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न युद्ध रुक रहा और न रुपये की गिरावट, दोनों कितना रुलाएंगे?

हाल में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है. वहीं, पेट्रोल और डीजल महंगा होने से सिर्फ आपकी गाड़ी चलाने का खर्च नहीं बढ़ता, बल्कि पूरे देश की सप्लाई चेन महंगी हो जाती है.

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5 मई 2026 (पब्लिश्ड: 09:01 PM IST)
rupee all time low
5 मई को रुपया 95.40 प्रति डॉलर तक लुढ़क गया (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से पैदा हुए तेल संकट का असर सीधा आम लोगों की जेब पर पड़ा है. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया दोहरी चोट दे रहा है. 5 मई को रुपया डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है. मंगलवार को रुपया 95.40 प्रति डॉलर तक लुढ़क गया. और उधर ईरान और अमेरिका के बीच फिर युद्ध के गंभीर संकेत दिखने लगे हैं.

ईरान युद्ध और कच्चे तेल ने भड़काई महंगाई?

28 फरवरी को पश्चिम एशिया में शुरू हुए युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया गया. नतीजा, कच्चे तेल की सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं. सप्लाई चेन पर दबाव आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे हो रही हैं. इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ा है. पेट्रोलियम कंपनियों को तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेश से खरीदता है. 

हाल में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है. वहीं, पेट्रोल और डीजल महंगा होने से सिर्फ आपकी गाड़ी चलाने का खर्च नहीं बढ़ता, बल्कि पूरे देश की सप्लाई चेन महंगी हो जाती है. ट्रक, बस, ट्रेन, खेती का सामान वगैरा-वगैरा. सबकी लागत बढ़ती है. फल-सब्जियों से लेकर दूध, राशन, कपड़े और ई-कॉमर्स डिलीवरी तक सब कुछ प्रभावित होता है. 

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गैस-खाद्य तेल और दालें महंगी 

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि गैस की सप्लाई में दिक्कत से इसके दाम बढ़े हैं. भारत में एलपीजी आयात का लगभग 90% हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता है. रिपोर्ट के मुताबिक सप्लाई घटने से लोग घबराकर खरीदारी कर रहे हैं और कालाबाजारी के मामले भी सामने आ रहे हैं.

साथ ही 10 मार्च, 2026 से दिल्ली में घरेलू 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत 913 रुपये हो गई. 1 मार्च को दिल्ली में इस सिलेंडर का दाम 853 रुपये था. रिपोर्ट के अनुसार जब से ईरान युद्ध शुरू हुआ है, सूरजमुखी तेल 15 रुपये प्रति लीटर और सरसों का तेल 10 रुपये प्रति लीटर ज्यादा महंगा हो गया है. 

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के मुताबिक रूस और पूर्वी यूरोप से शिपमेंट में रुकावट के जोखिम और पाम तेल की परिवहन लागत में वृद्धि से कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है. भारत हर साल 50-60 लाख टन दालें म्यांमार, कनाडा और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से आयात करता है. इनमें तुअर, उड़द और मसूर सबसे ज्यादा आयात होती हैं. लेकिन ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से इन दालों के भाव बढ़े हैं. फल और ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में असर पड़ सकता है.

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फल और ड्राई-फ्रूट्स महंगे हो सकते हैं

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान युद्ध के चलते आने वाले समय में फल और सूखे मेवे के दामों में इजाफा हो सकता है. साल 2024 में, भारत के सेब आयात में ईरान का हिस्सा लगभग 23% था. साथ ही पिस्ता (लगभग 60%) और बादाम (लगभग 39%) जैसे सूखे मेवों में भी ईरान की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी थी. इसी के साथ, अंजीर, पिस्ता, केसर और खुबानी के आयात पर भी ईरान युद्ध का असर पड़ सकता है.

शैंपू-साबुन से लेकर हवाई सफर महंगा होगा 

रोजाना की जरूरत की चीजें जैसे साबुन और शैम्पू से लेकर क्रीम, हेयर ऑयल और रोजमर्रा के उत्पादों में पेट्रोकेमिकल का इस्तेमाल होता है. एक्सपर्ट का कहना है कि आगे भी गैस और किचन का बजट 15-20 परसेंट बढ़ सकता है. एफएमसीजी कंपनियां कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से इन चीजों के दाम बढ़ा सकती हैं. एसी से लेकर घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान तक के दाम बढ़ सकते हैं.

इसके अलावा हवाई यात्रा करना भी महंगा होता जा रहा है. इंडिगो ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 425 रुपये से लेकर 2,300 रुपये तक का फ्यूल सरचार्ज लागू किया है, जबकि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 12 मार्च से घरेलू टिकटों पर 399 रुपये का सरचार्ज लगाने की घोषणा की है.

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रुपये में गिरावट भी रुलाएगी, विदेशों से सामान खरीदना महंगा 

रुपया कमजोर होने से विदेश से सामान खरीदना महंगा हो जाता है. मिंट की एक खबर बताती है कि जब रुपये के मुकाबले डॉलर मजबूत होता है, तो इलेक्ट्रॉनिक्स, ईंधन और ग्रॉसरी आइटम्स जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं और भी महंगी हो जाती हैं. खाने का तेल और जरूरी आयात महंगे हो सकते हैं. रसोई बजट गड़बड़ा सकता है. इससे महंगाई दर में 6-10% की तेजी आ सकती है.

विदेशों में पढ़ना, घूमना-फिरना और रहना महंगा

विदेश यात्रा, छुट्टियां मनाने और शिक्षा का खर्च बढ़ जाता है. मिंट की रिपोर्ट में बताया गया है कि जब रुपया कमजोर होता है, तो डॉलर के बदले आपको अधिक भारतीय रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इससे विदेश में पढ़ाई करना, रहना और खाना-पीना और विदेश में छुट्टियां मनाना महंगा हो जाता है. इन मदों में खर्च 15-20% तक बढ़ सकता है.

होम लोन और दूसरे लोन की किस्त महंगी 

यदि आपने घर, कार या एजुकेशन के लिए लोन लिए हुए हैं तो आप अगले कुछ महीनों में आधा से एक परसेंट ब्याज दर वृद्धि के लिए तैयार रहिए. मिंट की खबर बताती है कि महंगाई बढ़ने पर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं. हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आरबीआई वर्तमान स्थिति से निपटने के लिए क्या फैसला लेता है. दूसरी ओर रोजमर्रा के खर्च बढ़ने से सेविंग्स भी घट सकती हैं.

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