The Lallantop

महंगाई की मार! तेल-साबुन से लेकर चाय और बिस्कुट भी होंगे महंगे, FMCG कंपनियां देंगी बड़ा झटका!

FMCG Products Price Hike: महंगाई की मार से पहले ही मिडिल क्लास बेहाल है और अब तेल-साबुन से लेकर बिस्कुट-टॉफी जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ने वाले हैं. एफएमसीजी प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा.

Advertisement
post-main-image
जून तिमाही में सभी प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां कीमतें बढ़ा चुकी हैं (फोटो क्रेडिट: India Today)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • ब्रिटानिया, हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी प्रमुख FMCG कंपनियां सितंबर तिमाही में रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में 1.5 से 5 प्रतिशत तक वृद्धि करने की योजना बना रही हैं।
  • कीमतों में वृद्धि का कारण चीनी, पाम तेल और कच्चे तेल की बढ़ती लागत, कमजोर मानसून, वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन पर प्रभाव जैसे कई आर्थिक और प्राकृतिक कारक हैं।
  • मूल्य वृद्धि के प्रभाव में कंपनियां उत्पाद की मात्रा कम कर सकती हैं जिससे उपभोक्ताओं पर खर्च बढ़ेगा और जुलाई से सितंबर की तिमाही में बाजार में महंगाई बनी रहने की संभावना है।

आपकी जेब पर बोझ पड़ने वाला है. जी हां, आपकी रोजाना की जरूरत की कई चीजों के दाम बढ़ने वाले हैं. सभी प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों मसलन ब्रिटानिया, एचयूएल, डाबर और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने वाली हैं. प्रमुख कंपनियों ने रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले उत्पादों (FMCG Products Price Hike) की  कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की योजना बनाई है. 

Advertisement

इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट में समाचार एजेंसी पीटीआई हवाले से बताया गया है कि सितंबर तिमाही (1 जुलाई-30 सितंबर) में रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा. पहले ही तेल-गैस की कीमतों में इजाफा ने लोगों की जेब पर बड़ा बोझ डाला है. 

कंपनियां पहले भी बढ़ा चुकी हैं दाम 

इससे पहले जून तिमाही (एक अप्रैल से 30 जून) में सभी प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों ने अपने उत्पादों के दाम औसतन 2-5% बढ़ाए थे. अब फिर से ये कंपनियां कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं. इतना ही नहीं कंपनियों की नई रणनीति आम आदमी का बजट बिगाड़ सकती हैं. एफएमसीजी कंपनियां अपने प्रोडक्ट की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करने के बजाय उनकी मात्रा (ग्राम में) कम कर सकती हैं. कंपनियों का उद्देश्य बिक्री में किसी तरह की कमी के बिना ही प्रॉफिट बनाए रखने का है.

Advertisement

ये भी पढ़ें: एयर इंडिया के नए CEO टेवोल्डे गेब्रेमारियम पाकिस्तानी एयरलाइन के मुखिया बनने वाले थे?

ब्रिटानिया बिस्कुट पैकेट का वजन घटाने की तैयारी में 

रिपोर्ट के मुताबिक प्रमुख एफएमसीजी कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज सितंबर तिमाही में कीमतों में 1.5-2% की और वृद्धि की तैयारी कर रही है. कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ सीधे लोगों की जेब में डालने के बजाय ये कंपनियां 5 रुपये और 10 रुपये कीमत वाले बिस्कुट पैक का वजन कुछ हल्का करने जा रही है. कंपनी का कहना है कि चीनी और पाम तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. 

वहीं, यह भी उम्मीद की जा रही है कि हिंदुस्तान यूनिलीवर सितंबर तिमाही में कई चीजों की कीमतों में इजाफा करेगी. कंपनी को जून तिमाही के मुकाबले सितंबर तिमाही में 2-5% तक महंगाई बढ़ने की उम्मीद है. इसकी भरपाई के लिए एचयूएल कीमतों में जरूरत के हिसाब से धीरे-धीरे बढ़ोतरी जारी रखेगी. एचयूएल ने जून तिमाही में पहले ही कीमतों में 2-5% की बढ़ोतरी कर दी थी.

Advertisement

जून तिमाही में कीमतों में औसतन लगभग 5% का इजाफा करने वाली गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स सितंबर तिमाही में भी एक और बढ़ोतरी लागू कर सकती है. डाबर इंडिया को भी लगता है कि इन सामानों में इस्तेमाल होने वाले रॉ मैटेरियल की लागत बढ़ने की उम्मीद है.  इसकी भरपाई करने के लिए कंपनी कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है.  डाबर इंडिया के ग्लोबर सीईओ मोहित मल्होत्रा ​​ने कहा कि महंगाई के कारण बढ़ी हुई लागत कंज्यूमर्स पर डालनी पड़ रही है. 

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने यह भी संकेत दिया है कि यदि इनपुट लागत अधिक बनी रहती है तो वह कीमतों में और बदलाव कर सकती है.

ये भी पढ़ें: कल्याण ज्वेलर्स के शेयर हुए रॉकेट, महीनेभर में 63% की तेजी, एक्सपर्ट्स की राय भी जान लें

FMCG कंपनियां दोबारा कीमतें क्यों बढ़ा रही हैं?

रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ रही है. चीनी और पाम तेल की कीमतें बिस्कुट कंपनियों पर दबाव डाल रही हैं. इसी तरह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी एक बड़ी वजह है. बहुत सी कंपनियों का कच्चा माल और दूसरे इनपुट तेल की कीमतों से जुड़े हुए हैं. 

रिपोर्ट बताती है दुनिया के अलग अलग हिस्सों में जारी राजनीतिक अनिश्चितता से भी कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है. ये कंपनियां पश्चिम एशिया की लड़ाई की वजह से कमोडिटी की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी नजर रख रही हैं. 

साथ ही कमजोर मानसून भी एक बड़ी वजह है. इस साल अल नीनो की वजह से कम बारिश के चलते कृषि उत्पादों पर संभावित प्रभाव पर नजर रख रही हैं.

वीडियो: UPI Payment पर पैसा देना होगा या नहीं?

Advertisement