EV का मामला पेट्रोल/डीजल गाड़ी से एकदम अलग है. नई गाड़ी खरीदने से लेकर चलाने और ब्रेक लगाने का तरीका एकदम अलग. चार्ज करने और रेंज निकालने के लिए भी काफी कुछ करना पड़ता है. अगर ये सब आपको नहीं पता तो यकीन जानिए आपकी इलेक्ट्रिक कार आपको झटका देने वाली है. आपको लगेगा कि क्या बे-कार चीज खरीद ली. लेकिन हमारे रहते ऐसा बिल्कुल नहीं होगा. हम आपको इलेक्ट्रिक कार की ‘EBCD’ बताते हैं.
EV खरीदने से पहले उसकी 'EBCD' समझ लीजिए, वर्ना सफर बड़ा 'Suffering' होगा!
EV से जुड़ी जरूरी बातें जो आपको पता होनी ही चाहिए. मसलन बैटरी कैसे बैटर रहेगी. चार्जिंग का क्या हिसाब-किताब है. AC चार्जिंग अच्छी या DC. रेंज का रियल खेल क्या है और ब्रेक कैसे मारना है. अगर ये नहीं पता तो फिर आपकी इलेक्ट्रिक कार आपको झटके देने वाली है.

ईवी की बैटरी ही उसका सब कुछ होता है. रेंज भी इससे मिलने वाली है और अगर ये बिगड़ी तो फिर लंबा फटका लगेगा. इसलिए देख लीजिए कि गाड़ी में कौन सी बैटरी लगी है. NMC या LFP. दोनों ही लिथियम-आयन बैटरी ही हैं, बस टेक्नोलॉजी का अंतर है. NMC में निकल, मैंगनीज और कोबाल्ट होता है तो LFP में लिथियम, आयरन और फॉस्फेट का उपयोग होता है.
अगर आपकी गाड़ी में LFP बैटरी लगी है तो आप उसे रोज 100 फीसदी चार्ज कर सकते हैं. अगर रोज का टाइम नहीं तो हफ्ते में दो बार तो फुल चार्ज करना ही चाहिए. इससे गाड़ी का BMS सिस्टम सही रहता है. अगर गाड़ी में NMC बैटरी लगी है तो फिर 80-20 वाले नियम से चलिए. 20 से नीचे मत आने दीजिए और 80 से ऊपर मत जाने दीजिए. बैटरी लंबी चलेगी. अगर ट्रिप पर जा रहे तो फिर 100 का आंकड़ा छू लीजिए.
चार्जिंग में घर के खाने और बाहर के खाने वाला वाला नियम अपनाइए. घर का खाना माने AC चार्जिंग माने कार के साथ आया हुआ चार्जर इस्तेमाल कीजिए. ये चार्जर एसी करेंट को डीसी में बदलता है क्योंकि गाड़ी में लगी बैटरी इसे डीसी (डायरेक्ट करेंट) में ही स्टोर करती है. इससे टेम तो लगता है मगर बैटरी पर असर कम पड़ता है. Slow and steady wins the race मामला.
DC चार्जिंग माने बाहर का खाना. माने कभी-कभार वाला सिस्टम. इसमें बैटरी जल्दी चार्ज होती है. मगर उसका पेट गड़बड़ हो जाता है. डीसी चार्जिंग मतलब एक सांस में लीटर पानी गटक जाना. प्यास तो बुझ जाएगी मगर ठसका भी लग सकता है. इसका इस्तेमाल बाहर जाने पर ही कीजिए.

ईवी की रेंज का अगर पूरा फायदा उठाना है तो गड्डी नू ECO मोड में चलाइए. शहर के लिए यही मोड सबसे बढ़िया है. इसे कुछ गाड़ियों में सिटी मोड भी कहा जाता है. आपको ईवी की पावर भी फील होगी और बार-बार चार्ज करने की चिंता भी कम रहेगी. स्पोर्ट्स मोड में तभी खेलना है जब हाईवे पर सवारी चल रही हो. पावर तो खूब मिलेगी मगर रेंज कम हो जाएगी. इसलिए चार्जिंग पॉइंट का पता जरूर कर लेना.
ईवी में हाई स्पीड, जमा देने वाला AC, पहाड़ी की चढ़ाई, एक्सीलेटर पर जोर से दबाया पैर भी रेंज को कम करते हैं. इससे बचिए. कंपनी ने जितनी रेंज बताई उससे 30 फीसदी घटाकर सफर प्लान कीजिए. Suffer नहीं करना पड़ेगा.
Regen Braking का सिस्टमइलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी और रेंज के गेम का असल खिलाड़ी है RBS. यानी रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम. एक तकनीक है, जो ब्रेक लगाते समय निकलने वाली एनर्जी को बर्बाद होने के बजाय बैटरी चार्ज करने में इस्तेमाल करती है. लेकिन अगर इसका लेवल सही से सेट नहीं तो फिर ये रेंज पर ब्रेक मार देती है. इसलिए बारिश में इसे बंद रखिए या जीरो पर सेट कीजिए.
हाईवे पर क्रूज कर रहे और सड़क एकदम मक्खन जैसे स्मूथ है तो लेवल वन. सिटी में चल रहे तो लेवल टू और हैवी ट्रैफिक और पहाड़ से उतरते समय लेवल 3 पर रखिए. गाड़ी की रेंज अच्छी मिलेगी.
हैप्पी सफरिंग!
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