एथेनॉल से अब सिर्फ गाड़ियों में नहीं पड़ेगा, बल्कि इसे खाना पकाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. उद्योग जगत के जानकारों के मुताबिक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, एथेनॉल को खाना पकाने के मुख्य ईंधन के रूप में अपनाने के लिए एक नीतिगत ढांचा तैयार कर रहा है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक इस पॉलिसी में एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, सब्सिडी देने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के तरीकों पर विचार किया जाएगा.
एथेनॉल से अब खाना बनेगा, एटीएम लगेंगे... सरकार का नया प्लान पता लगा!
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, एथेनॉल को खाना पकाने के मुख्य ईंधन के रूप में अपनाने के लिए एक नीतिगत ढांचा तैयार कर रहा है. योजना तो एथेनॉल एटीएम शुरू करने की भी है. इस बारे में सब जानिए.


एक अधिकारी ने इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा कि 'क्लीन कुकिंग पॉलिसी' पर काम चल रहा है. इससे एथेनॉल को एलपीजी के साथ-साथ घरेलू खाना पकाने के ईंधन के रूप में अपनाया जा सकेगा. नई पॉलिसी सितंबर तक तैयार हो सकती है. अप्रैल में खबर आई थी कि सरकार के आग्रह पर स्वच्छ घरेलू ईंधन विकल्प के रूप में एथेनॉल के जरिये खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले चूल्हों का टेस्ट किया जा रहा था.
एथेनॉल एटीएम शुरू करने की योजनाउद्योग जगत के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को शुरू करने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से कहा जा सकता है कि वे लोगों के लिए एथेनॉल एटीएम शुरू करें ताकि इससे लोगों को आसानी से अपनी जरूरत के मुताबिक खाना बनाने के लिए एथेनॉल मिल सके. ये एटीएम सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर लगाए जा सकते हैं.
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सब्सिडी देने की तैयारीखाना पकाने के लिए एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, भारत को एलपीजी पर अपनी निर्भरता कम करने और बढ़ते ‘फ्यूल बिल’ (कच्चा तेल खरीदने विदेशों से खरीदने पर इस्तेमाल होने वाला पैसा) में बचत करने में मदद मिलेगी. एक इंडस्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि एथेनॉल के जरिये खाना पकाने को बढ़ावा देने के लिए सरकार सब्सिडी योजना भी शुरू कर सकती है.
देश में खूब है एथेनॉलखाना पकाने के लिए एथेनॉल को बढ़ावा देने का यह प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब भारत में एथेनॉल की पर्याप्त मात्रा में सप्लाई है. केयरएज रेटिंग्स ने मई की एक रिपोर्ट में कहा कि भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर सालाना से ज्यादा हो गई है . इस वित्तीय वर्ष (2026-27) में 4 अरब लीटर और उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है.
सरकार के E20 ब्लेंडिंग कार्यक्रम के लिए लगभग 11 अरब लीटर हर साल एथेनॉल इस्तेमाल किए जाने के बाद, शराब बनाने वाली कंपनियां, दवा कंपनियां और केमिकल बनाने वाली कंपनियां 3-3.5 अरब लीटर की खपत करती हैं. इससे लगभग 7 अरब लीटर एथेनॉल बच जाता है. इस वजह से भारत अपने पड़ोसी देशों, जैसे नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया को एथेनॉल निर्यात करने पर भी विचार कर सकता है.
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