सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट हो और उस पर ‘विदेशी फंडिंग’ का आरोप न लगे, ये मामला भी दुर्लभ है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नीट पेपर लीक को लेकर प्रोटेस्ट शुरू किया तो उन पर भी ये ‘तोहमत’ लगी कि भारत सरकार के विरोध के लिए पैसा विदेश से आ रहा है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए फूड डिलीवरी ऐप से रैंडम लोगों ने खाना भेजा. इस पर भी सवाल उठे कि ऑर्डर अमेरिका, जर्मनी, दुबई, कतर और सऊदी से आ रहे हैं. ‘प्रोटेस्ट विरोधियों’ के लिए इतना काफी था ये कहने के लिए कि विरोध प्रदर्शन में ‘विदेशी ताकतों का हाथ’ है.
CJP प्रोटेस्ट में खाना विदेशी फंडिंग से आ रहा? सरकार ने ये जवाब दिया
सवाल उठे कि ऑर्डर अमेरिका, जर्मनी, दुबई, कतर और सऊदी से आ रहे हैं. ‘प्रोटेस्ट विरोधियों’ के लिए इतना काफी था ये कहने के लिए कि विरोध प्रदर्शन में ‘विदेशी ताकतों का हाथ’ है.

हालांकि, ये बात वो किस आधार पर कह रहे, वही जानें. लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय के पास तो अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि प्रोटेस्ट को विदेशी फंडिंग मिल रही है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने खुद कहा है कि उनके पास ऐसी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. शुक्रवार, 24 जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जायसवाल से इससे जुड़ा सवाल किया गया. इस पर उन्होंने कहा,
आपने जो बात उठाई है, (सीजेपी) प्रोटेस्ट में फॉरेन फंडिंग की, इस मसले पर किसी प्रकार की कोई भी इन्फॉर्मेशन मेरे पास आपसे साझा करने के लिए नहीं है.
प्रोटेस्ट को लेकर कहा गया कि पाकिस्तान के सोशल मीडिया हैंडल्स से गलत जानकारी फैलाई जा रही है. आंदोलन के शुरू में ये भी कहा गया कि सीजेपी को फॉलो करने वालों में ज्यादातर पाकिस्तान से चलने वाले हैंडल्स हैं. रणधीर जायसवाल ने इसका जवाब दिया,
जो सवाल आपने पूछा है कि बहुत सारे सोशल मीडिया के हैंडल्स हैं, जो कहा जा रहा है कि किसी और जगह से चल रहे हैं. तो सोशल मीडिया में कौन-सी चीज कहां से आ रही है, इसके बारे में मेरे पास अभी पुख्ता जानकारी नहीं है. लेकिन हमारी जो एजेंसीज हैं, जो इस मुद्दे से जुड़ी हैं, वो उस पर नजर बनाए हुए हैं.
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बीते दिनों आपने ये खबर सुनी होगी कि जंतर-मंतर पर रैंडम अड्रेस से खाना भेजे जा रहे हैं. स्विगी वाले, जोमैटो वाले जंतर-मंतर पर चलते-फिरते किसी को भी पैक्ड फूड थमाकर कहते हैं कि उनके लिए किसी ने खाना भेजा है. उन्हें ये नहीं बताया गया कि किसे देना है. बस इतना कहा गया कि प्रोटेस्ट साइट पर जो भी मिले, उसे ये दे देना. ये खाना मुंबई, बैंगलोर ही नहीं, देश के बाहर से भी भेजे जा रहे थे. द हिंदू अखबार से बातचीत में 18 साल के पिज्जा डिलिवरी बॉय जैकब ने बताया कि उनके पास चार ऑर्डर अमेरिका से आए. ऑर्डर करने वाले ने उनसे कहा कि वह जंतर-मंतर पर ये पिज्जा किसी को भी दे दें.
देश में कहीं से आए, यहां तक तो ठीक बात थी. विदेशों से भेजे जा रहे खाने पर कई लोगों की त्योरियां चढ़ गईं. फिर वही ‘विदेशी फंडिंग’ वाले आरोप एक्टिवेट हो गए. लेकिन रणधीर जायसवाल ने इस पर भी हवा क्लियर कर दी. उन्होंने कहा कि इस पर भी उनके पास जानकारी नहीं है कि कौन सा खाना किसी फूड डिलीवरी ऐप से या किस चैनल से कहां से ऑर्डर किया गया. उन्होंने कहा,
लेकिन आप जानते हैं कि हमारे देश के बहुत सारे लोग दुबई में, संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं. लेकिन हमारे पास कुछ इस बारे में साझा करने के लिए कुछ खास नहीं है.
हालांकि, जायसवाल ने इन सबके साथ ये भी कहा कि संबंधित जांच एजेंसियों की नजर इस पर है.
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