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विदेशी निवेशकों पर मेहरबान हुई मोदी सरकार, सरकारी बॉन्ड में पैसा लगाने पर टैक्स में बंपर छूट

सरकार को जब पैसा उधार लेना होता है तो वह आमतौर से वह जी-सेक (G-Sec) के जरिये बाजार से पैसा उठाती है. जी-सेक में ट्रेजरी बिल्स और सरकारी बॉन्ड वगैरा को शामिल किया जाता है.

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इस साल रुपये में करीब 7 परसेंट की गिरावट आई है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • फाइनेंस मंत्रालय ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स को जी-सेक में निवेश से होने वाली कमाई पर 1 अप्रैल, 2026 से कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) से छूट देने का आदेश जारी किया है।
  • यह निर्णय इस कारण लिया गया है क्योंकि विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं और रुपये की गिरावट हुई है, इसलिए विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए टैक्स छूट दी गई है।
  • सरकार की इस टैक्स छूट से उम्मीद है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और रुपये की गिरावट पर काबू पाने में मदद मिलेगी, जिससे भारतीय वित्तीय बाजारों में स्थिरता आएगी।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स को जी-सेक (G-Sec) में निवेश से होने वाली कमाई पर कैपिटल गेन टैक्स (LTCG)  नहीं चुकाना होगा. वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक आदेश में यह जानकारी दी गई है. 5 जून को वित्त मंत्रालय ने एक एक्स पोस्ट में भी यह जानकारी साझा की.

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 बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी एक खबर में बताया गया है कि सरकार ने एक कार्यकारी आदेश के जरिये यह मंजूरी दी है. फिलहाल संसद सत्र नहीं चल रहा है, इसलिए कार्यकारी आदेश जारी किया है. सरकार ने कहा कि यह छूट 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगी. 

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क्या है जी-सेक?

जी सेक का पूरा नाम है गवर्नमेंट सिक्योरिटी . इसे सरकारी प्रतिभूति भी कह सकते हैं.  सरकार को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जब पैसा उधार लेने होता है तो वह आमतौर से वह जी-सेक के जरिये बाजार से पैसा उधार लेती है.  जी-सेक में ट्रेजरी बिल्स और सरकारी बॉन्ड वगैरा को शामिल किया जाता है. 

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सरकार ने विदेशी निवेशकों को ये छूट क्यों दी?

इस फैसले का मकसद जी- सेक के जरिये भारत में विदेशी निवेशकों का ज्यादा से ज्यादा पैसा निवेश कराना है. दरअसल विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. इसके अलावा कच्चे तेल के दाम बढ़ने इस साल रुपये में करीब 7 परसेंट की गिरावट आई है. 

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विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट देने से रुपये की गिरावट को थामने में मदद मिलने की संभावना है. हालांकि, सरकार की तरफ से कैपिटल टैक्स में छूट के ऐलान के बाद बॉन्ड मार्केट्स और रुपये में मामूली बदलाव देखने को मिला है. बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर में स्टॉक एक्सचेंज के हवाले से बताया गया है कि विदेशी निवेशकों ने साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजारों से करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं. यह रकम साल 2025 के मुकाबले ज्यादा है. साल 2025 में विदेशी निवेशकों ने 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे.  

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अभी कितना टैक्स लगता है?

फिलहाल विदेशी संसथागत निवेशकों (FPIs) को भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड शेयरों और बॉन्ड्स पर 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) देना पड़ता था. अगर टैक्स तब लगता है जब इन्हें 12 महीने से ज्यादा समय तक रखा गया हो. इसके अलावा, अब तक सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर 20% तक विदहोल्डिंग टैक्स (TDS) चुकाना पड़ता था.

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