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अब शुरू होगी अडानी एयरलाइंस? इंडिगो-एयर इंडिया का दबदबा खत्म करने की तैयारी

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनियों (अडानी और जीएमआर) को किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी रखने की अनुमति नहीं है. हालांकि, सरकार नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है.

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केन्द्र सरकार की योजना साल 2047 तक देश में हवाई अड्डों की संख्या बढ़ाकर 350 करने की है (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • मोदी सरकार एयरपोर्ट ऑपरेटर्स अडानी और जीएमआर को अपनी एयरलाइन शुरू करने की अनुमति देने के लिए नागरिक उड्डयन नीति में बदलाव पर विचार कर रही है।
  • अभी तक दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट्स चलाने वाली कंपनियों को किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी रखने की अनुमति नहीं है, जिससे एयरलाइन उद्योग में प्रतिस्पर्धा सीमित है।
  • यदि पॉलिसी बदलाव को मंजूरी मिलती है तो नई एयरलाइंस के परिचालन से घरेलू हवाई क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और यात्रियों के लिए विकल्प उपलब्ध होंगे।

अब अडानी और जीएएमआर एयरपोर्ट्स जैसे एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को अपनी खुद की एयरलाइन शुरू करने और चलाने की अनुमति मिल सकती है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग के हवाले से बताया गया है कि इसके लिए मोदी सरकार पॉलिसी में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है. 

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रिपोर्ट बताती है कि सरकार यह बदलाव इसलिए करना चाहती है ताकि नई एयरलाइंस शुरू होने से कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़े . फिलहाल देश में इंडिगो और एयर इंडिया का दबदबा है.

अभी क्या नियम हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनियों (अडानी और जीएमआर) को किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी रखने की अनुमति नहीं है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) इन नियमों में ढील देने पर चर्चा कर रही है. हालांकि , इस तरह के किसी भी कदम के लिए कानून मंत्रालय  और कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी.

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अगर ये प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो इससे मुंबई और सात दूसरे एयरपोर्ट्स चलाने वाले अडानी समूह के लिए रास्ता खुल जाएगा. दिल्ली हवाई अड्डे के साथ-साथ चार दूसरे हवाई अड्डों का प्रबंधन करने वाले जीएमआर एयरपोर्ट्स के लिए भी सीधे एयरलाइन बिजनेस में उतरने का रास्ता खुल जाएगा.

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फिलहाल इन दो एयरलाइंस का दबदबा 

रिपोर्ट के मुताबिक जेट एयरवेज और गो फर्स्ट के बंद होने  से और विस्तारा-एयरएशिया इंडिया के एयर इंडिया में विलय के बाद, इंडिगो और एयर इंडिया मिलकर देश की घरेलू उड़ान क्षमता का लगभग 90% हिस्सा संभालती हैं. 

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पिछले साल दिसंबर में हवाई यात्रियों की किरकिरी झेलनी पड़ी थी क्योंकि देश के एविएशन मार्केट में करीब 60 परसेंट हिस्सेदारी रखने वाली इंडिगो ने पायलटों की कमी के चलते हजारों उड़ानें रद्द कर दी थीं. ऐसे में सरकार भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचने के लिए पॉलिसी में बदलाव करने पर विचार कर रही है.

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तीन गुना बढ़ेगी यात्रियों की संख्या 

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में यह भी बताया कि केन्द्र सरकार की योजना साल 2047 तक देश में हवाई अड्डों की संख्या बढ़ाकर 350 करने की है. साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (आईएटीए) का अनुमान है कि साल 2044 तक भारत में हवाई यात्रियों की संख्या साल 2024 के मुकाबले करीब तीन गुना बढ़ जाएगी. उस समय भारत में हर साल करीब 42.5 करोड़ लोग हवाई करेंगे. ऐसे में सरकार का मानना ​​है कि इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एयरलाइनों के बीच प्रतिस्पर्धा जरूरी है.

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