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EPFO की ये 5 टिप्स आपके पीएफ अकाउंट को फ्रॉड से बचा लेंगी

EPFO का कहना है कि फर्जी वेबसाइटों और फिशिंग मैसेजों का इस्तेमाल निजी और वित्तीय जानकारी चुराने के लिए किया जा सकता है. इसलिए उसने अपने सभी खाताधारकों को कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी है.

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देशभर में ईपीएफओ के 7 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों को फर्जी वेबसाइटों और फिशिंग संदेशों से बचाव के लिए केवल आधिकारिक EPFO वेबसाइटों का ही इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
  • फर्जी वेबसाइटों और अनवेरिफाइड लिंक के कारण EPF सदस्यों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी चोरी हो रही है, जिससे संगठन ने सुरक्षा संबंधी सावधानियां जताई हैं।
  • EPFO ने सदस्यों को संदिग्ध वेबसाइट या संदेशों की सूचना आधिकारिक हेल्पडेस्क और साइबर सुरक्षा चैनलों पर देने तथा यूआरएल सत्यापित करने का निर्देश दिया है।

जो लोग अपने पीएफ खाते (EPF Account) को ऑनलाइन इस्तेमाल करते हैं उनके लिए बेहद जरूरी सूचना है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने EPF सदस्यों को खाते का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है.

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इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक EPFO का कहना है कि फर्जी वेबसाइटों और फिशिंग मैसेजों का इस्तेमाल निजी और वित्तीय जानकारी चुराने के लिए किया जा सकता है. इसलिए उसने अपने सभी खाताधारकों को कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी है.

EPFO की आधिकारिक वेबसाइटों का ही इस्तेमाल करें

EPFO ने कहा है कि EPF खाताधारक केवल आधिकारिक EPFO वेबसाइटों का ही इस्तेमाल करें. इनके लिंक ये रहे,
https://www.epfindia.gov.in
https://www.epfo.gov.in
https://unifiedportal-mem.epfindia.gov.in/memberinterface/

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EPF मेंबर्स बिना वेरीफाई लिंक पर क्लिक करने से बचें

EPFO ने एक्स पर जारी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि EPF सदस्यों को एसएमएस, ईमेल या सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किए गए बिना सत्यापित वेब लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए. संगठन का कहना है कि ऐसा न करने पर फिशिंग, मैलवेयर या धोखाधड़ी का खतरा हो सकता है जो आपकी जानकारी चुराने के लिए तैयार किया गया हो.

कौन सी व्यक्तिगत जानकारी कभी भी साझा नहीं करनी चाहिए?

EPFO का कहना है कि EPF सदस्यों को आधिकारिक EPFO पोर्टल के अलावा किसी अन्य वेबसाइट पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन), पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ), पासवर्ड, आधार, परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन), बैंक विवरण या वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) जैसी जानकारी नहीं देनी चाहिए. 

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इसके अलावा कुछ और बातें ध्यान में रखना जरूरी है. EPFO फोन कॉल, व्हाट्सएप, एसएमएस, सोशल मीडिया या ईमेल के माध्यम से निजी जानकारी, ओटीपी या लॉगिन क्रेडेंशियल नहीं मांगता है.

लॉग इन करने से पहले EPFO ​​वेबसाइट URL को कैसे सत्यापित करें?

EPFO का सुझाव है कि लॉग इन करने से पहले यूआरएल को सावधानी से वेरीफाई करें. खासतौर से वर्तनी में अंतर या असामान्य डोमेन पर ध्यान दें. नकली वर्तनी, अजीब डोमेन नाम वगैरा जरूर चेक कर लें. EPFO का कहना है कि नकली वेबसाइटें आपके निजी पासवर्ड चुराने के लिए असली पेजों की नकल करती हैं.

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संदिग्ध वेबसाइट की सूचना कहां करनी चाहिए?

EPFO संदिग्ध वेबसाइटों, संदेशों या फिशिंग की सूचना EPFO के आधिकारिक हेल्प डेस्क या साइबर सुरक्षा रिपोर्टिंग चैनलों को देने का सुझाव देता है.

@officialepfo यानी EPFO की आधिकारिक बेवसाइट पर. इसका यूआरएल https://www.epfindia.gov.in/site_en है. 

इसके अलावा सोशल मीडिया पर शिकायत करने के लिए @socialepfo यानी EPFO के एक्स अकाउंट पर सूचना दे सकते हैं. इसका लिंक https://x.com/socialepfo?lang=en है. 

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