आज 20 जुलाई है. ऐसे में इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख काफी नजदीक आ चुकी है. जिन लोगों को अपना इनकम टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं हैं वे सभी लोग वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए 31 जुलाई 2026 तक या इससे पहले अपना आयकर रिटर्न समय से भर दें , नहीं तो पेनाल्टी के अलावा तमाम तरह की परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं. कमाई के स्रोतों के आधार पर व्यक्तिगत करदाता तीन प्रकार के आईटीआर फॉर्म (आईटीआर-1, आईटीआर-2 और आईटीआर-3) भर सकते हैं.
इनकम टैक्स रिटर्न भरने की लास्ट डेट आ गई करीब, फटाफट जान लें स्टेप बाई स्टेप प्रोसेस
समय पर इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल न करने पर पेनाल्टी भरनी पड़ सकती है. इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है. अब आईटीआर भरना पहले से काफी आसान हो गया है. स्पेट-बाई-स्टेप आप पूरा तरीका समझ सकते हैं.


इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म वह व्यक्ति दाखिल कर सकता है जिसकी एक वित्तीय वर्ष में कुल कमाई 50 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है. कमाई का जरिया सैलरी या पेंशन है. एक मकान और अन्य तरीकों जैसे ब्याज आय (बचत खातों, जमा, इनकम टैक्स रिफंड) और फैमिली पेंशन है.
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स्टेप 1: आपको आईटीआर ई-फाइलिंग पोर्टल (ITR e-filling Portal) पर लॉग इन करना होगा और अपने क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करना होगा. फिर आपको ई-फाइल टैब पर जाना होगा और 'इनकम टैक्स रिटर्न' टैब पर माउस ले जाकर 'आयकर रिटर्न दाखिल करें' बटन पर क्लिक करना होगा.

स्टेप 2: यहां एक नया वेबपेज खुलेगा . यहां आपको एसेसमेंट ईयर और इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का तरीका चुनना होगा. एक नया वेबपेज खुलेगा और यहां आपको 'स्टार्ट न्यू फाइलिंग' पर क्लिक करना होगा. जैसे ही आप क्लिक करेंगे तो एक नया वेबपेज खुलेगा और यहां आपको आईटीआर फॉर्म चुनना होगा. चूंकि यह लेख आईटीआर-1 फाइलिंग के बारे में है इसलिए हमने आईटीआर-1 चुना है.
स्टेप 3: एक नया वेबपेज खुलेगा और आपको कुछ सवालों के जवाब देने होंगे कि आप आईटीआर क्यों दाखिल करना चाहते हैं. विकल्प चुनने के बाद 'कॉन्टीन्यू ' पर क्लिक करें. एक नया वेबपेज खुलेगा और यहां आपको सभी जानकारी देनी होगी.
चरण 4: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट के मुताबिक, आईटीआर के व्यक्तिगत जानकारी वाले टैब में आपको अपने ई-फाइलिंग प्रोफाइल से अपने-आप भरे गए डेटा को सत्यापित करना होगा. आप अपने कुछ डेटा को सीधे फॉर्म में एडिट नहीं कर पाएंगे. हालांकि, आप प्रोफाइल सेक्शन में जाकर जरूरी बदलाव कर सकते हैं. फॉर्म में आप अपना फोन नंबर, रिटर्न फाइलिंग के तरीके और बैंक डिटेल में बदलाव कर सकते हैं.
'ग्रॉस टोटल इनकम' सेक्शन में आपको पहले से भरी हुई जानकारी की समीक्षा करनी होगी . साथ ही वेतन/पेंशन, मकान संपत्ति, धारा 112 ए के तहत लांग टर्म कैपिटल गेन और अन्य स्रोतों (जैसे ब्याज आय, पारिवारिक पेंशन आदि) से अपने कमाई के तरीकों की डिटेल्स की पुष्टि/बदलाव करना होगा. अगर आपकी कोई ऐसी कमाई है जिस पर टैक्स से छूट मिली हुई है तो आप उसकी डिटेल भी शामिल कर सकते हैं.
'टोटल डिडक्शन' सेक्शन में आपको उन सभी डिडक्शंस (कटौतियों) की जानकारी भरनी, हटानी या चेक करनी होगी जिनका क्लेम आप इनकम टैक्स एक्ट के चैप्टर VI-A के तहत करना चाहते हैं. इस सेक्शन में 80 सी, 80 डी और 80सीसीडी वगैरा से मिलने वाली टैक्स छूट को शामिल करना होता है.
टैक्स पेड सेक्शन में आपको पिछले साल में आपके द्वारा भुगतान किए गए टैक्स की पुष्टि करनी होगी. इस सेक्शन में आपको यह पुष्टि करनी होती है कि पिछले वित्त वर्ष में आपके नाम पर कितना टैक्स जमा हुआ है. इसमें सैलरी से काटा गया टीडीएस (Tax deducted from source) या टीसीएस (Tax Collected at Source), एडवांस टैक्स और सेल्फ एसेसमेंट टैक्स को शामिल किया जाता है.
वहीं, 'टोटल टैक्स लॉयबिलिटी' सेक्शन में आपको यह देखना होता है कि आपकी कुल टैक्स देनदारी (कितना टैक्स बनता है) सही तरीके से निकाली गई है. यह आपकी कमाई, डिडक्शंस और आपने जो पुराना या नया टैक्स रिजीम चुना है, उसके आधार पर अपने-आप कैलकुलेट होती है.
ये सभी सेक्शन भरने के बाद अपना इनकम टैक्स रिटर्न सबमिट करें. आईटीआर सबमिट करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफाई (e-Verify) करना जरूरी है. बिना ई-वेरिफाई आपका ITR वैध नहीं माना जाएगा.
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