महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन में करीब 10 लाख मीट्रिक टन की गिरावट आने की आशंका है. अनियमित बारिश और सूखे जैसे हालात के कारण राज्य में गन्ने की पैदावार प्रभावित हो रही है. इसके चलते एथेनॉल उत्पादन में भी लगभग 30% की गिरावट का अनुमान है.
चीनी और महंगी होगी, एथेनॉल प्रोडक्शन भी गिरेगा? महाराष्ट्र का सूखा डरा रहा
महाराष्ट्र के शुगर कमिश्चनर डॉक्टर संजय कोल्टे ने कहा कि इस सीजन में चीनी उत्पादन 89 लाख से 90 लाख टन के बीच रहने की संभावना है. जबकि पिछले साल इसी दौरान चीनी उत्पादन 99 लाख टन था.

इंडिया टुडे के मुताबिक महाराष्ट्र के शुगर कमिश्चनर डॉक्टर संजय कोल्टे ने कहा कि इस सीजन में चीनी उत्पादन 89 लाख से 90 लाख टन के बीच रहने की संभावना है. जबकि पिछले साल इसी दौरान चीनी उत्पादन 99 लाख टन था.
गन्ने की पेराई घटने का अनुमानकृषि विभाग और एक एक्सपर्ट कमेटी के अनुमानों के मुताबिक महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई इस सीजन में घटकर लगभग 900 लाख टन (90 करोड़ टन) रहने की उम्मीद है. पिछले सीजन में यह करीब 1,045 लाख टन (104.5 करोड़) थी.
कम गन्ने मिलने से इस सीजन में गन्ने की औसत पेराई का सीजन भी छोटा होने की संभावना है. यह पिछले साल के 104 दिनों से घटकर लगभग 90 दिन हो सकता है. इसके चलते पूरे राज्य की चीनी मिलों के कामकाज और कमाई पर असर पड़ेगा.
पिछले सीजन में महाराष्ट्र में 210 चीनी कारखानों ने पेराई का काम किया. अब तक 103 कारखानों को आगामी सीजन के लिए लाइसेंस मिल चुके हैं. इसके अलावा 109 कारखानों को लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया जारी है.
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महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों में करोड़ों रुपये का निवेश किया है. राज्य की कुल स्थापित एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 296 करोड़ लीटर होने का अनुमान है. हालांकि, वास्तविक उत्पादन और बिक्री कच्चे माल की उपलब्धता, केंद्र सरकार की नीतियों और तेल मार्केटिंग कंपनियों की मांग पर निर्भर करती है. वहीं, देशभर में तेल कंपनियों से एथेनॉल की मांग लगभग 1,100 करोड़ लीटर होने का अनुमान है. इस मांग में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी लगभग 100 करोड़ से 120 करोड़ लीटर है.
हर साल करीब 9% चीनी का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जाता है. हालांकि, गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी मोलासेस से बने एथेनॉल की खरीद पर केंद्र की तरफ से लगाए प्रतिबंधों से चीनी मिलों और एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों के उपलब्ध विकल्प सीमित होने की आशंका है. इसके चलते मिलों को गुड़ और अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है.
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चीनी उत्पादन में नंबर वन
नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के मुताबिक महाराष्ट्र 2025-26 के पेराई सीजन में देश का सबसे बड़ा चीनी पैदा करने वाला राज्य है. इस दौरान यहां चीनी उत्पादन 99 लाख टन रहा है. यह इससे पिछले सीजन (2024-25) की तुलना में 18 लाख टन ज्यादा है.
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