अब तक आपने सुना होगा कि भारत अपनी जरूरत का काफी मात्रा में कच्चा तेल रूस से खरीदता है क्योंकि सस्ता पड़ता है. लेकिन अब इसके उलट हो रहा है. न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने बुधवार 12 अगस्त को बताया कि रूस अब भारत से बड़े पैमाने पर पेट्रोल खरीद रहा है. लेकिन रूस को भारत से तेल खरीदने की नौबत क्यों आई? इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग के हवाले से बताया गया कि यूक्रेन के रूस की रिफाइनरियों पर किए गए हमलों से वहां तेल की भारी कमी हो गई है. केप्लर दुनिया भर में तेल-गैस वगैरह के आंकड़ों पर नजर रखती है यानी किस देश ने किससे कितना तेल या गैस खरीदा या कोई दूसरी कमोडिटी .
रूस में पेट्रोल को लेकर हाहाकार, भारत से तेल खरीद रहा
यह पहली बार है जब रूस ने भारत से तेल का आयात किया है. आंकड़ों के मुताबिक रूस के झंडे लगे टैंकर साइक्लोन ने 18 जून को गुजरात के वाडिनार से 42,000 टन पेट्रोल से लदा टैंकर लोड किया

केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक यह पहली बार है जब रूस ने भारत से तेल का आयात किया है. केप्लर के मुताबिक, पहली खेप 5 अगस्त को पहुंची और आगे और भी और तेल आने की संभावना है.
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रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के सपोर्ट वाली नायरा एनर्जी लिमिटेड इस तेल की सप्लाई कर रही है. ये टैंकर मिस्र के पास समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करते हैं.
यूक्रेन द्वारा रूसी रिफाइनरियों पर लगातार हमले और मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी रहने से रूस में तेल की भारी कमी हो गई है. इसके चलते दुनिया का प्रमुख ईंधन निर्यातक रूस को घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोल और डीजल का निर्यात रोकना पड़ा है.
ब्लूमबर्ग की तरफ से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक रूस के झंडे लगे टैंकर साइक्लोन ने 18 जून को गुजरात के वाडिनार से 42,000 टन पेट्रोल से लदा टैंकर लोड किया. इसके बाद, 6 जुलाई को मिस्र के भूमध्यसागरीय तट पर स्थित दमिएटा बंदरगाह पर ओमान ध्वज वाले गार्नेट जहाज को यह तेल ट्रांसफर किया. यह जहाज अगस्त की शुरुआत में रूस पहुंचा. इतना ही नहीं आगे और भी पेट्रोल भेजा जा सकता है.
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