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Income Tax FY26: अकाउंट में आए ब्याज की वजह से कहीं आप जेल न पहुंच जाएं! समझें पूरा लोचा

Income Tax FY26: अगर आप भी अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं तो जान लीजिए कि सेविंग्स अकाउंट के ब्याज पर टैक्स कैसे लगता है, इस पर क्या छूट मिलती है और इसे रिपोर्ट करने का सही तरीका क्या है.

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सेविंग्स अकाउंट के ब्याज पर भी लगता है टैक्स

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  • इनकम टैक्स विभाग ने चेतावनी दी है कि सेविंग्स अकाउंट में जमा ब्याज को आयकर रिटर्न में 'अन्य स्रोत से आय' के तहत शामिल करना अनिवार्य है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
  • सेविंग्स अकाउंट में मिले ब्याज पर कराधान इस लिए जरूरी है क्योंकि इसे कुल वार्षिक आय में जोड़ा जाता है और टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है, जिससे टैक्स दायित्व सुनिश्चित होता है।
  • टैक्सपेयर्स धारा 80TTA और 80TTB के अंतर्गत ब्याज पर छूट का लाभ उठा सकते हैं, जबकि नई टैक्स व्यवस्था में यह छूट उपलब्ध नहीं है; इसके लिए उचित कर सलाह लेने की सलाह दी गई है।

इनकम टैक्स रिटर्न भरने का महीना चल रहा है. उम्मीद है आपने रिटर्न दाखिल कर (Income Tax FY26) दिया होगा. अगर नहीं किया तो आखरी तारीख का इंतजार मत कीजिए. ऐसा हम भी कह रहे और इनकम टैक्स विभाग भी. विभाग से मैसेज आना चालू हो गए हैं. रिटर्न भरिए मगर एक जरूरी बात जान लीजिए. इनकम टैक्स भरते समय बैंक अकाउंट में जमा पैसे पर मिले ब्याज का हिसाब भी देना पड़ता है. वही ब्याज जो बैंक आपके सेविंग अकाउंट में हर तीन महीने में क्रेडिट करता है. अगर ऐसा नहीं किया तो फिर... उसकी बात अभी नहीं करते. नियम बता देते हैं.

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Income from Other Sources है

इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक, सेविंग्स अकाउंट से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources) के तहत टैक्स के दायरे में आता है. इसे आपकी कुल सालाना आय में जोड़ा जाता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार इस पर टैक्स लगाया जाता है. इतना ही नहीं, अगर आपके पास एक से ज्यादा सेविंग्स अकाउंट हैं तो सभी अकाउंट में मिली ब्याज की जानकारी आपको देना होती है. अगर आप यह जानकारी नहीं देते हैं या गलत जानकारी देते हैं तो आपको कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. जुर्माना और 7 साल तक जेल का भी प्रावधान है. 

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ब्याज पर छूट मिलती है

वैसे तो सेविंग्स अकाउंट से मिला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है लेकिन इसमें छूट का भी प्रावधान है. टैक्सपेयर्स आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली छूट का दावा करके अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं. आप दो धाराओं में बैंक अकाउंट से मिले ब्याज पर टैक्स कटौती कर सकते हैं.

  • धारा 80TTA के अंतर्गत 60 वर्ष से कम उम्र के लोग और HUF, 10,000 रुपये तक की कटौती कर सकते हैं.  
  • धारा 80TTB के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिक 50,000 रुपये तक की कटौती कर सकते हैं.

ध्यान रहे कि ये कटौतियां केवल तभी क्लेम की जा सकती हैं जब आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनते हैं. नई डिफॉल्ट टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में यह छूट उपलब्ध नहीं है. अगर आपको समझ नहीं आता तो बेहतर होगा कि CA की मदद ले लीजिए. रही बात सेविंग अकाउंट वाले ब्याज की तो आप बैंक स्टेटमेंट में इस ब्याज को चेक कर सकते हैं.

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