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चीनी के दाम बढ़ने पर एक्शन में सरकार, जमाखोरी रोकने के लिए सख्त नियम लागू

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 24 अगस्त को अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा. हालांकि, कई जगहों पर 70 रुपये किलो तक बिक रही है. एक महीने पहले के चीनी के दाम में 29% तक इजाफा हुआ है.

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शुगर मार्केटिंग ईयर 2025-26 में भारत में चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)

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  • केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में संशोधन किया है, जिसमें अब आयातित कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे गन्ने की फसल को कीड़ों और तेज बारिश से नुकसान, त्योहारी मांग, सट्टेबाजों की बड़ी खरीदारी और जमाखोरी की स्थिति है।
  • सरकार ने जमाखोरी, कालाबाजारी रोकने और तेजी से सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए नए नियम लागू कर आयातित चीनी के फेसलेस वितरण की प्रक्रिया शुरू की है।

रिटेल बाजार में चीनी की कीमतों में भारी तेजी आई है. फेस्टिव सीजन में केन्द्र सरकार ने इसकी जमाखोरी को रोकने के लिए कच्चे चीनी के आयात नियमों में संशोधन किया. नियमों के मुताबिक, आयातित कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर रिफाइन करके घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य कर दिया गया है.

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इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की तरफ से नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. सरकार की कोशिश है कि विदेश से खरीदी गई चीनी उपभोक्ताओं तक जल्द से जल्द पहुंचे. साथ ही कारोबारी कच्ची या रिफाइंड चीनी की जमाखोरी न कर सकें.

अभी क्या नियम है?

अब तक नियम था कि आयातित कच्ची चीनी को उचित समय सीमा के भीतर और पर्याप्त समय पहले रिफाइन करना जरूरी था, ताकि इसे 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेचा जा सके. लेकिन अब यह सीमा आयात होने के दो महीने के भीतर रिफाइन करके बेचने की रख दी गई है.

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भारत में गन्ने के अच्छे उत्पादन के बावजूद चीनी की कीमतों में इजाफा हुआ है. इसकी कई वजह हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि कीड़ों और तेज़ बारिश से गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है. त्योहारी मांग और सट्टेबाजों के बड़ी मात्रा में खरीद की वजह से चीनी काफी महंगी हो चुकी है. इससे पहले, सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दी थी . 

सॉफ्ट ड्रिक और आइसक्रीम बनाने वाले व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक रखने की सीमा लागू की थी. राज्यों को जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. सप्लाई में कमी के बीच देश में चीनी के दाम काबू में रखने के लिए इस साल सरकार ने मई में कच्चे, सफेद और परिष्कृत चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक प्रतिबंध लगा दिया था.

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75 रुपये तक बिक रही चीनी 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार 24 अगस्त को अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा. एक महीने पहले चीनी के दाम 48.73 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में 29 परसेंट ज्यादा है. इस दौरान चीनी का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 75 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि मॉडल प्राइस 65 रुपये प्रति किलोग्राम था.

फूड सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा ने कहा कि मिल से मिली चीनी की कीमतें महज 7 से 10 दिनों में 47-48 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं. उन्होंने इस वृद्धि को "अनुचित" बताया था.

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उद्योग जगत ने कहा, चीनी की कोई कमी नहीं 

उद्योग जगत का कहना है कि चीनी की कोई कमी नहीं है. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अध्यक्ष नीरज शिरगाओकर ने कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है . साथ ही, सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बाद खुदरा कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है.

एथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी की मांग के बाद मार्केटिंग ईयर 2025-26 यानी  1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच, भारत में चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है. शुरुआती स्टॉक 50 लाख टन है. इस दौरान घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है.

फूड सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा ने कहा कि गन्ने की फसलों पर कीटों के हमले और अत्यधिक बारिश के चलते पानी भरने से 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान अब 306 लाख टन लगाया गया है. चीनी उत्पादन का ये आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 343 लाख टन से काफी कम है. उन्होने इस आरोप को खारिज किया कि चीनी के दाम इसलिए बढ़े, क्योंकि इसका इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में हो रहा है. 

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