भारत में चिप (Semiconductor) का उत्पादन शुरू हो गया. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स नेट्रासेमी, माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज और एग्निट सेमीकंडक्टर्स जैसी कंपनियां जल्द ही अपनी चिप (Chip) बाजार में उतारने वाली हैं. ये कंपनियां अपने पायलट प्रोजेक्ट चला रही हैं और बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी कर रही हैं.
अब भारत में ही होगा चिप का प्रोडक्शन, आपके फोन से लेकर कार तक पड़ेगा इसका असर
Make in India Chip: भारत में जल्द ही चिप का प्रोडक्शन शुरू होने वाला है और यह पूरी तरह से मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट होगा. इसका सीधा लाभ आम लोगों को भी मिलेगा, क्योंकि चिप का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर से लेकर हथियार निर्माण तक में होता है.


रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की ये सभी कंपनियां साल 2027 के आखिर तक इन चिप्स का व्यवसायिक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रख रही हैं. जब भी किसी प्रोडक्ट को बनाया जाता है तो पहले कंपनियां इस प्रोडक्ट को परखने के लिए टेस्टिंग करती हैं. प्रोटोटाइप बनाती हैं. लेकिन जब व्यवसायिक उत्पादन शुरू होता है तो इसका मकसद बाजार में अपने प्रोडक्ट्स बिक्री के लिए उतारना होता है. व्यवसायिक उत्पादन के बाद ग्राहकों को ये चिप बेचनी शुरू की जाती है.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि नेट्रासेमी ने अपने प्रमुख चिप का उत्पादन शुरू कर दिया है और तीन ग्राहकों को नमूने सौंप दिए हैं. अभी पायलट प्रोजेक्ट मोड में है. कंपनी के चिप का व्यवसायिक उत्पादन जुलाई-अगस्त तक शुरू होने की उम्मीद है.
इन कंपनियों के अलाला माइंडग्रोव इस साल के अंत तक वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने की तैयारी में है. कंपनी के को-फाउंडर का कहना है कि वे इस साल लाखों चिप्स की देश -विदेश में बिक्री के लिए तैयारी है. इसी तरह से एग्निट सेमीकंडक्टर्स के तीन पायलट प्रोजेक्ट पहले से ही चल रहे हैं. कंपनी में अगले 6-9 महीने में 5000 से 10 हजार चिप्स बनने शुरू हो जाएंगे. इस कंपनी के चिप के ग्राहकों में डिफेंस सेक्टर की कई कंपनियां शामिल हैं.
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आपको क्या फायदा होगा?जैसा कि हमें पता है कि फिलहाल भारत अपनी जरूरत के ज्यादातर सेमीकंडक्टर्स विदेशों से खरीदता है. स्वदेशी कंपनियां चिप डिजाइन और उत्पादन बढ़ाएंगी तो इलेक्ट्रॉनिक आइटम से लेकर कार और दूसरे वाहन बनाने वाली कंपनियों को विदेश से चिप आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हम लोग जो सामान इस्तेमाल करते हैं जैसे कि मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी , फ्रिज, वाशिंग मशीन वगैरा इन सब में चिप का इस्तेमाल होता है.
इसके अलावा हथियारों बनाने वाली कंपनियां जैसे कि ड्रोन या मिसाइल वगैरा इन सब में भी चिप की जरूरत पड़ती है. पिछले कई साल से हम देख चुके हैं कि समय पर चिप न मिलने से कारों के उत्पादन में दिक्कतें आती हैं. ग्राहकों को कुछ मॉडल की कार खरीदने के लिए तो कई बार महीनों इंतजार करना पड़ जाता है. लेकिन अब चूंकि भारत में चिप का उत्पादन शुरू हो चुका है तो हो सकता है कि इस तरह की दिक्कतें न हों.
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कितना बड़ा है चिप बाजार?साल 2025 में भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग 60 अरब डॉलर (करीब 5.70 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का था. भारत सरकार ने देश में चिप का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं. इस वजह से साल 2034 तक देश में सेमीकंडक्टर्स का उत्पादन करीब 180 अरब डॉलर (करीब 17 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने का अनुमान है.
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