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पेट्रोल अभी और महंगा होगा, सरकार के अधिकारियों ने 'मजबूरी' बता दी

इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें आखिरकार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गई हैं. लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद भारत में लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतें हाल फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं. इसकी वजह बताई जा रही तेल कंपनियां का घाटा.

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एक्साइज ड्यूटी घटने से सरकार की कमाई घटी है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

देश में 25 मई को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गए. पेट्रोल 2 रुपये 61 पैसे और डीजल 2 रुपये 71 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया. इस तरह दो हफ्ते से भी कम समय में पेट्रोल-डीजल के दाम चार बार बढ़ा दिए गए. इस दौरान पेट्रोल का दाम करीब 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुका है.

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इस बीच, इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें आखिरकार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गई हैं. लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद भारत में लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतें हाल फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं. इसकी वजह बताई जा रही तेल कंपनियां का घाटा.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है.

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अधिकारियों ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार 4 बार भले ही बढ़ाए गए हैं, लेकिन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को उनके नुकसान की आंशिक रूप से ही भरपाई हो पाई है.

इन अधिकारियों का कहना है कि इस महीने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना करीब 600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.

ये भी पढ़ें: कच्चे तेल की कीमतें $100 के नीचे पहुंची लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल क्यों हो रहा महंगा?

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उनका कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों से कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की वजह से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते कच्चे तेल के आयात में दिक्कत होने से भारत ने लैटिन अमेरिकी और अफ्रीका से तेल खरीद बढ़ाई है.

अधिकारियों ने ये भी बताया कि कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी की थी. इस वजह से टैक्स कलेक्शन में भारी कमी आई. उसे वर्तमान में हर महीने लगभग 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है.

सरकार के अधिकारियों की ये बातें जानकर तो यही लगता है कि तेल के दामों में 8 रुपये की बढ़ोतरी केवल शुरुआत है. आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा जारी रहेगा.

वीडियो: Petrol-Diesel के दाम फिर बढ़े, कितना पहुंचा आपके शहर में दाम?

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