The Lallantop

इंश्योरेंस सेक्टर में '10 लाख नौकरियां जाने' की आशंका क्यों जताई गई?

बीमा बेचने वाले एजेंट और ब्रोकर भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के प्रस्तावित कमीशन लिमिट से जुड़े नियम-कायदों का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि इन बदलावों से उनकी आय में भारी कमी आ सकती है. साथ ही लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं

Advertisement
post-main-image
23 सितंबर को जारी कंसल्टेशन पेपर में IRDAI ने बीमा बेचने की व्यवस्था में बदलाव की बात कही गई है (Courtesy: Unsplash.com)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा एजेंटों और ब्रोकरों को मिलने वाले कमीशन में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसमें कमीशन की सीमा तय करने और कुछ पॉलिसी पर जीरो कमीशन शामिल है।
  • IRDAI ने बीमा खरीदने की लागत कम करने और उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से कमीशन दरों में बदलाव का सुझाव दिया है, इसके पीछे यह कारण है कि जनरल इंश्योरेंस में कमीशन में 173% की वृद्धि हुई है।
  • इंश्योरेंस ब्रोकरों ने उपायों के कारण उनकी आय में 60-70% की गिरावट और करीब 10 लाख नौकरियों के खतरे की आशंका जताई है, जिसके चलते उन्होंने विरोध शुरू कर दिया है और प्रतिक्रिया हेतु दिसंबर तक समय मांग रखा है।

देशभर के इंश्योरेंस ब्रोकर, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) के प्रस्तावित नियम-कायदों को लेकर खफा नजर आ रहे हैं. इसी सिलसिले में इंश्योरेंस ब्रोकर ने विरोध शुरू कर दिया है. इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इंश्योरेंस ब्रोकर्स ने चेतावनी दी है कि बैंकों, ब्रोकरों और एजेंटों को भुगतान किए जाने वाले कमीशन पर लिमिट लगाने से उनकी कमाई 60-70% तक घट सकती है. साथ ही दावा किया कि इससे करीब 10 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं.

Advertisement

ये भी पढ़ें: बैंकों में कब से शुरू होगा 5 डे वर्किंग? कमेटी की बैठक के बाद होगा बड़ा फैसला

क्या है पूरा मामला ?

23 सितंबर को जारी कंसल्टेशन पेपर में IRDAI ने बीमा बेचने की व्यवस्था में बदलाव की बात कही है. नियामक ने बीमा बेचने पर मिलने वाले कमीशन में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. 25 अक्टूबर तक सुझाव मांगे हैं. बीमा एजेंट/ब्रोकर को कितना कमीशन मिलेगा, यह पॉलिसी बेचने की कठिनाई के आधार पर तय करने का प्रस्ताव है. इसमें थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को भी शामिल किया गया है. इस तरह की पॉलिसी बेचने पर जीरो कमीशन की बात कही गई है.

Advertisement

IRDAI का तर्क है कि बीमा बेचने की लागत को कम करने और बीमा खरीदने वालों को फायदा देने के लिए नियमों में बदलाव जरूरी है. बीमा नियामक IRDA के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-2023 और वित्त वर्ष 2024-2025 के बीच जनरल इंश्योरेंस ब्रोकर्स के जरिये भुगतान किए गए कमीशन में 173% का इजाफा हुआ. वहीं ब्रोकर्स के जरिये मिले प्रीमियम में 37% की वृद्धि हुई. इस अवधि में औसत कमीशन रेट 8.5% से बढ़कर 17% हो गया.

ये भी पढ़ें: Angel One के फाउंडर दिनेश ठक्कर ने 711 करोड़ में खरीदा पूरा टावर, कभी रहते थे किराये के घर में

क्यों चिंतित हैं ब्रोकर्स ?

इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IBAI) ने इन प्रस्तावों पर चिंता जताते हुए कहा है कि इन बदलावों से बीमा बेचने का पूरा गणित बदल सकता है, बीमा सेक्टर में अनिश्चितता पैदा हो सकती है.

Advertisement

एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार भरिंदवाल ने बताया कि आईबीएआई ने प्रतिक्रिया देने के लिए इस साल दिसंबर तक का समय मांगा है और बीमा नियामक से आग्रह किया है कि पहले पॉलिसीधारकों और इस सेक्टर में काम करने वाले लोगों की परेशानी का आकलन किया जाए. इसके बाद ही कोई कदम उठाया जाए.

वीडियो: एसआईआर के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के 140 सांसदों का चुनाव आयोग तक मार्च

Advertisement