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भारत में इंटर्न्स को मिल रही ₹30 लाख की सैलरी, कौन दे रहा और क्यों?

हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग में कंपनियां कंप्यूटर और एल्गोरिदम की मदद से ये पता लगाती हैं कि किन शेयरों में पैसा लगाने से फायदा हो सकता है. इसमें पलक झपकते ही सही ट्रेडिंग के फैसले लिए जाते हैं.

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शेयरों की समझ रखने वाले युवाओं को मोटा पैसा मिल रहा है. (सांकेतिक फोटो: Unsplash.com)

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  • भारत में हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग कंपनियां इंजीनियरिंग छात्रों को हर महीने 30 लाख रुपये तक की इंटर्नशिप सैलरी देने की पेशकश कर रही हैं।
  • कंपनियां ऐसे युवाओं को खोज रही हैं जिनके पास गणित, सांख्यिकी और प्रोग्रामिंग की एडवांस नॉलेज हो ताकि वे शेयर बाजार में एल्गोरिदम आधारित ट्रेडिंग फैसले बना सकें।
  • इस प्रक्रिया से युवाओं को उच्च वेतन मिल रहा है और इससे कंपनीयों को तेजी से फायदे वाले ट्रेडिंग के फैसले लेने में मदद मिलती है, जिससे फाइनेंशियल मार्केट में गतिविधि बढ़ सकती है।

जितनी सैलरी बड़े-बड़े पदाधिकारियों को नसीब नहीं हो पाती, उससे ज्यादा आजकल इंटर्न्स को बांटी रही है. भारत में कुछ इंजीनियरिंग छात्रों को इंटर्नशिप के दौरान कथित तौर पर हर महीने 30 लाख रुपये तक मिल रहे हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है.

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इंडिया टुडे ने इस रिपोर्ट के हवाले से बताया कि हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) कंपनियां इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके निकले छात्रों को मोटा पैकेज देने को तैयार हैं. ये कंपनियां ऐसे युवाओं को खोज रही हैं, जिनके पास गणित और प्रोग्रामिंग की एडवांस नॉलेज हो. इस काबिलियत के जरिये ये युवा शेयर बाजार से कमाई करा सकते हैं.

इंटर्न्स को मिल रही लाखों की सैलरी

रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम की कंपनी क्वाडेई इंटर्नशिप करने वालों को 30 लाख रुपये हर महीने या दो महीने के लिए 60 लाख रुपये ऑफर कर रही है. ग्रेविटन रिसर्च कैपिटल दो महीने के लिए लगभग 50 लाख रुपये की पेशकश कर रही है. इसके अलावा आईएमसी ट्रेडिंग और ऑप्टिवर जैसी मल्टीनेशनल कंपनियां करीब दो महीने के लिए 50-60 लाख रुपये के पैकेज की पेशकश कर रही हैं.

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कौन सा स्किल लाखों की कमाई करा सकता है?

ये कंपनियां ऐसे छात्रों की तलाश कर रही हैं जिन्हें शेयरों की समझ हो और ये फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स भी पढ़ सकते हों. ऐसे टैलेंट वाले युवाओं की तलाश है जो शेयर बाजार में ट्रेंडिंग से जुड़े फैसले वाले मॉडल बनाने के लिए गणित, सांख्यिकी और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का इस्तेमाल अच्छे से कर सकें. 

हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग में कंपनियां कंप्यूटर और एल्गोरिदम की मदद से ये पता लगाती हैं कि किन शेयरों में पैसा लगाने से फायदा हो सकता है. इसमें पलक झपकते ही सही ट्रेडिंग के फैसले लिए जाते हैं.

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