भारत में इथेनॉल वाले E20 पेट्रोल को लेकर भारी विवाद है. सबसे ज्यादा टेंशन उन लोगों को है, जिनकी गाड़ियां अप्रैल 2023 से पहले की हैं. ये गाड़ियां E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के लायक नहीं बनी हैं. इसलिए पेट्रोल पंपों पर E20 के अलावा पहले वाला E10 पेट्रोल देने की मांग लगातार उठ रही है. केंद्र सरकार भी लगातार इस मांग को कई कारणों से ठुकराती रही है. लेकिन, अब लगता है कि सरकार और ऑयल इंडस्ट्री मिलकर E10 पेट्रोल देने की संभावनाएं तलाश रहे हैं.
E10 पेट्रोल वापस लाने पर सरकार ने शुरू की बातचीत, पेट्रोल पंपों के टैंक बन रहे बड़ी प्रॉब्लम
सभी पेट्रोल पंपों पर सिर्फ E20 पेट्रोल की बिक्री जरूरी करने के फैसले का भारी विरोध हुआ. मोदी सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटी. लेकिन, अब लगता है कि सरकार और ऑयल इंडस्ट्री मिलकर E10 पेट्रोल देने की संभावनाएं तलाश रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खबर में सूत्रों के हवाले से बताया कि E10 की वापसी के लिए सरकार और इंडस्ट्री के बीच चर्चा शुरू की है. यह कोशिश ऐसे समय हुई, जब E20 की वजह से पुरानी गाड़ियों का माइलेज कम होने और गाड़ी का इंजन खराब होने के दावे देखे गए. मगर, केंद्र सरकार ने इन दावाों को हमेशा खारिज किया है.
सबसे ज्यादा दिक्कत उन करोड़ों लोगों को है, जिनकी बाइक और टू-व्हीलर E20 को सपोर्ट नहीं करते. इसलिए E20 के साथ E10 पेट्रोल देने की मांग की जा रही है.
अब लगता है कि सरकार इथेनॉल वाले पेट्रोल पर छिड़ा विवाद थामने के मूड में है. बातचीत के दरवाजे खुल गए. सूत्रों ने इशारा किया कि यह चर्चा बहुत शुरुआती चरण में है, जो पुरानी गाड़ियों के मालिकों को ध्यान में रखकर शुरू की गई. देश के बहुत पेचीदा फ्यूल रिटेल सप्लाई चेन के तमाम टेक्निल और नॉन-टेक्निकल पहलुओं को ध्यान में रखकर बात हुई. लेकिन, अब तक फाइनल नतीजा नहीं निकला.
ऑयल इंडस्ट्री से क्या पता चला?ऑयल इंडस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, पेट्रोल के दो बेस वेरिएंट- E10 और E20 को एक साथ उपलब्ध कराना 'आसान और सीधा' काम नहीं है. इसमें कई मुश्किलें होंगी. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑयल इंडस्ट्री के इस अधिकारी ने बताया,
"यह एक नया पेट्रोल वेरिएंट लाने जैसा होगा, वह भी बड़ी मात्रा में. बेस फ्यूल (E20) के अलावा, हमारे पास दो-तीन प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट हैं, लेकिन बेस पेट्रोल की तुलना में उनकी खपत बहुत कम है, इसलिए E20 के साथ ऐसे फ्यूल की कुछ मात्रा देना बहुत मुश्किल नहीं है. लेकिन अगर E10 को बड़ी मात्रा में (पेट्रोल पंपों पर) देना है, तो इसके लिए लगभग पैरेलल सप्लाई चेन बनाने की जरूरत होगी, क्योंकि मौजूदा सप्लाई चेन पूरी तरह से E20 पर शिफ्ट हो गई है."
सभी पेट्रोल पंपों पर सिर्फ E20 पेट्रोल की बिक्री जरूरी करने के फैसले का भारी विरोध हुआ. मोदी सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटी. सरकार की तरफ से कहा गया कि देश के पेट्रोल पंप एक या दो अंडरग्राउंड फ्यूल टैंक के जरिए चलते हैं.
अगर E10 भी आया तो सिंगल टैंक की जगह डबल टैंक बनाने होंगे. नए सिरे से सप्लाई चेन शुरू करनी होगी. सप्लाई के समय E10 और E20 आपस में मिक्स ना हों, इसका भी ध्यान रखना होगा. ऐसे ही कारण सरकार की तरफ से गिनाए गए.
मगर, पिछले दिनों भारत सरकार के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने खुद E10 पेट्रोल लाने की पैरवी की. उन्होंने आगाह किया कि Ethanol पर आगे बढ़े तो खाना, पानी और जमीन के यूज को पलटना बहुत मुश्किल हो जाएगा. उनके मुताबिक, पुरानी गाड़ियों के लिए E10 का विकल्प देना और E20 पर सावधानी से आगे बढ़ना बेहतर रास्ता हो सकता है.
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पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने भी हाल ही में खत्म हुए मानसून सेशन में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए अपनी बात दोहराई,
" …अगर एक साफ, तेज और कम प्रदूषण करने वाला फ्यूल मौजूद है, तो हम जानबूझकर एक घटिया ऑप्शन क्यों चुनेंगे? यह सुझाव कि हर पेट्रोल पंप को एक साथ प्योर पेट्रोल, E10 और E20 स्टॉक करना चाहिए, (यह) भारत के फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की असलियत को भी नजरअंदाज करता है. भारत में एक लाख से ज्यादा रिटेल आउटलेट हैं, जिन्हें रिफाइनरियों, टर्मिनलों, डिपो और पाइपलाइनों के एक बड़े नेटवर्क से सपोर्ट मिलता है. इस बड़ी सप्लाई चेन में बेस पेट्रोल के कई ग्रेड बनाए रखने से एक बहुत बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती पैदा होगी, हैंडलिंग कॉस्ट बढ़ेगी, इन्वेंट्री मैनेजमेंट मुश्किल होगा और ऑपरेशनल एफिशिएंसी कम होगी."
मिनिस्ट्री ने यह बात 10 जुलाई को एक सवाल के जवाब में (FAQs) कही थी. इसमें मिनिस्ट्री ने पेट्रोल पंपों पर कई तरह के पेट्रोल देने का आइडिया खारिज किया था. अब देखना होगा कि ऑयल इंडस्ट्री के साथ सरकार की बातचीत का क्या नतीजा निकलता है.
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