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SIP से दो करोड़ बनाने हैं तो कंपाउंड इंटरेस्ट का खेल समझ लीजिए

किसी भी म्यूचुअल फंड की SIP में एक और चीज मायने रखती है, वह है कंपाउडिंग इंटरेस्ट यानी चक्रवृद्धि ब्याज. कंपाउंडिंग की ताकत से वित्तीय लक्ष्य को हासिल करने में ज्यादा तेजी के साथ मदद मिलती है. कंपाउडिंग को आमतौर पर देसी भाषा में कहते हैं ब्याज पर ब्याज.

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कंपाउडिंग आपके निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को काफी हद तक बढ़ा सकता है (फोटो क्रेडिट: India Today)

लखनऊ के रहने 30 साल के पवन पांडेय (बदला हुआ नाम) एक प्राइवेट फर्म में काम करते हैं. पवन चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उनके पास इतना पैसा हो कि वे सुकून से अपना बाकी जीवन बिता सकें. बेटा-बेटी की शादी, उनकी पढ़ाई के लिए लिया गया कर्ज चुका सकें. पवन अपनी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए 2 करोड़ रुपये जोड़ना चाहते हैं.

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SIP से 2 करोड़ कैसे बनाएं?

फाइनेंशियल एडवाइजर और बसंत कुमार एंड एसोसिएट्स के डायरेक्टर बसंत कुमार चतुर्वेदी लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं कि किसी भी वित्तीय लक्ष्य को पाना है तो पहले ये अच्छे से समझ लें कि आपके पास निवेश करने के लिए कितना समय है. साथ ही जिस निवेश साधन में पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं उसमें औसतन कितना रिटर्न मिलने की संभावना है.

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2 करोड़ बनाने के लिए कितनी SIP करनी होगी?

हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीत सिंह से हमने रिटायरमेंट तक 2 करोड़ रुपये के वित्तीय लक्ष्य को लेकर बातचीत की. उन्होंने बताया कि यह कॉर्पस 25 साल में चाहिए तो नियमित रूप से हर महीने एक निश्चित रकम निवेश करनी होगी.  

वे आगे बताते हैं, “इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12 परसेंट का सालाना एवरेज रिटर्न मान लें तो पवन को हर महीने 11 हजार रुपये की रकम SIP में निवेश करनी होगी.” 

इस तरह पवन 25 साल में करीब 33 लाख रुपये जमा करेंगे. इस राशि पर औसतन 12 परसेंट से 25 साल में 1 करोड़ 75 लाख रुपये रिटर्न मिलेगा. यानी कुल रकम 2 करोड़ 8 लाख 74 हजार रुपये हो जाएगी.

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पवन ने जिस इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया है, अगर उसका औसत रिटर्न 12 परसेंट से ज्यादा रहता है तो उनको और भी ज्यादा पैसा मिलेगा. आमतौर पर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में सालाना रिटर्न 12 से 15 परसेंट के आसपास तक मिलता है.

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कंपाउडिंग से कैसे बढ़ेगा पैसा?

किसी भी म्यूचुअल फंड की SIP में एक और चीज मायने रखती है, वह है कंपाउडिंग इंटरेस्ट यानी चक्रवृद्धि ब्याज. कंपाउंडिंग की ताकत से वित्तीय लक्ष्य को हासिल करने में ज्यादा तेजी के साथ मदद मिलती है. कंपाउडिंग को आमतौर पर देसी भाषा में कहते हैं ब्याज पर ब्याज. 

कोटक महिंद्रा बैंक की वेबसाइट में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कंपाउडिंग निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को काफी हद तक बढ़ा सकता है. उदाहरण के लिए, किसी आदमी ने 10 हजार रुपये हर महीने की SIP शुरू की. अगर इस पर 10% सालाना रिटर्न मिलता है तो कंपाउंडिंग के हिसाब से पहले साल में 1000 रुपये की कमाई होगी. दूसरे साल मूलधन पर रिटर्न न मिलकर 11 हजार रुपये पर मिलेगा. इस तरह से दूसरे साल 1100 रुपये कमाई होगी और कुल रकम बढ़कर 12 हजार 100 रुपये पहुंच जाएगी.

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था, “चक्रवृद्धि ब्याज दुनिया का आठवां अजूबा है. जो इसे समझता है, वह इसे कमाता है. और जो नहीं समझता, वह इसे चुकाता है.”

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