'भारत की प्रतिक्रिया में नैतिकता की कमी', ईरान युद्ध पर रघुराम राजन बहुत कुछ बोल गए
पूर्व आरबीआई गवर्नर डॉ. रघुराम राजन ने खुलकर अमेरिका-ईरान युद्ध, भारत की प्रतिक्रिया, ट्रंप प्रशासन, ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय अर्थव्यवस्था और विकसित भारत पर अपनी राय रखी.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का दावा है कि ईरान-इजरायल जंग के बाद दुनिया की राजनीति बदल जाएगी. उन्होंने कहा कि इस जंग के बाद तमाम देश अपनी ऊर्जा चेन को सुरक्षित करने के बारे में सोचेंगे. दी लल्लनटॉप के साथ खास बातचीत में डॉनल्ड ट्रंप की आलोचना करते हुए रघुराम राजन ने कहा कि वो (ट्रंप) नीतियां बनाने में सोच-विचार नहीं करते. सुबह उठते हैं. कुछ पोस्ट करते हैं और वही पॉलिसी बन जाती है. राजन ने कहा कि अमेरिका को लगता है कि वो लगातार बमबारी करेंगे और लोग उनके सामने सरेंडर कर देंगे लेकिन अब ऐसा नहीं होता. यह युद्ध अमेरिका के लिए बड़ा सबक साबित होगा.
ईरान पर अमेरिका के हमले पर भारत की प्रतिक्रियाको लेकर भी रघुराम राजन ने नाखुशी जताई. उन्होंने कहा कि युद्ध पर भारत के रिएक्शन में नैतिकता और मूल्यों की कमी है. उन्होंने कहा,
"1960-70 के दशक में दुनिया हमारी सुनती थी क्योंकि हम मूल्यों पर स्टैंड लेते थे, लेकिन पिछले 10 सालों में सब ट्रांजेक्शनल हो गया है. हम केवल आर्थिक हित देखते हैं."
डॉ. राजन ने कहा कि अमेरिका बिना वजह किसी देश पर हमला करे और भारत निंदा न करे तो क्या ये ठीक है? राजन ने आगे कहा कि भारत सरकार ईरान, अमेरिका और इजरायल से बात कर रही है, ये अच्छी बात है, लेकिन हमें हमारी प्रतिक्रिया पर सोचने की जरूरत है. एक देश दूसरे पर हमला करे और हम चुप रहें. सिर्फ कुछ दिनों बाद कंडोलेंस लेटर जारी करें. क्या ये ठीक है?
उन्होंने कहा कि होर्मुज से भारत वापस आए दो जहाज आर्थिक कारणों से नहीं आए बल्कि ईरान से पुराने रिश्तों की वजह से वापस आ पाए. डॉ. राजन ने कहा कि चुप रहना शॉर्ट टर्म में अच्छा लगता है लेकिन लॉन्ग टर्म में ये ठीक नहीं है. अगर भारत को ग्लोबल साउथ का लीडर बनना है तो ऐसी चीजों पर अपने स्टैंड को लेकर उसे फिर से सोचना चाहिए.
रघुराम राजन ने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के खत्म होने के बाद दुनिया की राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा. लोग एनर्जी चेन को सुरक्षित करना चाहेंगे. ये जंग एनर्जी, इजरायल के अस्तित्व और डॉनल्ड ट्रंप के बारे में लग रही है. अमेरिका और इजरायल अलग-अलग पेज पर हैं. इजरायल ईरान को मिटाना चाहता है क्योंकि उसे उससे खतरा लगता है. लेकिन अमेरिका इस जंग को जल्द खत्म करना चाहता है क्योंकि उसे इसका राजनीतिक नुकसान हो रहा है.
रास लाफ्फान और साउथ पार्स गैस फील्ड्स के हमलों पर डॉ. राजन ने कहा कि दुनिया गलत दिशा में जा रही है. एक-दूसरे के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाना दुनिया के लिए विनाशकारी होगा. यह विकास को रोकेगा और पूरी दुनिया में प्रोडक्शन की स्पीड कम कर देगा.
ऊर्जा सुरक्षा और कुकिंग फ्यूल
रघुराम राजन ने भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए रिन्यूएबल्स एनर्जी, कोयला और स्ट्रैटेजिक रिजर्व बनाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने भारत को अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने की सलाह दी और कुकिंग फ्यूल संकट पर कहा कि इस पर इतने लोग निर्भर हैं कि हमारे पास चॉइस नहीं बची है. लॉन्ग टर्म में हमें खाना बनाने की जरूरतों के लिए बिजली पर स्विच करना होगा.
विकासित भारत और आत्मनिर्भरता
विकसित भारत और आत्मनिर्भरता पर रघुराम राजन ने कहा कि इसका मतलब सिर्फ जीडीपी के आंकड़ें नहीं हैं. 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए प्रोडक्शन बहुत बढ़ाना होगा. राजन के मुताबिक, विकसित भारत का मतलब है कि देश का आखिरी व्यक्ति भी खुश हो. सिर्फ पर कैपिटा जीडीपी नहीं बल्कि क्वालिटी ऑफ लाइफ भी इसके लिए बेहद जरूरी है.
चिप मैन्युफैक्चरिंग में पैसे लगाने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने सप्लाई चेन के स्ट्रेटेजिक पार्ट पर फोकस करने की सलाह दी. उन्होंने ये भी कहा कि देश को एजुकेशन और हेल्थ में भारी इनवेस्टमेंट करने की जरूरत है.
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