Apple का पेमेंट सिस्टम Apple Pay अक्टूबर 2026 तक इंडिया में आ सकता है. वैसे तो इसको इंडिया में आने में 12 साल से ज्यादा का टाइम लग गया है लेकिन एप्पल यूजर्स में इसको लेकर खूब उत्साह और उत्सुकता है. उत्साह इस बात का कि जल्द ही उनके आईफोन में उनका अपना पेमेंट सिस्टम होगा. उत्सुकता ये कि इससे क्या-क्या होगा? ऐसे कई और सवाल दिमाग में कुलबुला रहे. जैसे,
Apple Pay इंडिया में आ तो रहा है लेकिन क्या UPI पर चलेगा?
Apple Pay अक्टूबर से इंडिया में उपलब्ध हो सकता है लेकिन क्या ये UPI को सपोर्ट करेगा. ऐप्पल पे किस तकनीक पर काम करता है. क्या इसके लिए नई किस्म की मशीनों की जरूरत होगी.

# Apple पे है क्या?
# Apple पे अब क्यों इंडिया में आ रहा?
# अभी तक क्यों नहीं आया?
# Apple पे यूपीआई सपोर्ट करेगा?
Apple पे है क्या?Apple पे क्रेडिट और डेबिट कार्ड बेस्ड पेमेंट सिस्टम है, जिसमें बिना कार्ड को बटुए से निकाले भुगतान किया जा सकता है. यूजर को अपने आईफोन में डेबिट या क्रेडिट कार्ड का डिटेल भरना होता है. इसके बाद फोन को POS मशीन पर टच करते ही भुगतान हो जाता है. ये एक कॉन्टेक्टलेस पेमेंट तकनीक है जो आपके कार्ड के साथ पहले से काम कर रही. POS मशीन मतलब पॉईंट ऑफ सेल्स वाली मशीन. ये मशीन आपने दुकानों से लेकर मॉल और सिनेमाघरों में देखी होगी, जिसमें कार्ड को टच करके या इन्सर्ट करके भुगतान होता है.
इसे NFC (Near Field) कहते हैं. Apple Pay को Apple Watch से भी कनेक्ट किया जा सकता है. इस पेमेंट सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी ये है कि आईफोन बंद होने पर भी पेमेंट हो जाता है. बताने की जरूरत नहीं कि Apple पे सिर्फ आईफोन में ही चलेगा. ऐसा ही पेमेंट सिस्टम सैमसंग के डिवाइस में भी होता है.

Apple प्रोडक्ट की दीवानगी इंडिया में किसी से छिपी नहीं. लॉन्च के दिन से लेकर ऑफर वाले दिन लोग लाइन में लगकर प्रोडक्ट खरीदते हैं. आईफोन का अपना ही फैन बेस है. नया फोन लेना है तो पहली चाहत तो आईफोन है. इसके साथ में डिजिटल पेमेंट का जो सिस्टम इंडिया में है, वैसा तो दुनिया के कई विकसित देशों में भी नहीं. आपकी जेब में बटुआ है या नहीं. फोन होगा तो दूर के गांव में भी आपको कोई दिक्कत नहीं होगी. गूगल पे का जलवा तो हम देख ही रहे. ऐसे में इंडिया में Apple पे नहीं होना कंपनी का नुकसान है.

रेगुलेशन का चक्कर बाबू भईया. Apple पे बहुत ही सेफ पेमेंट सिस्टम है. ‘तुमने कछु करो नईया और हमने कछु देखो नईया’ टाइप. लेन-देन की जानकारी सिर्फ दो पार्टियों को होती है. Apple को भी कुछ पता नहीं होता. डेटा लोकलाइजेशन और आरबीआई (RBI) के नियम यहां आड़े आ गए. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, भारत में होने वाले सभी डिजिटल भुगतानों का डेटा (Data Localization) भारत के ही सर्वरों पर स्टोर होना अनिवार्य है. Apple को इससे दिक्कत थी. अब शायद उसने हामी भरी होगी या फिर कोई दूसरा रास्ता निकाला होगा.
Apple अपनी भुगतान सेवा के लिए बैंकों से हर ट्रांजेक्शन पर तय हिस्सा (कमीशन) मांगता है. Apple भारत के बड़े कार्ड जारीकर्ता बैंकों (जैसे HDFC, ICICI, SBI) से प्रति ट्रांजेक्शन लगभग 0.15% से 0.20% (15-20 basis points) कमीशन की मांग कर रहा है, जबकि भारतीय बैंक कम शुल्क देने पर अड़े हुए हैं. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक 10 पॉइंट पर मामला सुलटा है.
भारत का डिजिटल पेमेंट ढांचा पूरी तरह से UPI (Unified Payments Interface) पर आधारित है, जो QR कोड के जरिए आसानी से काम करता है. एक क्यूआर कोड और हो गया. जबकि NFC चिप पर Apple का कड़ा नियंत्रण है. iPhones में मौजूद NFC चिप का एक्सेस किसी अन्य तीसरे पक्ष के पेमेंट ऐप (जैसे PhonePe या Google Pay) को Tap to Pay के लिए नहीं देता है. इस वजह से भी भारतीय बैंक और वॉलेट कंपनियां अपनी Tap-and-Pay सेवाएं iPhones पर आसानी से रोल-आउट नहीं कर पा रही थीं.
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भारतीय नियमों (NPCI/RBI) के तहत भुगतान पूरा करने के लिए PIN या OTP (Two-Factor Authentication) अनिवार्य है. वहीं Apple पे केवल Face ID/Touch ID (बायोमेट्रिक) से सीधे Tap-and-Pay कराने की सुविधा देता है. हालांकि, आरबीआई ने हाल ही में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से जुड़े दिशानिर्देशों में ढील दी है, जिससे Apple का रास्ता आसान हुआ है.
Apple Pay यूपीआई सपोर्ट करेगा?नहीं करेगा. ये एकदम कनफर्म है और इसीलिए एक्सपर्ट इसके इंडिया में सफल होने की लेकर आशान्वित नहीं हैं. इंडिया में अब हर किसी को स्कैन करने की आदत लग गई है. क्या चाय की दुकान और क्या चमकता शोरूम. फोन निकालो और स्कैन करो. कार्ड मशीन निकालने का कह दो तो आमतौर पर वो डिस्चार्ज पड़ी होती है. हालांकि POS या कार्ड मशीन बड़ी दुकानों से लेकर बड़ी होटलों में मिलती है मगर यूपीआई के सामने वो ऊंट के मुंह में जीरा नहीं बल्कि जीरे का टुकड़ा है.
ऐसे में Apple पे के पास खाने के लिए सेब का बहुत छोटा टुकड़ा है. अब कंपनी आगे चलकर यूपीआई फिट कर दे तो अलग बात वरना फिलहाल तो बस Apple प्रेमियों के झांकी मारने के काम आएगा.
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