The Lallantop

34 करोड़ लोगों के खाते में एक साथ पैसा! EPFO के बदले हुए सिस्टम ने कैसे किया ये कमाल?

EPFO News: देशभर के 34 करोड़ से ज्यादा लोगों को EPFO ने 15 जुलाई को एक साथ ब्याज की रकम ट्रांसफर कर दी है. अब तक इसके लिए महीनों का इंतजार करना पड़ता था. ये सबकुछ हुई है नए सेंट्रलाइज्ड IT सिस्टम (CITES) की बदौलत.

Advertisement
post-main-image
EPFO ने ब्याज के लिए इंतजार नहीं कराया (फोटो- इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • EPFO ने 15 जुलाई को अपने नए सेंट्रलाइज्ड IT सिस्टम (CITES) के तहत करीब 34 करोड़ खाताधारकों के अकाउंट में ब्याज का पैसा एक साथ ट्रांसफर किया।
  • पहले EPFO के हर रीजनल ऑफिस में ब्याज का डेटा अलग-अलग मैन्युअल तौर पर प्रोसेस होता था, जिससे खाताधारकों को ब्याज मिलने में महीनों का इंतजार करना पड़ता था।
  • इस नए सिस्टम से अब ब्याज का भुगतान ऑटोमैटिक और रियल-टाइम होता है, जिससे क्लेम सेटलमेंट तेज हो गया है और खाताधारकों को समय पर पैसा मिलने लगा है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए 15 जुलाई का दिन किसी त्योहार से कम नहीं था. EPFO ने पहली बार इतिहास रचते हुए एक साथ करोड़ों खाताधारकों के अकाउंट में ब्याज का पैसा ट्रांसफर कर दिया. ये वो पल था जब किसी को हफ़्तों तो किसी को महीनों तक ब्याज के लिए चक्कर नहीं काटने पड़े. श्रम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, EPFO ने नया सेंट्रलाइज्ड IT सिस्टम (CITES) लागू किया है, जिसकी बदौलत ये चमत्कार मुमकिन हो पाया है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

पहले क्या होता था? अगर आप पुरानी यादों में जाएं, तो ब्याज आने का मतलब था एक अनिश्चित इंतज़ार. पहले हर रीजनल ऑफिस अपने स्तर पर डेटा प्रोसेस करता था. किसी के खाते में ब्याज सितंबर में आता, तो किसी के खाते में जनवरी तक हो जाता था. ये मैन्युअल सिस्टम था, जहां फाइलों का बोझ और सर्वर की दिक्कतें आम थीं. 

ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, अब नया सेंट्रलाइज्ड IT सिस्टम (CITES) आया है, जो एक सिंगल प्लेटफॉर्म की तरह काम करता है. इससे अब पूरे देश का डेटा एक साथ प्रोसेस होता है.

Advertisement

इस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत पारदर्शिता है. सेंट्रलाइज्ड होने के कारण अब कोई भी मैनुअल इंटरवेंशन यानी इंसान की दखलअंदाजी नहीं है. 8.25 फीसदी ब्याज का ये जो गणित है, वो अब ऑटोमैटिक कैलकुलेट होकर सीधे खाते में क्रेडिट होता है. आम नौकरीपेशा इंसान के लिए इसका मतलब है-भरोसा. अब उसे ये नहीं सोचना पड़ता कि मेरे पैसे कहां अटक गए या मेरी कंपनी ने अपडेट किया है या नहीं. सारा डेटा रियल-टाइम में अपडेट हो रहा है.

EPF का पुराना vs नया सिस्टम

अब सवाल उठता है कि आखिरी EPFO के नए और पुराने सिस्टम में अंतर क्या है? सवाल का जवाब इस टेबल के जरिए जानने की कोशिश करते हैं,

फीचरपुराना सिस्टम (Manual)नया सिस्टम (CITES)
प्रोसेसिंगरीजनल लेवल पर अलग-अलगसेंट्रलाइज्ड (एक साथ)
स्पीडधीमी (महीनों की देरी)तेज़ (रियल-टाइम)
पारदर्शितासीमितबहुत अधिक
मानवीय हस्तक्षेपज्यादाना के बराबर

सोर्स- पीआईबी

Advertisement

अगर हम आंकड़ों की बात करें, तो करीब 34 करोड़ खातों में ये पैसा एक साथ पहुंचना वाकई में डिजिटल इंडिया की एक बड़ी जीत है. ये सिस्टम न सिर्फ ब्याज देने में तेज़ है, बल्कि क्लेम सेटलमेंट को भी आसान बना रहा है. पहले जो ट्रांसफर या विड्रॉल के लिए हफ़्तों लगते थे, वो अब कुछ ही दिनों में हो रहे हैं. सरकार का लक्ष्य यही है कि पीएफ का पैसा काम करते वक्त तो सुरक्षा दे ही, ज़रूरत के वक्त बिना किसी परेशानी के वापस भी मिले.

ये बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि मानसिक राहत भी है. मिडिल क्लास परिवार में पीएफ का पैसा अक्सर बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत या किसी इमरजेंसी के लिए रखा जाता है. जब पैसा सही समय पर आता है, तो प्लानिंग आसान हो जाती है. नया सेंट्रलाइज्ड सिस्टम अब इसी दिशा में एक मज़बूत कदम है.

वीडियो: खर्चा पानी: EPFO से पैसा निकालना हो, तो जान लीजिए ये बातें

Advertisement