आप लोन पर ली गई कार, बाइक या किसी दूसरी गाड़ी की ईएमआई नहीं भर पाए तो क्या होगा? एकाध ईएमआई चूक गई और फिर आपने उसे भर दिया और फिर रेगुलर हो गए तो कुछ नहीं होगा. हां, जो तीन ईएमआई चूकी और आपका अकाउंट NPA (Non-Performing Asset) घोषित हुआ, तो बैंक या NBFC (Non-Banking Financial Company) आपकी गाड़ी जब्त कर सकते हैं. यहां तक तो सब ठीक लग रहा है, लेकिन क्या इनके एजेंट बीच सड़क आपको रोककर आपकी गाड़ी ले जा सकते हैं. क्या बिना आपसे पूछे आपके घर के सामने से गाड़ी उठाई जा सकती है?
EMI नहीं भरी तो जबरन उठा ली गाड़ी, सुप्रीम कोर्ट ने फाइनेंस कंपनी पर लाखों का हर्जाना ठोका
आपकी लोन वाली गाड़ी की EMI बाउंस हुई तो क्या एजेंट बीच सड़क आपको रोककर आपकी गाड़ी ले जा सकते हैं? क्या बिना आपसे पूछे आपके घर के सामने से गाड़ी उठाई जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुना दिया है.

हाल ही में उत्तर प्रदेश से ऐसे ही एक ट्रक जबरन उठा लेने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. उत्तर प्रदेश के व्यक्ति ने ट्रक खरीदने के लिए 2019 में चोलमंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था. साल 2022 में वह किस्तें नहीं चुका पाए तो कंपनी ने नोटिस दिया और ट्रक अपने कब्जे में ले लिया. बाद में ग्राहक ने एकमुश्त रकम जमा की तो उसे ट्रक वापस मिल गया.
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इसके बाद फिर ईएमआई का भुगतान नहीं हो पाया. पीड़ित के मुताबिक, 9 अप्रैल 2023 की रात करीब 1:00 बजे अयोध्या में सामान पहुंचाने के बाद चार अज्ञात लोगों ने खड़े ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़ा और उसे लेकर चले गए. माने जबरन गाड़ी उठा ले गए.
ट्रक मालिक के मुताबिक उसे कार्रवाई से पहले उचित नोटिस नहीं दिया गया था और बाद में ट्रक बेच दिया गया. गाड़ी CCTV की निगरानी में खड़ी थी तो सब दिख गया. उसी दिन ई-FIR दर्ज कराई गई, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
इसके बाद अयोध्या के पुलिस अधीक्षक (SP) के पास शिकायत दर्ज कराई गई. लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट का सहारा लिया. जिला कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली, तो शख्स ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
लीगल वेबसाइट Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि बैंक या फाइनेंसर लोन की शर्तों के ईएमआई चूक जाने पर गाड़ी वापस ले सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक या फाइनेंस कंपनी बल प्रयोग करके या चोरी-छिपे गाड़ी कब्जे में ले सकती है.
16 सितंबर के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वसूली के लिए कानूनी रास्ता अपनाना होगा. रात में ताला तोड़ना, सड़क से जबरदस्ती गाड़ी ले जाना या लोगों के जरिए दबाव बनाना सही तरीका नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट का ऑर्डर रद्द किया, और कंपनी को ग्राहक के अधिकारों के उल्लंघन के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रक की बिक्री को रद्द नहीं किया, लेकिन कंपनी को निर्देश दिया कि वो ट्रक वाले के दोनों लोन अकाउंट बंद करे. कोर्ट ने ट्रक वाले को कुल 14.50 लाख रुपये देने का आदेश दिया. आदेश के अनुसार, कंपनी को ट्रक बेचने से मिले 4.50 लाख रुपये की रकम ट्रक वाले को वापस करनी होगी. इस रकम पर ट्रक की बिक्री की तारीख से पेमेंट होने तक 6 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा.
इसके अलावा, मानसिक पीड़ा और लंबे समय तक रोजी-रोटी के नुकसान के बदले ट्रक वाले को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया. मुकदमा खर्च के एवज में 50 हजार रुपये अलग से दिए जाएंगे.
तो क्या बैंक गाड़ी जब्त नहीं कर सकता?बिल्कुल कर सकता है लेकिन नियम के तहत. माने जब्ती से पहले सात दिन का नोटिस देना होगा. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि वाहन वापस लेने से पहले सात दिन का नोटिस नहीं दिया गया था. RBI के पुराने दिशानिर्देशों में भी लोन वसूली के दौरान ग्राहक को अनावश्यक रूप से परेशान करने, गलत समय पर कॉन्टेक्ट करने और फोर्स का इस्तेमाल करने से बचने को कहा गया है.
जबरन वसूली, गुंडागर्दी तो एकदम नहीं चलेगी. तो कभी अगर आपके साथ ऐसा हो, माने कोई बैंक का एजेंट आपको गाड़ी छोड़ने को बोले या धमकाए तो आपने घबराना नहीं है. नोटिस मांगिए और सबसे अच्छा तो यही कि ईएमआई बाउंस होने ही मत दीजिए.
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