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मुकेश अंबानी की रिलायंस वेनेजुएला से भर-भरकर तेल आयात कर रही, रूसी ऑयल का क्या हुआ?

भारत पहले के मुकाबले रूस से कम कच्चा तेल खरीद रहा है. अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वालों के खिलाफ एक कानून बना दिया है. इस नए कानून के तहत जो भी देश रूस से तेल खरीदेगा उसे ज्यादा टैरिफ चुकाना पड़ सकता है

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भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जुलाई में 56% से घटकर सितंबर में लगभग 35% रह गई (Courtesy: )

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  • भारत ने अक्टूबर की शुरुआत से वेनेजुएला से लगभग 4 लाख 65 हजार बैरल रोजाना कच्चा तेल आयात शुरू किया है, जो सितंबर के मुकाबले दोगुना से भी अधिक है और दिसंबर 2019 के बाद सबसे ऊंचा स्तर होगा।
  • भारत का वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने का कारण रूस से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ नियमों के चलते रूस से तेल खरीद में कमी है।
  • वेनेजुएला से आने वाला तेल मुख्य रूप से रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी में जाएगा, जिससे भारत के कच्चे तेल स्रोतों में विविधता आएगी और रूस पर निर्भरता कम होगी।

भारत का वेनेजुएला से तेल आयात इस महीने करीब 7 साल की ऊंचाई पर पहुंचने वाला है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला से भारत को तेल खरीद में भारी छूट मिल रही है. इसके चलते मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी रिफाइनरियों को वेनेजुएला का तेल भा रहा है. गौरतलब है कि भारत को रूस से तेल खरीदना अब महंगा पड़ रहा है.

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वेनेजुएला से भारत की तेल खरीद दोगुनी 

कच्चे तेल और गैस के आंकड़े मुहैया कराने वाली रिसर्च फर्म केप्लर के अनुमान के मुताबिक, भारत अक्टूबर की शुरुआत से करीब 4 लाख 65 हजार बैरल रोजाना कच्चा तेल खरीद रहा है. यह सितंबर के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है.  

सितंबर के महीने में भारत ने वेनेजुएला से करीब 1 लाख 96 हजार बैरल रोजाना कच्चा तेल खरीदा. अगर अक्टूबर में वेनेजुएला से आने वाले सभी तेल के जहाज तय समय पर भारत पहुंचते हैं, तो यह दिसंबर 2019 के बाद सबसे ज्यादा होगा. रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला से आने वाला तेल रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी में जाएगा. ये दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है.

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इन वजहों से वेनेजुएला का ज्यादा तेल खरीद रहा भारत

अमेरिका के पूर्व नेता निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला से तेल सप्लाई बढ़ी है. इसके चलते भारत ने लगभग एक साल बाद इस साल फरवरी में वेनेजुएला से तेल खरीदना फिर से शुरू कर दिया. वहीं दूसरी ओर, भारत के सबसे बड़े कच्चे तेल सप्लायर रूस से आयात में गिरावट आ रही है क्योंकि कीमतें बढ़ रही हैं.

इसके अलावा भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद कम कर रहा है क्योंकि अमेरिका द्वारा लागू किए गए नए कानून से टैरिफ बढ़ने का खतरा बढ़ गया है. केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जुलाई में 56% से घटकर सितंबर में लगभग 35% रह गई. 

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