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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत एक लाख से दो लाख करोड़ हुई: रिपोर्ट

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की संशोधित लागत को मंजूरी देने का प्रस्ताव 25 अगस्त को कैबिनेट के समक्ष रखा गया.

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पहले इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत एक लाख करोड़ रुपये रहने की बात कही गई थी (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की संशोधित लागत लगभग 2.1 लाख करोड़ रुपये तय की गई है, जो पहले अनुमानित एक लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है।
  • लागत बढ़ने के पीछे मुख्य कारण महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण में देरी और जापान से रेल सेट प्राप्त करने में हुई देर है, जिसके कारण परियोजना पर समय बना नहीं।
  • प्रोजेक्ट का पहला चरण अगस्त 2027 में शुरू होने की संभावना है और पूरा कार्य 2030 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था केंद्र सरकार और जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी से होगी।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने वाली है. इस लागत को रिवाइज करके करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. पहले इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत एक लाख करोड़ रुपये रहने की बात कही गई थी. 

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सूत्रों के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की संशोधित लागत को मंजूरी देने का प्रस्ताव 25 अगस्त को कैबिनेट के समक्ष रखा गया. हालांकि, अब तक सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.

क्यों बढ़ी लागत?

रिपोर्ट में बताया गया है कि रेल मंत्रालय ने भारत के इस पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की कुल लागत बढ़ने की दो प्रमुख वजहें दी हैं. पहली, महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण में काफी समय लगा है. दूसरा, जापान से रेल सेट प्राप्त करने में हुई देरी. यह हाई स्पीड रेल कॉरिडोर 508 किलोमीटर लंबा है. जब इस पर काम शुरू हुआ था उस समय मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की मूल अनुमानित लागत करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये बताई गई थी. इस तरह से देखें तो इस प्रोजेक्ट की लागत सीधे-सीधे 1 लाख करोड़ रुपये बढ़ गई.

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टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में सूत्रों ने कहा कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का पूरा काम अब साल 2030 तक पूरा होने की संभावना है. हालांकि, इस हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का कुछ हिस्सा इससे पहले चालू हो सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस रेल कॉरिडोर का पहला चरण अगस्त 2027 में चालू होने वाला है.

बुलेट ट्रेन की बढ़ी लागत के लिए ज्यादातर पैसा केंद्र सरकार से मिलने की संभावना है. सरकार अपने आम बजट में इस पैसे का इंतजाम कर सकती है. इसके अलावा हो सकता है कुछ पैसा इस प्रोजेक्ट को फाइनेंस करने वाली संस्था से भी लिया जाए. प्रोजेक्ट के लिए करीब 80 परसेंट पैसा जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) से उधार लिया गया है. बाकी पैसों का इंतजाम सरकार ने अपने बजट से किया था.

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परियोजना में देरी क्यों? 

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की घोषणा के बाद से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. खासकर महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण में अनुमान से कहीं अधिक समय लगा. परियोजना को वैधानिक स्वीकृतियों और ट्रेन सेटों के अंतिम रूप देने और खरीद से संबंधित लेटलतीफी का भी सामना करना पड़ा है. इससे परियोजना की लागत बढ़ गई है. जनवरी में, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने कहा था कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत लगभग 83% बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई है.

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