पहली कार खरीदने का अपना ही मजा है, स्पेशली मध्यमवर्गीय परिवारों में. पहली कार लेने के लिए बड़ी तैयारी की जाती है. एक तरफ बजट बनाया जाता तो दूसरी तरफ पार्किंग की जगह भी देखी जाती है. डाउन पेमेंट कितना करना है और ईएमआई कितनी भरनी है, इसको लेकर भी विस्तार से चर्चा होती है. सब ठीक है मगर गड्डी लेनी कौन सी है, इसको लेकर गरारी फंस (tips for first time car buyer) जाती है. पेट्रोल अच्छी या डीजल वाली. दोनों को छोड़कर मॉडर्न ईवी लेना ठीक रहेगा क्या? अजी छोड़िए इन सभी को. हाइब्रिड लेते हैं क्योंकि वो फ्यूचर है. बड़ी गफलत. हम इसको दूर करते हैं.
पहली बार कार खरीदने जा रहे हैं, तो जानिए कौन सी सबसे अच्छी रहेगी
Tips for first time car buyer: पहली बार कार खरीदने वाले हैं और डीजल, पेट्रोल, हाइब्रिड, ईवी में कंफ्यूज हो रहे हैं. समझ नहीं आ रहा कि क्या करें? डीजल में बढ़िया माइलेज मिल रहा तो ईवी में तो 1 रुपये प्रति किलोमीटर में काम हो जाएगा. सबसे अच्छा हाइब्रिड खरीद लेते हैं. आखिर कौन सी कार खरीदें, आज हम ये गफलत दूर करे देते हैं.


# डीजल गाड़ी: साल 2026 में डीजल गाड़ी लेना एकदम ही समझदारी नहीं है. ना-ना बात इनके बैन होने और प्रदूषण फैलाने की नहीं है. मॉडर्न डीजन इंजन अब धुआं कम छोड़ते हैं मगर BS6 आने से इन कारों के DPF में क्लोगिंग की समस्या हो सकती है. दरअसल डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) को डिजाइन किया है लंबी दूरी के लिए. माने जो आपकी कार 60 और 80 km/h की हाई स्पीड पर चलती है तो ठीक, नहीं तो फ़िल्टर में कालिख जमा होगी. अगर ये कालिख एक बार फिल्टर में अच्छे से जमा हो गई, तो इसे किसी प्रोफेशनल के पास जाकर साफ कराना या इन कालिख को जलवाना पड़ता है. ज्यादातर मामलों में इस पूरे फिल्टर को ही रिप्लेस करना एक ऑप्शन बचता है. जिसमें 1 लाख रुपये तक का खर्चा आ सकता है. ऊपर से ये चेंजिंग प्रोसेस इंश्योरेंस या एक्सटेंडेड वारंटी में कवर नहीं होती है. इसलिए ये पैसा भी आपकी जेब से ही जाता है. इसलिए ऑफिस से घर और घर से ऑफिस के लिए डीजल कार तो सही नहीं.
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# ईवी में तो पैसा खर्च ही नहीं होता: इलेक्ट्रिक कारों के लिए हमेशा से यही कहा जाता है, क्योंकि इनको तो बस चार्ज करना होता है. ये बात तभी तक सही है जब तक आप ईवी को अपने घर पर चार्ज कर रहे. जैसे ही आप ईवी को बाजार में लगे किसी चार्जर से चार्ज करेंगे तो प्रति किलोमीटर खर्च 4-5 रुपये आएगा. आजकल तो घर में चार्जर लगाने को लेकर भी दिक्कत आ रही है, स्पेशली हाईराइज बिल्डिंग में. फायर डिपार्टमेंट तो एनओसी नहीं दे रहा. ईवी पर पहली बार में अपफ्रन्ट पैसा भी ज्यादा लगता है. माने जहां एक पेट्रोल कार 10 लाख में अच्छी वाली मिल जाएगी तो ईवी में 15 लाख लगेंगे. माने पहले दिन 5 लाख एक्स्ट्रा. गणित के हिसाब से फिलहाल तो ईवी खरीदना कोई समझदारी का सौदा नहीं.

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# हाइब्रिड तो फ्यूचर है: हां, दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी टोयोटा भी यही मानती है, इसलिए वो ईवी पर ज्यादा फोकस नहीं करती. वैसे बात तो सही भी है. हाइब्रिड कार से आराम से 25-30 किलोमीटर का माइलेज मिलता है, लेकिन यहां भी गणित ईवी जैसा है. पेट्रोल के मुकाबले पहले ही दिन 5 लाख एक्स्ट्रा देने होते हैं. ऐसे में एक्स्ट्रा माइलेज से जो बचेगा, वो डाउनपेमेंट और ईएमआई में फुक जाएगा.
# पेट्रोल कार: पहली गाड़ी के लिए आज भी पेट्रोल कार ही सबसे मुफीद ऑप्शन है. पेट्रोल और ऑटोमेटिक का कॉम्बो आपके लिए ठीक रहेगा. आजकल तो 5.5 लाख में भी ऑटोमेटिक पेट्रोल गाड़ी मिल जाती है. मॉडर्न इंजन आराम से 15 से 20 के बीच में माइलेज भी देते हैं. पेट्रोल गाड़ी पर बैन का भी झंझट नहीं है. 15 साल आराम से कट जाते हैं. पेट्रोल गाड़ी का रखरखाव भी जेब पर भारी नहीं पड़ता और इनकी रीसेल वैल्यू भी अच्छी होती है. अगर ऐसा नहीं होता तो मारुति की वैगन-आर आज भी सबसे ज्यादा बिकने वाली कार नहीं होती. 10 लाख के बजट में तो कॉमपेक्ट एसयूवी भी मिल जाती है आजकल. इसलिए जो आप पहली कार खरीदने वाले हैं और सफर ऑफिस से घर और घर से मॉल रहने वाला है तो पेट्रोल पर गियर लगा लीजिए. अमा यार हम भी गियर लिख रहे. ऑटोमेटिक है. एस्केलेटर दबा दीजिए.
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