Canara HSBC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को गलत तरीके से एक पॉलिसी बेचना भारी पड़ गया है. अब बीमा कंपनी को एक करोड़ रुपये जुर्माना भरने को बोला गया है. कंपनी के खिलाफ ये फैसला भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने लिया है (Canara HSBC Life Insurance misselling).
बुजुर्ग को गलत जानकारी देकर पॉलिसी बेची, अब कंपनी को भरने होंगे 1 करोड़ रुपये
बीमा कंपनी की पॉलिसी के ब्रोशर में पॉलिसी लेने के लिए उम्र सीमा 30 से 80 साल के बीच बताई गई थी. जबकि पॉलिसी लेते वक्त बुजुर्ग कस्टमर की उम्र 88 साल थी. इस तरह से नियम के अनुसार उन्हें ये पॉलिसी बेची ही नहीं जा सकती थी. जानिए फिर कैसे हुआ बीमा कंपनी पर इतना तगड़ा एक्शन.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक IRDAI ने पाया है कि Canara HSBC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने एक बुजुर्ग ग्राहक श्री अय्यर को 'डेफर्ड एनुअटी पॉलिसी' बेची थी. बीमा कंपनी की पॉलिसी के ब्रोशर में पॉलिसी लेने के लिए उम्र सीमा 30 से 80 साल के बीच बताई गई थी. लेकिन पॉलिसी लेते वक्त अय्यर की उम्र 88 साल थी. इस तरह से नियम के अनुसार उन्हें ये पॉलिसी बेची ही नहीं जा सकती थी. डेफर्ड एनुअटी पॉलिसी वे होती हैं, जिनमें वादा किया जाता है कि अभी पैसा लगाओ और एक निश्चित समय के बाद पेंशन मिलेगी.
मिस-सेलिंग के चलते एक करोड़ का जुर्माना लगायाIRDAI ने पाया कि अपनी बीमा पॉलिसी बेचते समय प्रचार-प्रसार करते समय इसकी जो खूबियां बताई गई थीं, उसमें कई कमियां पाई गईं. इसी 'मिस-सेलिंग' की वजह से IRDAI ने बीमा कंपनी केनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. किसी फाइनेंशियल प्रोडक्ट को बेचने के लिए जब कोई कंपनी ग्राहक को गलत या भ्रामक जानकारी देती है तो इसे मिस-सेलिंग कहते हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि अय्यर को 2 लाख रुपये का सालाना प्रीमियम कंपनी को चार साल तक देना था, जिससे कुल प्रीमियम राशि 8 लाख रुपये हो गई. यह ग्राहक की खुद घोषित सालाना कमाई 10 लाख रुपये का लगभग 20% था. IRDAI ने पाया कि ग्राहक की वित्तीय क्षमता का कोई दस्तावेजी सत्यापन नहीं था . नियामक ने कहा कि ग्राहक की उम्र और उनकी कमाई को देखते हुए पॉलिसी बेचते समय इन सब बातों की गहन जांच जरूरी थी.
नियामक ने यह भी पाया कि बीमा कंपनी ने बाद में प्रस्तावक की प्रवेश आयु सीमा 75 साल कर दी, हालांकि यह बाद का उपाय पहले के उल्लंघन को ठीक नहीं कर सका. इसके अलावा बीमा कंपनी की तरफ से बीमा पॉलिसी धारक के कागज-पत्तर की जांच में भी कई खामियां पाई गईं.
ये भी पढ़ें: PF क्लेम में 35 दिन की देरी, EPFO को कोर्ट ने लगाई फटकार, 6% ब्याज के साथ पैसा देने का निर्देश
सोशल मीडिया में मामला सामने आने के बाद बीमा कंपनी ने पॉलिसी धारक को दूसरे साल के प्रीमियम सहित 4.09 लाख रुपये वापस कर दिए और कमीशन भी वापस कर दिया. हालांकि, IRDAI ने कहा कि इस वापसी से नियामक उल्लंघनों को माफ नहीं किया जा सकता. अय्यर को केनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस स्मार्ट गारंटीड पेंशन-VI बेची गई थी. इस पॉलिसी का सालाना प्रीमियम 2 लाख रुपये था. यह बीमा पॉलिसी फरवरी 2025 में जारी की गई थी.
वीडियो: 5 लाख के बॉन्ड नोटिस पर सीजेआई की फटकार, यूपी पुलिस ने इंस्पेक्टर को क्यों किया निलंबित?












