The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Business
  • If Indians Stop Buying Gold and Oil, How Much Will the Economy Gain or Lose ? What Happens to Millions of Goldsmiths?

आपने सोना खरीदना छोड़ा तो क्या होगा? PM मोदी की अपील का नफा-नुकसान समझिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि एक साल तक सोना खरीदने से बचें. एक साल तक विदेश यात्रा टाल दें और जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करें. खाने के तेल में कटौती करें. इसके अलावा उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत करें. रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें और विदेशी ब्रांड की जगह भारत में बनी चीजों यानी स्वदेशी अपनाएं वगैरा.

Advertisement
pic
11 मई 2026 (अपडेटेड: 11 मई 2026, 07:50 PM IST)
PM Modi’s appeal to Indians
कच्चा तेल , सोना, खाद्य तेल और उर्वरक की भारत के कुल विदेशी व्यापार में करीब 31% हिस्सेदारी रही (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)
Quick AI Highlights
Click here to view more

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि एक साल तक सोना खरीदने से बचें. एक साल तक विदेश यात्रा टाल दें और जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करें. खाने के तेल में कटौती करें. इसके अलावा उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत करें. रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें और विदेशी ब्रांड की जगह भारत में बनी चीजों यानी स्वदेशी अपनाएं वगैरा. इन तरीकों से पीएम मोदी ने भारत के लोगों से कम से कम विदेशी मुद्रा खर्च करने की अपील की है. लेकिन पीएम को ये अपील करने की नौबत क्यों आई है. इसके पीछे की कहानी क्या है? इससे देश की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा? इन सेक्टर्स में काम करने वाले लोगों की रोटी-रोजी पर इन सबका क्या असर होगा. आइए समझते हैं.

विदेशी मुद्रा भंडार बचाने पर पीएम का जोर

जैसा हमने ऊपर बताया कि पीएम इन रास्तों से देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखना चाहते हैं. तो सबसे पहले विदेशी मुद्रा भंडार (Forex) के बारे में ही जानते हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट बताती है कि विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास रखी गई विदेशी संपत्तियां हैं. इनमें मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा संपत्तियां (जैसे अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स), गोल्ड रिजर्व, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) वगैरह शामिल होते हैं. 

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं. इससे विदेशों से खरीदी जाने वाली चीजों का भुगतान होता है. इसके अलावा आरबीआई इस रिजर्व से रुपये में उतार-चढ़ाव को संभालने और वैश्विक निवेशकों को यह भरोसा दिलाते हैं कि भारत के पास पैसे (विदेशी मुद्रा भंडार) की कमी नहीं है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 728 अरब डॉलर था. आरबीआई के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 1 मई 2026 को खत्म हफ्ते में भारत का फॉरेक्स रिजर्व घटकर करीब  690.7 अरब डॉलर रह गया.

जब RBI बार-बार अपने भंडार से डॉलर बेचता है तो विदेशी मुद्रा भंडार कम होने लगता है. लेकिन सवाल ये कि डॉलर बेचने की नौबत क्यों आती है. इसका जबाव पीएम की अपील में छिपा है. उदाहरण के लिए, उन्होंने एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है. पीएम को ये अपील क्यों करनी पड़ी इसे समझते हैं. चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का खरीदार है. भारत हर साल 700-800 टन सोना विदेशों से खरीदता है.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत की कुल गोल्ड डिमांड 2025 में 710.9 टन रही, जो 2024 के 802.8 टन से करीब 11% कम थी. सोने की मांग घटने की वजह बताई गई कि दाम काफी ऊपर रहे. लेकिन अब भी भारत दुनिया के टॉप दो खरीदारों में है. इस सोने को खरीदने के लिए भारत को अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं क्योंकि भारत जब विदेशों से सोना आयात करता है तो भुगतान विदेशी मुद्रा खासतौर से अमेरिकी डॉलर में किया जाता है. भारत का अधिकतर विदेशी व्यापार डॉलर में होता है.

ये भी पढ़ें: न युद्ध रुक रहा और न रुपये की गिरावट, दोनों कितना रुलाएंगे?

पीएम ने जिन चीजों का जिक्र किया उन पर अरबों स्वाहा

एनडीटीवी की एक खबर में बताया गया है कि भारत ने वित्त वर्ष 2025-2026 में लगभग 72 अरब डॉलर (6 लाख 85 हजार 600 करोड़ रुपये) कीमत का सोना विदेशों से खरीदा. यह पिछले साल (वित्त वर्ष 2024-25) की तुलना में 24% ज्यादा है. रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के सोने का आयात कुल विदेशों से खरीदे जाने वाले सामान का लगभग 10% है. आसान भाषा में कहें कि मान लीजिए भारत ने अगर साल भर में 100 रुपये कीमत का सामान विदेश से खरीदा तो इसमें 10 रुपये का सोना खरीदा गया. जैसा हमने बताया कि सोना खरीदने में डॉलर लगते हैं. ऐसे में भारत अगर विदेशों से सोना खरीदना बंद कर दे तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार में रखे डॉलर बचेंगे.

लेकिन ये तो सिर्फ एक आइटम की बात हुई. भारत गोल्ड की तरह कच्चा तेल और खाने के तेल (खाद्य तेल) और फर्टिलाइजर पर विदेशों पर निर्भर है. भारत कच्चा तेल खरीदने में ही सबसे ज्यादा विदेशी भंडार से पैसे खर्च करता है. रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-2026 में भारत ने करीब 135 अरब डॉलर कीमत का कच्चा तेल आयात किया. आज की तारीख में यह रकम 12 लाख 80 हजार 683 करोड़ रुपये के अल्ले-पल्ले बैठती है.

वहीं, इस दौरान 1 लाख 85 हजार 655 करोड़ कीमत का खाद्य तेल विदेशों से खरीदा और 1 लाख 38 हजार करोड़ कीमत के फर्टिलाइजर खरीदे गए. एनडीटीवी की रिपोर्ट बताती है कि कच्चा तेल, सोना, खाद्य तेल और उर्वरक की भारत के कुल विदेशी व्यापार में करीब 31% हिस्सेदारी रही है. इस तरह से देखें तो सिर्फ इन 4 चीजों में भारत के अरबों डालर स्वाहा हो जाते हैं. जानकारों का कहना है कि इसीलिए पीएम मोदी ने इन चीजों की खरीदारों कम करने और खपत घटाने की बात की है. 

जानकारों का ये भी कहना है कि भारत इस वक्त दोहरा दबाव झेल रहा है. एनर्जी एक्सपर्ट नरेन्द्र तनेजा का कहना है कि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है और ऊपर से रुपया कमजोर होने से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल खरीदने के लिए पहले से ज्यादा डॉलर ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं. नजीजतन डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया और कमजोर होने का डर बना हुआ है.

देश की इकोनॉमी पर कितना असर?

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अनुमान लगाया है कि भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Defecit) वित्त वर्ष 2025-2026 में बढ़कर 84.5 अरब डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये) रह सकता है. यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 2% है. जब किसी देश का आयात, विदेशों को किए गए भुगतान, विदेशों से होने वाली कमाई से ज्यादा हो जाते हैं तब चालू खाता घाटा कहते हैं. आसान शब्दों में जब देश के भीतर आने वाले विदेशी डॉलर की तुलना में बाहर जाने वाले डॉलर ज्यादा होते हैं, तो उसे चालू खाता घाटा कहा जाता है. 

दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजधानी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर शिवाजी सिंह ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि GDP का करीब 2% CAD फिलहाल संभालने योग्य है. लेकिन यह एक चेतावनी संकेत जरूर है कि खासकर तब जब तेल, सोना और डॉलर दबाव बढ़ा रहे हों.

ये भी पढ़ें: आपको अपना गैस सिलेंडर छोड़ना पड़ सकता है, 'एक घर एक कनेक्शन' नियम समझ लें

क्या 1991 वाला खतरा सता रहा है?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के माता सुंदरी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर सिद्वार्थ राठौर लल्लनटॉप से कहते हैं कि भारत साल 1991 के पेमेंट बैलेंस संकट को भूला नहीं है. यही वजह है कि आज भी देश विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने पर खास जोर देता है. उस समय विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि भारत के पास सिर्फ कुछ हफ्तों के आयात के बराबर ही विदेशी मुद्रा बची थी.

देश के लिए तेल, जरूरी सामान और बाहरी भुगतान करना मुश्किल हो गया था और भारत को सोना गिरवी रखना पड़ा था. हालांकि आज भारत की स्थिति 1991 जैसी नहीं है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत के पास 10 महीने से ज्यादा समय के लिए अपने आयात खर्चे पूरे करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार है.

पीएम की अपील से कितना फायदा होगा?

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीत सिंह लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं कि पीएम मोदी की तरफ से सोना, पेट्रोल और खाद्य तेल वगैरह के संयम की अपील का सीधा मकसद भारत का आयात बिल घटाना, डॉलर बचाना और रुपये की गिरावट को थामना है. अगर लोगों ने पीएम की बात मान ली तो भारत में कच्चा तेल, सोना और खाद्य तेल आयात कम होने पर विदेशी मुद्रा बचेगी. चालू खाता घाटा (CAD) और महंगाई काबू में रह सकता है. रुपये और फॉरेक्स रिजर्व को सहारा मिल सकता है. 

ये भी पढ़ें: LPG की किल्लत के बीच गोबर से बनी बॉयोगैस बनी सहारा

3.5 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट: AIJGF

जानकारों का कहना है कि सोना खरीद घटने से ज्वेलरी कारोबार और इससे जुड़े लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ने की आशंका है. वहीं, पेट्रोल खपत कम होने पर ऑटो, ट्रांसपोर्ट और रिटेल सेक्टर पर असर पड़ सकता है. ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने एक साल तक सोना खरीद टालने की अपील पर गंभीर चिंता जताई है. फेडरेशन का कहना है कि ऐसी अपील से ज्वेलरी और सर्राफा कारोबार से जुड़े करीब 3.5 करोड़ लोगों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है. 

फेडरेशन का कहना है कि इस सेक्टर में लाखों छोटे दुकानदार, सुनार, कारीगरों वगैरा को रोजगार मिलता है. लेकिन सर्राफा बाजार में नकारात्मक माहौल बनने से कुछ समय के लिए इस सेक्टर की रौनक गायब हो सकती है. शादी-विवाह और त्योहारी मांग घटने की संभावना है. इसका सीधा असर छोटे सुनारों और कारीगरों पर पड़ेगा.

वीडियो: 'देश के लिए मरना ही देशभक्ति नहीं' पीएम मोदी ने बढ़ते तेल और गैस के दामों पर क्या कहा?

Advertisement

Advertisement

()