भारतीय संसद में जैसे लोकसभा है, वैसे ही अमेरिकी संसद में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्ज है. यहां अमेरिकी सरकार बिल लाती है. सांसद उस पर बहस करते हैं. सब ठीक रहे तो बिल पास हो जाता है. खबर है रूस के खिलाफ लाया गया एक बिल अमेरिकी संसद के निचले सदन में मतदान के लिए पास हो गया है.
भारत पर 100% टैरिफ लगाएगा अमेरिका? रूस के खिलाफ लाया बिल फाइनल वोटिंग के लिए तैयार
16 सितंबर को विधेयक पर अंतिम मतदान होने वाला है. अगर निचला सदन ये विधेयक पारित कर देता है, तो इसे अमेरिकी राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. तब तक, भारत को इस विधेयक के तहत 100% अमेरिकी टैरिफ का सामना नहीं करना पड़ेगा. लेकिन राष्ट्रपति के साइन के बाद ये खतरा भारत पर मंडराने लगेगा.

अगर ट्रंप सरकार ने इसे पास भी करवा लिया तो इसका असर भारत पर भी पड़ने वाला है. Russia Sanctions Bill के तहत भारत को अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात पर 100% तक के अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है.
इंडिया टुडे में छपी एक खबर बताती है कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्ज ने 214-211 मतों से ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट, 2026’ को फाइनल वोटिंग के लिए आगे बढ़ा दिया है. सीनेट ने अगस्त में ही 86-11 मतों से विधेयक पारित कर दिया था.
यह कानून यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कवायद का हिस्सा है. इस विधेयक का नाम दक्षिण कैरोलिना के रिपब्लिकन सांसद और दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ओ ग्राहम के नाम पर रखा गया है. लिंडसे ओ ग्राहम रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के प्रमुख समर्थक थे. उन्होंने उन देशों के खिलाफ जरूरी ‘उपाय’ करने पर जोर दिया था जो रूस के साथ व्यापार करना जारी रखते थे.
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भारत को 100% टैरिफ का सामना कैसे करना पड़ सकता है?इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार होगा जो रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के प्रमुख खरीदार हैं. साथ ही उन देशों पर भी जो प्रतिबंधों से बचने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं. सीनेट द्वारा पारित बिल में मात्रा के हिसाब से रूस से तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातक देशों का जिक्र है.
सदन में विचार-विमर्श के दौरान, डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि स्टेनी होयर ने एक संशोधन प्रस्तुत किया है. इसमें 10 देशों के नाम शामिल थे जिन पर 100% तक का शुल्क लगाया जा सकता है. इन देशों में शामिल हैं चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और भारत.
16 सितंबर को विधेयक पर अंतिम मतदान होने वाला है. अगर निचला सदन ये विधेयक पारित कर देता है, तो इसे अमेरिकी राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. तब तक, भारत को इस विधेयक के तहत 100% अमेरिकी टैरिफ का सामना नहीं करना पड़ेगा. लेकिन राष्ट्रपति के साइन के बाद ये खतरा भारत पर मंडराने लगेगा.
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भारत से इतनी खुन्नस क्यों?
वजह सब जानते हैं. भारत रूस के कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार बना हुआ है. खासतौर से साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत बड़े पैमाने पर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है. अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करके रूस के तेल और गैस से होने वाले राजस्व को कम करने की कोशिश की है. अमेरिका का दावा है कि इससे यूक्रेन में युद्ध को वित्त पोषित करने में मदद मिलती है.
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