा कर रहे हैं.
छोटे शहरों में घरों की मांग बढ़ीQuess Corp की ताजा रिपोर्ट (Quess Pulse Report) के मुताबिक भारत में रोजगार के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. अब नौकरी के अवसर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहे. रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्लू कॉलर जॉब्स में से लगभग 70 पर्सेंट नौकरियां नॉन-मेट्रो सिटीज में हैं. इनमें टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है.
टियर-3 में 40 पर्सेंट नौकरियां हैं, जबकि टियर-2 शहरों में 29 पर्सेंट रोजगार मिल रहे हैं. वहीं, टियर-1 यानी बड़े मेट्रो शहरों में अब केवल 31 पर्सेंट नौकरियां ही बची हैं. ब्लू कॉलर जॉब्स फैक्ट्रियों, कंस्ट्रक्शन वगैरा में काम करने वाले कर्मचारियों को शामिल किया जाता है.
ब्लू कॉलर जॉब्स सिर्फ फैक्ट्री या मजदूरी तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में भी बड़ी संख्या में ऐसी नौकरियां होती हैं. इन कामों में फील्ड में भूमिका ज्यादा होती है. जैसे कि फील्ड कलेक्शन एजेंट , बैंकिंग सेल्स एग्जीक्यूटिव (क्रेडिट कार्ड/लोन बेचना) और बीमा एजेंट शामिल होते हैं. वहीं, Quess Corp भारत की एक बड़ी स्टाफिंग कंपनी है. आसान भाषा में कहें तो यह कंपनी दूसरी कंपनियों के लिए कर्मचारियों की भर्ती और मैनेजमेंट का काम करती है.
रिपोर्ट बताती है कि नौकरियों के मौके लखनऊ, नोएडा, कोयंबटूर, इंदौर, सूरत, वडोदरा जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में पैदा हो रहे हैं. इन शहरों में रिटेल, BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस) और इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग व इंडस्ट्रियल सेक्टर (EMPI) में तेजी से रोजगार के मौके बढ़े हैं. कंपनियां अब सिर्फ बड़े महानगरों में नहीं, बल्कि छोटे शहरों में भी अपने ऑपरेशन बढ़ा रही हैं. इससे वहां जॉब्स बढ़ रही हैं.
इन शहरों में नौकरियों के मौके बढ़ने से घरों की मांग में इजाफा हो रहा है. रियल एस्टेट से जुड़ी सेवाएं देने वाली कंपनी कॉलियर्स (Colliers) का कहना है कि छोटे शहर नए ग्रोथ इंजन बन रहे हैं. इस वजह से टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें सालाना आधार पर 10% से 15% तक बढ़ने की उम्मीद है.
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किन शहरों में सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी में बूम की उम्मीद?टियर-2 और टियर-3 शहरों में फोकस कर रही रियल एस्टेट कंपनी बूटेस रियलटी (BOOTES Reality) के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक राय ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा है कि साल 2026 टियर-2 और टियर-3 शहर तेजी से रियल एस्टेट के हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं. मेट्रोज में आसमान छूती प्रॉपर्टी की कीमतों के कारण लखनऊ, देहरादून, इंदौर, जयपुर, अलवर, कोयम्बटूर और सूरत जैसे शहरों में रियल एस्टेट की मांग में भारी उछाल आया है.
इन शहरों में नौकरियों के मौके बढ़ रहे हैं जिससे घरों की मांग बढ़ी है. कई बड़ी कंपनियां और स्टार्टअप्स अब छोटे शहरों में अपने दफ्तर खोल रहे हैं और फैक्ट्रियां लगा रहे हैं. ऐसे में जब नौकरियां वहां पहुंचेंगी, तो जाहिर है घर की डिमांड की बढ़ेगी. इसके अलावा, टियर-2 और टियर-3 शहरों का इंफ्रास्ट्रक्चर भी अब पहले से काफी बेहतर हो चुका है. बेहतर सड़क और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, नए एयरपोर्ट, मेट्रो परियोजनाएं, औद्योगिक कॉरिडोर और आईटी पार्क जैसे विकास कार्य इन शहरों को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं.
राज्य सरकारें भी निवेश आकर्षित करने के लिए नई नीतियां, औद्योगिक प्रोत्साहन और योजनाएं ला रही हैं. ये भी एक वजह है कि लोग इन शहरों में रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश बेहतर रिटर्न दे सकता है.
सीपी कुकरेजा आर्किटेक्ट्स में मैनेजिंग प्रिंसिपल दिक्षु सी कुकरेजा लल्लनटॉप से कहा, “टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां दिखाती हैं कि भारत का शहरी विकास अब सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है. यह भारत के शहरीकरण में आ रहे बड़े संरचनात्मक बदलाव का हिस्सा है. जैसे-जैसे दिल्ली एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहर महंगे और भीड़भाड़ वाले होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे उभरते शहरों में रियल एस्टेट की संभावनाएं बढ़ रही हैं. बेहतर रोड और एयर कनेक्टिविटी भी इन शहरों को निवेश के लिहाज से ज्यादा योग्य बना रहा है. हालांकि, बड़े शहर आगे भी आर्थिक गतिविधियों के मुख्य केंद्र बने रहेंगे.
वहीं, एआरई इन्फ्रा हाइट्स के फाउंडर दीपक गर्ग ने लल्लनटॉप को बताया, “रियल एस्टेट बाजार में इस समय एक साफ बदलाव दिख रहा है. जहां बड़े महानगरों में दाम सीमित दर से बढ़ रहे हैं, वहीं टियर-2 और उभरते क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की मांग और कीमतें दोनों में वृद्धि देखने को मिल रही है. निवेशक अब केवल नामी शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि ऐसे इलाकों को देख रहे हैं जहां कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है. देहरादून जैसे शहरों में भी लोग दीर्घकालिक निवेश और बेहतर जीवनशैली दोनों को ध्यान में रखकर प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं. उनका कहना है कि साल 2026 में इस तरह के तेजी से उभरते शहरों में किया गया निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न दे सकता है.”
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आध्यात्मिक शहरों में भी प्रॉपर्टी की मांग बढ़ीबूटेस रियलटी के एमडी दीपक राय का कहना है कि इन शहरों के अलावा अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, कुरुक्षेत्र और वृंदावन जैसे धार्मिक शहरों में में भी प्रॉपर्टी की मांग तेजी से बढ़ी है. बड़ी तादाद में ऐसे लोग हैं जो अध्यात्म की तलाश में इन शहरों का रुख कर रहे हैं. ऐसे में जो लोग मानसिक शांति ही नहीं बेहतर रिटर्न के लिए भी प्रॉपर्टी में निवेश की योजना बना रहे हैं, उनके लिए इन जगहों पर निवेश फायदा दे सकता है. आने वाले समय में इन शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में 20 पर्सेंट तक का उछाल देखने को मिल सकता है.
बड़े शहरों में कीमतें कम बढ़ने का अनुमानछोटे शहरों के मुकाबले बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में कुछ ठहराव आ रहा है. प्रॉपटाइगर रेजिडेंशियल इनसाइट्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक देश के बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें स्थिर रहने की संभावना है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट में रियल एस्टेट डेवलपर्स के संगठन क्रेडाई और सीआरई मैट्रिक्स के हवाले से बताया गया है कि करीब 70 पर्सेंट रियल एस्टेट डेवलपर्स को उम्मीद है कि साल 2026 में घरों की कीमतें 5% से ज्यादा बढ़ने का अनुमान है.
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