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इंफोसिस, एचसीएलटेक और कोफोर्ज के शेयर 6% तक लुढ़के, आईटी शेयरों में भारी गिरावट क्यों आई?

अमेरिका में कर्ज महंगा होने की संभावना है. ऐसे में अमेरिका कंपनियां टेक्नोलॉजी में होने वाला खर्च घटा सकती हैं. भारत की आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका के बाजार से आता है.

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अमेरिका में हो रही हलचल का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर होगा. (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • 9 सितंबर को निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.06% की गिरावट आई, जिसमें प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में भी 2.07% से 5.70% के बीच गिरावट दर्ज की गई।
  • अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना और रोजगार आंकड़ों के बेहतर आने से फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि का अनुमान बढ़ा, जिससे अमेरिकी कंपनियों का खर्च घटने का खतरा उत्पन्न हुआ।
  • कोफोर्ज के चेयरमैन के इस्तीफे और काग्निजेंट के अमेरिका में परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन निलंबन के कारण आईटी सेक्टर में दबाव बढ़ा, जिससे बाजार में व्यापक कमजोरी देखी गई।

आईटी शेयरों में एक बार फिर भारी गिरावट देखने को मिल रही है. 9 सितंबर को निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 3.06% गिर गया, जिससे यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक बन गया. शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के प्रमुख शेयरों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 3.67%, इंफोसिस में 3.50%, टेक महिंद्रा में 3.43% और टीसीएस में 2.88% की गिरावट दर्ज की गई.

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इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी क्षेत्र में और गहराई से उतरें, तो कोफोर्ज में 5.70%, एलटीआई माइंडट्री में 2.52%, परसिस्टेंट सिस्टम्स में 2.42% और विप्रो में 2.07% की गिरावट भी शामिल है.

आईटी शेयरों में तेज गिरावट क्यों?

अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं. अमेरिका के रोजगार संबंधी आंकड़ों के उम्मीद से बेहतर आने से यह आशंका बढ़ गई है कि अमेरिका का फेडरल रिजर्व बैंक सितंबर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है. अगर अमेरिका में कर्ज महंगा होता है, तो अमेरिकी कंपनियां आईटी और टेक में अपना खर्च घटा सकती हैं. 

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अमेरिका भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अहम है. आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है. ऐसे में अगर अमेरिकी कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च में देरी करती हैं या सावधानी बरतती हैं, तो भारतीय आईटी फर्मों को सौदे हासिल करने, राजस्व वृद्धि और मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है.

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कोफोर्ज और कॉग्निजेंट ने दिया तगड़ा झटका 

कोफोर्ज और कॉग्निजेंट में हो रहे घटनाक्रमों से पूरे आईटी सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है. कोफोर्ज के इंटरनल ऑडिट में उठाई गई चिंताओं के बाद चेयरमैन ओम प्रकाश भट्ट ने इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद शुरुआती कारोबार में कोफोर्ज का शेयर 5.70% गिर गया. कोफोर्ज में आई तेज गिरावट ने आईटी शेयरों में व्यापक कमजोरी को और बढ़ा दिया है. 

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वहीं, अमेरिका ने काग्निजेंट के परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन से जुड़े आवेदनों को निलंबित कर दिया है . यह उस प्रक्रिया का पहला चरण है जिसके जरिए एम्प्लायर विदेशी कामगारों को स्थायी निवास के लिए स्पॉन्सर करते हैं. कॉग्निजेंट अमेरिका में सबसे बड़े एच-1बी स्पॉन्सर में से एक है.
 

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