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सऊदी अरब की बड़ी तेल कंपनी ने भारत के लिए सप्लाई रोकी, ये हमला महंगा न पड़ जाए

सऊदी अरब भारत के लिए कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण सप्लायर रहा है. भारत अपनी जरूरत का करीब 9% कच्चा तेल सऊदी अरामको कंपनी से खरीदता है.

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कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है (Courtesy: India Today)

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  • सऊदी अरामको ने सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर ड्रोन हमलों के बाद भारतीय रिफाइनरियों को कच्चे तेल की सप्लाई अगली सूचना तक रोक दी है।
  • इराकी मिलिशिया द्वारा ड्रोन से किए गए हमलों के कारण सऊदी पश्चिम-पूर्व पाइपलाइन बंद कर दी गई, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा आई है।
  • भारत को तेल आपूर्ति में रुकावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की बढ़ोतरी के कारण वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ेगी।

सऊदी अरामको तेल कंपनी ने अगली सूचना तक भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की सप्लाई रोक दी है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब की महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर हमले के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है. इस पाइप लाइन को पिछले हफ्ते के आखिर में कथित तौर पर इराकी मिलिशिया की तरफ से दागे ड्रोन हमलों के बाद बंद कर दिया गया था. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट के बाद कच्चे तेल की सप्लाई का यह पाइपलाइन काफी अहम जरिया बन गई थी.

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कच्चे तेल पहले ही उबाल मार रहा है 

सऊदी अरामको की तरफ से सप्लाई रोके जाने की खबर ऐसे समय में आई है जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही काफी ज्यादा हैं. इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 103.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था. कच्चे तेल की एक और प्रमुख वैराइटी डब्ल्यूटीआई क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल पर है.

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तेल की बढ़ती कीमतों का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सऊदी अरब भारत के लिए कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण सप्लायर रहा है. भारत अपनी जरूरत का करीब 9% कच्चा तेल सऊदी अरामको कंपनी से खरीदता है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि हालांकि भारतीय तेल कंपनियां सऊदी अरब के अलावा दूसरे देशों से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर आश्वस्त हैं. 

फिर भी अंतरराष्ट्रीय तेल मानकों में वृद्धि और रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट खत्म होने से कच्चे तेल के दाम बढ़ने की आशंका है. इसके अलावा शिपिंग कास्ट यानी कच्चा तेल कार्गो जहाज से मंगाना महंगा हो सकता है. 

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इस तरह से देखें तो इस ताजा रुकावट से भारत के तेल बाजार के सामने मौजूद जोखिम और बढ़ गए हैं. ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं.

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