इथेनॉल को लेकर लोगों में बहुत कंफ्यूजन है. गाड़ी का माइलेज कम होने से लेकर इंजन पार्ट्स में खराबी तक के दावे किए जाते हैं. सभी पेट्रोल पंपों पर 'सिर्फ इथेनॉल बेस्ड E20 पेट्रोल' को अनिवार्य करने के मोदी सरकार के फैसले से विवाद ज्यादा बढ़ा है. लोगों के पास दूसरा ऑप्शन नहीं है. E20 को लेकर जारी बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने इथेनॉल कंट्रोवर्सी को सुलझाने की कोशिश की है. भाजपा सांसद ने एक वीडियो बनाया, जिसमें खालिस पेट्रोल और इथेनॉल को एक साथ जलाकर दिखाया गया. दोनों की परफॉर्मेंस की तुलना की. आखिर तक कौन टिका?
BJP सांसद ने पेट्रोल और इथेनॉल को एक साथ जलाकर VIDEO बनाया, कौन सा तेल टिक पाया?
E20 Petrol: BJP सांसद Konda Vishweshwar Reddy का तर्क है कि Ethanol के इस्तेमाल से भारत का विदेशी मुद्रा खर्च कम हो सकता है, क्योंकि देश को कच्चे तेल के लिए अमेरिका, सऊदी अरब और पश्चिम एशिया के दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है.

कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी तेलंगाना की चेवेल्ला सीट से लोकसभा सांसद हैं. वे एक इंजीनियर भी हैं. उन्होंने वीडियो में स्टील के दो गिलास लिए. एक गिलास में पेट्रोल था, जबकि दूसरे में इथेनॉल. दोनों में बराबर मात्रा में पेट्रोल और इथेनॉल डाला गया. इसके बाद दोनों में एक साथ आग लगा दी गई.
पेट्रोल vs इथेनॉलBJP सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी के मुताबिक, जिस फ्यूल की लौ ज्यादा देर तक जले और जो कम कालिख छोड़े, वह बेहतर माना जा सकता है. वीडियो में पेट्रोल तेजी से जलकर खत्म होता दिखाई दिया और उसके बाद गिलास में ज्यादा कालिख नजर आई. दूसरी तरफ इथेनॉल उसके मुकाबले ज्यादा देर तक जलता रहा और गिलास में ना के बराबर कालिख दिखाई दी.
इसी एक्सपेरिमेंट के आधार पर सांसद ने इथेनॉल को बेहतर ईंधन बताया. उनका तर्क है कि इथेनॉल के इस्तेमाल से भारत का विदेशी मुद्रा खर्च कम हो सकता है, क्योंकि देश को कच्चे तेल के लिए अमेरिका, सऊदी अरब और पश्चिम एशिया के दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है. इथेनॉल गन्ने और मक्का जैसे अनाज से बनता है. उनके मुताबिक, इथेनॉल तैयार करने में कोई दिक्कत नहीं है.
हालांकि, भारत सरकार के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने आगाह किया कि देश इथेनॉल पर आगे बढ़ा तो खाना, पानी और जमीन के यूज को पलटना बहुत मुश्किल हो जाएगा. उनके मुताबिक, पुरानी गाड़ियों के लिए E10 का विकल्प देना और E20 पर सावधानी से आगे बढ़ना बेहतर रास्ता हो सकता है. इस बारे में पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
गाड़ी के इंजन की बात अलगलेकिन यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है. क्या खुले गिलास में पेट्रोल और इथेनॉल जलने का यह फर्क आपकी गाड़ी के इंजन के अंदर भी उसी तरह दिखाई देगा? तो जवाब है 'नहीं'. दोनों मामले एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं.
वीडियो में फ्यूल को खुले माहौल में स्टील के गिलास में जलाया गया, जबकि कार में ईंधन एक सीलबंद इंजन सिस्टम के अंदर जाता है, जहां एयर-फ्यूल मिक्सचर, कंप्रेशन, इग्निशन, इंजन डिजाइन और दूसरे कई फैक्टर उसकी परफॉर्मेंस तय करते हैं. ऐसे इंजन को इंटरनल कंबशन इंजन (IC Enigine) कहा जाता है.
इसलिए सिर्फ यह देखना कि कौन सा फ्यूल खुले में ज्यादा देर तक जलता है या किससे कम कालिख निकलती है, इससे यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि वही तेल हर कार में बेहतर माइलेज देगा या इंजन पर उसका असर कैसा होगा.
यानी सांसद का वीडियो इथेनॉल की कुछ क्वालिटी को दिखाने वाला एक साधारण प्रदर्शन जरूर है, लेकिन इसे सीधे गाड़ी के माइलेज, इंजन की उम्र या E20 पेट्रोल की पूरी परफॉर्मेंस का सर्टिफिकेट मानना सही नहीं होगा. E20 को समझने के लिए लैब टेस्ट और असल इंजन कंडीशन में किए गए टेस्ट ज्यादा मायने रखते हैं.
क्या बोले जानकार?इंडिया टुडे डिजिटल से जुड़े शौनक सान्याल ने 'ऑटो टुडे' के डिप्टी एडिटर राहुल घोष से BJP सांसद रेड्डी के एक्सपेरिमेंट पर बात की. राहुल ने बताया कि सांसद का एक्सपेरिमेंट इस बात को ध्यान में नहीं रखता कि इथेनॉल, या इथेनॉल-ब्लेंड पेट्रोल, इंटरनल कंबशन इंजन (IC Enigine) के अंदर जलने पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं.
राहुल घोष ने कहा,
"सख्त होते उत्सर्जन नियमों के साथ, इंजन में जलने (कंबशन) को बहुत अच्छी तरह से कंट्रोल करना होगा ताकि (तेल) अच्छे से जल सके. कोई भी कंटैमिनेंट (खराबी) जिसे जलने वाले मटीरियल के तौर पर ग्रेड नहीं किया गया है, इंजन की एफिशिएंसी को कम करता है. नमी, जो फ्लेक्स फ्यूल (इथेनॉल के साथ मिला हुआ पेट्रोल) की एक साथी है, असल में जलने वाली नहीं होती, और इस तरह, यह इंजन की एफिशिएंसी को कम करती है. हालांकि, खुली जगह में फ्यूल जलाना (जैसा BJP सांसद ने किया) पूरी तरह से अलग बात है."
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इसलिए, सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने यह तो दिखा दिया कि स्टील के गिलास में जलाने पर इथेनॉल, पेट्रोल से कम प्रदूषण करता है. लेकिन, एक्सपेरिमेंट यह दिखाने में नाकाम रहा कि अगर इसे इंटरनल कंबशन इंजन में जलाया जाए तो क्या होगा. इस बीच, भाजपा सांसद ने दावा किया कि वे माइलेज, इंजन में खराबी समेत इथेनॉल से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी वीडियो बनाकर स्थिति साफ करेंगे.
वीडियो: E20 पेट्रोल एक्सपेरिमेंट, इथेनॉल ब्लेंडिंग वाली मीडिया रिपोर्ट्स पर सरकार की सफाई













