The Lallantop

मंगलवार को ही अमेरिका में क्यों होती है वोटिंग, अंधविश्वास नहीं रीजन प्रैक्टिकल है

अमेरिका में आज यानी 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव हो रहा है. अमेरिका में मंगलवार को वोट डालने की प्रथा 1845 से चली आ रही है. इस स्टोरी में समझेंगे कि इसके पीछे का इतिहास क्या है और क्यों सप्ताह के इस दिन को ही चुना गया है?

Advertisement
post-main-image
अमेरिका में चुनाव नवंबर महीने के मंगलवार को कराने की प्रथा 1845 से शुरू हुई थी. (courtesy: ITG)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • अमेरिका में मिडटर्म चुनाव हर वर्ष नवंबर महीने के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार को आयोजित किया जाता है, जिसे 1845 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा कानून के माध्यम से निर्धारित किया गया था।
  • 1845 से पहले अमेरिकी चुनाव किसी भी तारीख को आयोजित किए जा सकते थे, जिससे मतदाताओं पर प्रभाव के कारण चुनावी परिणामों में पक्षपात होने की चिंता जताई गई, इसी कारण तारीख फिक्स करने की जरूरत पड़ी।
  • वर्तमान में चुनाव दिवस को बदलने के कई सुझाव दिए जा रहे हैं क्योंकि अमेरिका अब एक कृषि प्रधान देश नहीं है, लेकिन फिलहाल चुनाव नवंबर के महीने के पहले सोमवार के बाद वाले मंगलवार को ही होते रहेंगे।

अमेरिका में 3 नवंबर (मंगलवार) को मिडटर्म चुनाव हो रहा है. इससे पहले राष्ट्रपति के लिए चुनाव 5 नवंबर, 2024 को हुआ था. अगला राष्ट्रपति चुनाव 7 नवंबर, 2028 को होगा. यानी तारीख कोई सी भी हो मगर नवंबर का महीना ‘कॉन्स्टैंट’ है. इसके अलावा एक बात और कॉमन है. अमेरिका में चुनाव का दिन भी हर बार एक ही होता है - ‘मंगलवार’. सोमवार या इतवार नहीं, केवल मंगलवार. मगर ऐसा क्यों है? क्या इसके पीछे कोई परंपरा या अंधविश्वास है या फिर को कोई प्रैक्टिकल रीजन है? 

Advertisement

चूंकि ये प्रथा करीब 180 सालों से चली आ रही है तो इसके लिए हमें इतिहास के पन्ने पलटने होंगे. अमेरिकन हिस्ट्री का वो पेज खोलिए जहां 19वीं सदी का इतिहास दर्ज है. मध्य 1800 में अमेरिका ने पहली बार नवंबर महीने के पहले सोमवार के बाद जो मंगलवार आता है उसी दिन वोट डाले जाएंगे. 

यानी अगर महीना मंगलवार से शुरू हो रहा है तो चुनाव उस दिन नहीं होंगे. पहले सोमवार के बाद जो पहला मंगलवार आएगा उस दिन होगा इलेक्शन. इसे एक्जांपल से समझते हैं. मान लीजिए कि किसी साल नवंबर का महीना मंगलवार से शुरू हो रहा है. उस दिन वोटिंग नहीं होगी. इस कैलेंडर के हिसाब से महीने का पहला सोमवार 6 नवंबर को होगा. वोटिंग उसके अगले दिन मंगलवार, 7 नवंबर को होगी. ऐसा ही 2028 राष्ट्रपति चुनाव में होगा.  

Advertisement
रविवार की जगह मंगलवार क्यों चुना गया? 

अमूमन लैटिन अमेरिका में चुनाव रविवार को होते हैं. पश्चिम एशिया में जाएंगे तो ये काम शनिवार को होता है. मगर अमेरिका में मतदान वीकडे के बीच में होता है. लेकिन मंगलवार वाली प्रथा से पहले अमेरिका में भी चुनाव का दिन फिक्स नहीं था. 

1845 से पहले तक कभी भी चुनाव कराने की छूट थी. बशर्ते वो अमेरिकी राज्यों के इलेक्टोरल कॉलेज की बैठक से पहले पूरी हो जानी चाहिए. इस बैठक से पहले, दिसंबर के पहले बुधवार से ठीक पहले की 34 दिनों की अवधि के भीतर कभी भी चुनाव कराने की छूट थी. जैसे कि 1844 में राष्ट्रपति चुनाव नवंबर की शुरुआत से लेकर दिसंबर की शुरुआत तक, एक महीने की अवधि के दौरान हुए थे. मगर यहां एक दिक्कत थी. 

'हिस्ट्री डॉट कॉम' (History.com) के अनुसार, आलोचकों ने इसपर आपत्ति जताई. उन्होंने तर्क दिया कि अलग-अलग तारीखों पर मतदान कराने से नतीजों पर असर पड़ सकता है. जैसे अगर मतदाताओं को लगता है कि किसी उम्मीदवार का शुरुआती मतदान वाले इलाकों में अच्छा प्रदर्शन है, तो दूसरे इलाके के मतदाताओं पर इसका असर पड़ सकता है. इससे देश के उन अन्य हिस्सों में भी उस उम्मीदवार को बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, जहां बाद में मतदान होना है. 

Advertisement
america
1942 में अमेरिका का ग्रामीण जीवन. 

ये भी पढ़ें: डॉनल्ड ट्रंप इस नवंबर होने वाले मिड टर्म चुनाव हार रहे हैं? इस सर्वे ने सब बता दिया

मंगलवार बन गया ‘वोटिंग डे’

इस प्रॉब्लम को देखते हुए 1845 में अमेरिकी कांग्रेस ने फ़ेडरल चुनावों के लिए एक समान तारीख तय करने के लिए एक कानून पारित किया. कानून के अनुसार, यह तारीख “नवंबर के महीने में पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार” को होनी चाहिए. अब इसके पीछे भी एक लॉजिक है कि मंगलवार और नवंबर ही क्यों? 

19 वीं शताब्दी में अमेरिका एक कृषि प्रधान देश था. देश का एक बड़ा वर्ग खेती-बाड़ी में काम करता था. सोसाइटी की इस बनावट और ज़रूरतों को देखते हुए नवंबर को वोटिंग के लिए फिट माना गया. नवंबर में न तो ज्यादा गर्मी होती है और न सर्दी. फसल की कटाई भी पूरी हो चुकी होती है. इसलिए वोटर्स को वोट डालने से पहले किसी चीज की चिंता नहीं होती है. 

trump
अमेरिका के फार्म में काम कर रहे लोग. 

अब महीना तो तय हो गया. दिन कौन-सा चुना जाए? अमेरिका में ज्यादातर लोग रविवार को चर्च जाते हैं. जाहिर है वहां 62-69 फीसदी क्रिश्चियन रहते हैं तो इस बात का भी ध्यान रखा गया. अब चूंकि बहुत से लोग दूर दराज इलाकों में रहते थे, तो उनके लिए अगले ही दिन पोलिंग बूथ तक आना संभव नहीं होता. इसलिए इतवार और सोमवार को वोटिंग का दिन नहीं चुना गया. 

फिर बुधवार अमेरिका में मार्केट का दिन होता है, जिस दिन बहुत से समुदाय के लोग अपना व्यापार करते हैं. तो ऐसे में मंगलवार को ही ‘वोटिंग डे’ चुन लिया गया. अब पहले सोमवार के बाद वाले मंगलवार के पीछे भी लॉजिक है. पहला, कई व्यापारी महीने के पहले दिन अपना अकाउंट सेटल करते हैं. दूसरा, जितने भी संतों से जुड़ा दिन होता है वो 1 नवंबर को ही आता है. इसलिए मंगलवार को ही फिट माना गया. तब से ये व्यवस्था ऐसी बनी हुई है. 

वोटिंग डे बदलने के लिए दिया जा रहा तर्क 

आज जब अमेरिका अपने कृषि प्रधान युग से आगे बढ़ गया है तो ऐसे में ये नियम कितना तार्किक है? कई लोगों ने नवंबर में मंगलवार को होने वाले चुनाव के दिन को बदलने का सुझाव दिया है. उनका मानना ​​है कि अमेरिका में दो प्रतिशत से भी कम लोग कृषि क्षेत्र में काम करते हैं. उनका कहना है कि आज की मुख्य रूप से शहरी और औद्योगिक आबादी की ज़रूरतें, 19वीं सदी की आबादी की ज़रूरतों से काफी अलग हैं.

दरअसल, 2005 में स्थापित 'व्हाई ट्यूजडे?' (Why Tuesday?) नाम के एक संगठन की मांग है कि चुनाव का दिन बदला जाए. तर्क दिया कि अन्य देशों की तुलना में अमेरिका में मतदाताओं की भागीदारी कम है. संगठन की मांग है कि ‘चुनाव नवंबर महीने के पहले शुक्रवार के बाद आने वाले पहले शनिवार और रविवार को फ़ेडरल पदों के लिए होने वाले नियमित आम चुनावों की तारीख बदली जाए.’ लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता तब तक के लिए चुनाव नवंबर के पहले सोमवार के पहले मंगलवार को ही होगा. 

वीडियो: दुनियादारी: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव, रिपब्लिकन की होगी फजीहत?

Advertisement