The Lallantop

मरने के बाद बैंक माफ कर देता है लोन? आसान भाषा में पूरा 'नियम-कानून' समझ लीजिए

लोन लेने वाले की मौत होने के बाद कर्ज का क्या होता है. क्या लोन माफ हो जाता है या परिवार वालों को ईएमआई चुकाना पड़ती है. लोन की वसूली के लिए क्या-क्या कर सकते हैं बैंक. Co-Borrower और गारंटर से वसूली का क्या नियम है.

Advertisement
post-main-image
कर्ज लेने वाले की मौत होने पर ईएमआई का क्या होता है

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • यदि लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो होम लोन या कार लोन में को-एप्लिकेंट, गारंटर या कानूनी उत्तराधिकारी लोन की बकाया राशि चुकाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • लोन की मृत्यु के बाद बकाया राशि वसूलने के लिए बैंक पहले को-एप्लिकेंट, फिर गारंटर और अंततः कानूनी उत्तराधिकारी से संपर्क करता है, जिसमें प्रॉपर्टी के स्वीकृति की स्थिति महत्वपूर्ण होती है।
  • लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस के अंतर्गत लोन की बकाया राशि बीमा कंपनी से वसूल की जाती है, जिससे परिवार पर ईएमआई का बोझ नहीं आता और प्रॉपर्टी जब्त नहीं होती।

अगर Loan लेने वाले व्यक्ति की Death हो जाए तो EMI कौन भरेगा? आदमी खत्म तो क्या ईएमआई खत्म? क्या लोन लेने वाले की मृत्यु के बाद लोन अपने-आप माफ हो जाता है? किसी लोन में Legal Heir होना और Co-Borrower होना क्या एक बात है? लोन में Co-Borrower और Guarantor की क्या जिम्मेदारी होती है? क्रेडिट कार्ड यूजर की मौत हो गई तो क्या परिवार को बकाया चुकाना होगा? लोन का इन्श्योरेन्स है तो क्या होगा? ऐसे कई सवालों का सामना आपने भी किया होगा. चलिए हम इसका जवाब देते हैं. जवाब देने के लिए तीनों किस्म के लोन पकड़ लेते हैं.

Advertisement
क्रेडिट कार्ड का कर्जा 

क्रेडिट कार्ड एक अनसिक्योर्ड लोन है. माने इसके एवज में कोई सिक्योरिटी या डिपॉजिट नहीं लिया जाता है. वैसे कुछ क्रेडिट कार्ड फिक्स डिपॉजिट (FD) के बदले भी दिए जाते हैं मगर उनकी संख्या बहुत कम होती है. इसलिए यूजर की मौत होने पर उधार लेने वाले के परिवार पर कोई बोझ या दबाव नहीं डाला जाता है क्योंकि क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने की जिम्मेदारी सिर्फ कार्ड होल्डर की होती है.  

अगर मृतक के नाम कोई पॉलिसी है या निवेश है या कोई प्रॉपर्टी उसके नाम है तो बैंक कानूनी तरीके से इनसे अपना बकाया वसूल सकता है. इसमें भी आरबीआई की गाइड लाइंस के मुताबिक क्रेडिट कार्ड होल्डर के परिवार के किसी सदस्य या उसके दोस्त या रेफरेंस देने वाले को इसके लिए परेशान नहीं किया जाता है. इसलिए बैंक क्रेडिट कार्ड यूजर की मौत होने पर बैंक उसे नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) घोषित करके अकाउंट क्लोज कर देता है.

Advertisement

ये भी पढ़ें: सरकार लाई 1601 फोन नंबर सीरीज, बिजली से लेकर गैस तक आपकी मदद करेगी

पर्सनल लोन की देनदारी

पर्सनल लोन भी क्रेडिट कार्ड जैसा है. माने इसमें भी बिना किसी सिक्योरिटी या डिपॉजिट के ग्राहक की प्रोफ़ाइल के आधार पर लोन दिया जाता है. ऐसे मामलों में अगर लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो लेंडर्स केवल मृतक की संपत्ति से ही बकाया राशि वसूल सकते हैं. यह संपत्ति मृतक की सेविंग्स, आभूषण, जमीन, घर, एफडी, शेयर्स या म्यूचुअल फंड कुछ भी हो सकती है.

पर्सनल लोन लेते समय अगर परिवार के किसी सदस्य को सह-आवेदक या गारंटर बनाया गया था और लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो बकाया लोन राशि के भुगतान की ज़िम्मेदारी गारंटर की होती है. हालांकि, इसमें भी सब कुछ लोन की नियम और शर्तों के अनुसार होता है. माने यहां मामला ग्रे एरिया वाला है. लोन चुकाना भी पड़ सकता है और नहीं भी. 

Advertisement

अब बात कानूनी उत्तराधिकारी यानी Legal Heir की. अगर कानूनी उत्तराधिकारी को मृतक की संपत्ति से कुछ भी विरासत में नहीं मिला है तो उन्हें अपनी व्यक्तिगत आय या बचत से यह लोन चुकाने की कोई आवश्यकता नहीं है. मामला ‘आदमी खत्म तो लोन खत्म’ वाला है. बकाया राशि को लेंडर या बैंक बट्टे खाते (write-off) में डाल देता है और अकाउंट क्लोज कर दिया जाता है.

होम/कार लोन का बकाया

क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन से इतर होम लोन टोटली सिक्योर्ड लोन है. लोन की आखरी किस्त अदा होने तक घर के कागजात बैंक के पास होते हैं. कार लोन में भी RC कार्ड पर लोन के डिटेल अंकित होते हैं. होम लोन लेने वाले की मौत होने पर बैंक सबसे पहले को-एप्लिकेन्ट से संपर्क करता है. होम लोन के केस में को-एप्लिकेन्ट होता ही है. माने पति के साथ पत्नी, मां के साथ बेटा या बाप के साथ बेटा या बेटी. अगर को-एप्लिकेन्ट लोन चुकाने से मना करता है तो फिर बैंक गारंटर के पास जाता है.

गारंटर ने लोन लेते समय ये जिम्मेदारी ली होती है कि वो लोन चुकाएगा. अगर उसने भी हाथ खड़े कर दिए तो फिर बैंक कानूनी उत्तराधिकारी यानी Legal Heir के पास जाता है. उत्तराधिकारी के पास दो विकल्प होते हैं. कानून के मुताबिक, अगर कोई वारिस मरने वाले की प्रॉपर्टी को स्वीकार नहीं करता है तो फिर उसे लोन चुकाने की जरूरत नहीं. अगर उसने मकान, दुकान या प्रॉपर्टी अपने नाम करवा ली है या करवाने वाला है तो फिर पूरा लोन चुकाना होगा.

होम लोन के केस में बीमा एक बड़ा फैक्टर है. अगर लोन लेते समय लोन प्रोटेक्शन इन्श्योरेन्स लिया गया है तो फिर बैंक पूरा पैसा बीमा कंपनी से लेता है. परिवार पर ईएमआई का बोझ नहीं आता और प्रॉपर्टी भी जब्त नहीं होती है. इसलिए अगर आप होम लोन लेने वाले हैं तो इंश्योरेन्स लेना मत भूलना.

अब अगर कोई रास्ता नहीं बचता तो फिर बैंक नोटिस भेजता है. आमतौर पर एक ईएमआई मिस हो जाने पर ऐसा होता है. तीन ईएमआई मिस होने के बाद नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) घोषित करके SARFAESI Act, Section 13 के तहत प्रॉपर्टी जब्त करके नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाती है.

माने होम लोन और कार लोन के केस में लोन लेने वाले की मौत के बाद परिवार, वारिस या गारंटी देने वाले को कर्ज चुकाना ही पड़ता है. इसलिए किसी भी लोन के केस में गारंटर बनने से पहले ये बात ध्यान रखें. रही बात वारिस की या कानूनी उत्तराधिकारी तो अगर आपके पास प्रॉपर्टी आने वाली है तो लोन चुकाना पड़ेगा. प्रॉपर्टी नहीं लेना तो बैंक या लेंडर आपकी निजी संपत्ति से कुछ नहीं लेगा.

वीडियो: खर्चा-पानी: केंद्र सरकार पेट्रोल के बाद अब CNG में करेगी ब्लेन्डिंग?

Advertisement