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आपको गलत इंश्योरेंस बेचने वाले एजेंट अब नहीं बचेंगे, तुरंत दबोचने का पक्का इंतजाम हो गया

अब सभी तरह की बीमा पॉलिसी उस व्यक्ति से जुड़ी होंगी जिसने इन्हें बेचा है. अब बीमा एजेंट या जो भी ग्राहकों को बीमा बेचेंगे उनके लिए परमानेंट रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा

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प्रोटेक जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को भी बीमा का लाइसेंस मिल गया है (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने अपनी 137वीं बैठक में बीमा एजेंटों की जबावदेही बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई सुधारों को मंजूरी दी है।
  • साल 2025 में लागू किए गए बीमा कानून संशोधन के तहत बीमा एजेंटों के नाम पॉलिसी में अनिवार्य करने और उनकी परमानेंट रजिस्ट्रेशन की जरूरत को लेकर ये सुधार प्रस्तावित किए गए।
  • इन सुधारों के बाद बीमा खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और ग्राहकों, कंपनियों तथा नियामकों को एजेंटों की पहचान व जिम्मेदारी तय करने में सुविधा मिलेगी।

भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा से जुड़े कई सुधारों को मंजूरी दी है. इससे बीमा खरीदने में ज्यादा पारदर्शिता आएगी. इन सुधारों से लोगों को बीमा बेचने वाले एजेंटों की जबावदेही तय होगी. 

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इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि बीमा नियामक IRDAI की 137वीं बैठक में इन सुधारों को मंजूरी दी गई है. ये बदलाव साल 2025 में अमल में लाए गए ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ (बीमा कानून संशोधन) कानून को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं.

बीमा बेचने वालों की जबावदेही तय होगी

पॉलिसीधारक के नजरिये से शायद सबसे बड़ा बदलाव हर बीमा प्रस्ताव, बीमा पॉलिसी और बीमा प्रमाणपत्र के साथ अधिकृत बीमा एजेंट का नाम अनिवार्य रूप से दर्ज करना है. आसान शब्दों में कहें तो अब बीमा पॉलिसी उस व्यक्ति से जुड़ी होगी जिसने इसे बेचा है.

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अगर कोई ग्राहक को अंधेरे में रहकर बीमा बेचता है, गलत सलाह देता है या पॉलिसी की महत्वपूर्ण शर्तों को छिपाता है तो उसका पता लगाना आसान होगा. बीमा खरीदने वाले ग्राहक, बीमा कंपनी और बीमा नियामक इसमें शामिल अधिकृत विक्रेता की पहचान बहुत आसानी से कर सकते हैं. इस कदम से बीमा एजेंटों, दलालों, कॉर्पोरेट एजेंटों और अन्य बिचौलियों के बीच जवाबदेही बढ़ेगी. साथ ही ग्राहकों के लिए बीमा बिक्री की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी. 

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लावारिस बीमा राशि का पता लगाने के लिए नया फंड

इसके अलावा एक और बदलाव हुआ. अब बीमा एजेंट या जो भी ग्राहकों को बीमा बेचेंगे उनके लिए परमानेंट रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा. अब तक बीमा एजेंट को हर साल अपना रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराना पड़ता है. पॉलिसीधारकों की मदद करने और लावारिस बीमा राशि का पता लगाने के लिए नया फंड बनाया गया है. बीमा रेगुलेटर ने IRDAI (पॉलिसील्डर्स एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड रेगुलेशन ), 2026 को भी मंजूरी दे दी है.

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इस रिपोर्ट में IRDAI के हवाले से बताया गया है कि इन सुधारों से बीमा कंपनियों में पैसा लगाने वाले निवेशकों को सहूलियतें मिलेंगी. 

बीमा नियामक ने एक और बीमा कंपनी प्रोटेक जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को भी बीमा का लाइसेंस दे दिया है. यह साल 2026 में लाइसेंस प्राप्त करने वाली चौथी बीमा कंपनी बन गई है.

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