करीब 10 साल के इंतजार के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO 17 सितंबर को लॉन्च होगा. इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि NSE का यह IPO एक ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) होगा. इसका मतलब ये हुआ कि मौजूदा बड़े शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे और एक्सचेंज खुद इस इश्यू के जरिये नई पूंजी नहीं जुटाएगा. IPO के बाद NSE की वैल्यूएशन करीब 46 अरब डॉलर (करीब 4.4 लाख करोड़ रुपये) होने की उम्मीद है.
दस साल बाद आ रहा NSE का IPO, डेट, प्राइस बैंड समेत बड़ी बातें जान लीजिए
NSE की स्थापना साल 1992 में हुई थी. शुरुआत में इस एक्सचेंज में भारतीय जीवन बीमा निगम, आईडीबीआई और भारतीय स्टेट बैंक ने पैसा लगाया था. वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस के आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 में NSE दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज था.

NSE ने अपने IPO के लिए प्रति शेयर 1,700 रुपये से 1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है. इस इश्यू के लिए सब्सक्रिप्शन 17 सितंबर को शुरू होगा. 21 सितंबर को यह IPO बंद हो जाएगा. एंकर निवेशकों की बोली 16 सितंबर को लगेगी. NSE पर इसकी लिस्टिंग 24 सितंबर को होने की उम्मीद है.
NSE की स्थापना साल 1992 में हुई थी. शुरुआत में इस एक्सचेंज में भारतीय जीवन बीमा निगम, आईडीबीआई और भारतीय स्टेट बैंक ने पैसा लगाया था. वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस के आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 में NSE दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज था.
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NSE का साइज कितना है?NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज बन गया है. 17 जून तक NSE के 2,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड सदस्य और 2,200 से अधिक लिस्टेड कंपनियां थीं. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 478 लाख करोड़ रुपये) था. NSE के मुताबिक कैश इक्विटी सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी लगभग 95% और इक्विटी डेरिवेटिव्स में लगभग 75% है.
NSE कितना मुनाफा कमाता है?NSE ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 10,300 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया. हालांकि, प्रॉफिट में पिछले साल की तुलना में 15% की गिरावट आई है. अप्रैल 2019 से अप्रैल 2026 की अवधि में NSE का राजस्व दोगुने से अधिक बढ़कर लगभग 18,700 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. NSE की कुल कमाई का 80% से अधिक हिस्सा शेयरों के खरीद और बिक्री से हुई कमाई से आता है. इसमें डेरिवेटिव लेनदेन का बड़ा हिस्सा शामिल है.
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NSE IPO में देरी क्यों हुई?NSE की IPO यात्रा की शुरुआत करीब एक दशक पहले शुरू हुई थी. स्टॉक एक्सचेंज ने पहले साल 2016 में सूचीबद्ध होने की योजना बनाई थी, लेकिन इसके IPO को नियामक मंजूरी नहीं मिली. उस समय एक्सचेंज के खिलाफ एक जांच चल रही थी. साल 2019 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने NSE पर लगभग 1,100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.
इस मामले को लेकर स्टॉक एक्सचेंज और नियामक के बीच कानूनी कार्यवाही चल रही है. अब NSE ने अदालत के बाहर समझौते का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत वह लगभग 157 मिलियन डॉलर (करीब 1500 करोड़ रुपये) का भुगतान करेगा.
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ग्रे मार्केट प्रीमियम में लगातार गिरावटहाल के दिनों में NSE IPO के ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) में गिरावट आई है. यह इस बात का संकेत है कि निवेशकों द्वारा इश्यू प्राइस से अधिक भुगतान करने के लिए तैयार प्रीमियम कम हो गया है. जीएमपी 5 सितंबर को 310 रुपये पर था. 6 सितंबर को गिरकर 273 रुपये, 7 सितंबर को 221 रुपये और 8 सितंबर को 257 रुपये हो गया.
ताजा आंकड़ों के मुताबिक 9 सितंबर को यह गिरकर 222 रुपये, 10 सितंबर को 192 रुपये और 11 सितंबर को 190 रुपये हो गया. ग्रे मार्केट प्रीमियम एक अनौपचारिक संकेतक है. जरूरी नहीं है कि इसी भाव के आसपास लिस्टिंग हो.
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